Night Shift में करते हैं काम तो जान लें हेल्दी रहने के ये उपाय, नहीं तो इन 6 चीजों से हमेशा रहेंगे परेशान – ayurveda doctor sharad kulkarni shared health tips for night shift workers

बेहतर जीवन जीने के लिए लोग नौकरी या खुद का व्यवसाय करते हैं। जहां इससे खुद की और घर की सभी जरूरतें और ख्वाहिशें पूरी होती हैं। वहीं, इसके साथ कुछ ऐसे कारक भी जुड़े होते हैं, जो हमारे जीवन को नकारात्म रूप से प्रभावित करते हैं। इनमें से ही एक है नाइट शिफ्ट कई पेशे ऐसे होते हैं जहां 24 घंटे काम करना जरूरी होता है। जिसमें सबसे आम हैं चिकित्सा, पुलिस, रक्षाबल, मीडिया आदि। लेकिन क्या जानते रात में नहीं सोने से आपके शरीर पर बहुत सारी गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, नाइट शिफ्ट और लंबे समय तक काम करने और कई स्वास्थ्य समस्याओं के बीच एक कड़ी है। इनमें मेटाबॉलिज्म से संबंधी समस्याओं, हृदय रोग, जठरांत्र संबंधी कठिनाइयों, मोटापा और कुछ कैंसर का खतरा शामिल है।

आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉक्टर शरद कुलकर्णी बताते हैं कि यदि आप रात में नहीं सोते हैं तो आप कई सारी गंभीर और जानलेवा बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं। हालांकि नींद की कमी से होने वाली कमी को पूरी तरह से नहीं रोका जा सकता है, लेकिन कुछ उपायों के माध्यम से आप इनके प्रभावों को कम कर सकते हैं। चलिए जानते हैं नाइट शिफ्ट करते हुए स्वस्थ्य रहने के उपाय।

बॉडी की सर्कैडियन रिद्धम होती है डिस्टर्ब

रात की पाली में काम करने से शरीर की सर्कैडियन रिद्धम या 24 घंटे की आंतरिक क्लॉक बाधित होती है जो नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करती है। यह मधुमेह, हृदय रोग और मोटापे के विकास के जोखिम को बढ़ाता है।

एनआईएच में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि रात में खाने से, जैसा कि कई नाइट शिफ्ट में काम करने वाले करते हैं, शरीर की चीनी, या ग्लूकोज को संसाधित करने की क्षमता कम हो जाती है।

​मेंटल हेल्थ रहता है खराब

नाइट शिफ्ट में काम करने वालों में अवसाद और अन्य मनोदशा संबंधी विकारों के लक्षणों से पीड़ित होने की संभावना अधिक होती है। नाइट शिफ्ट का काम सीधे मस्तिष्क रसायन को भी प्रभावित कर सकता है। 2007 के एक अध्ययन में पाया गया कि दिन के श्रमिकों की तुलना में, रात के श्रमिकों में सेरोटोनिन का स्तर काफी कम था, एक मस्तिष्क रसायन जो मूड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

​दिल की बीमारी का जोखिम

Webmd के अनुसार, नाइट शिफ्ट में काम से हृदय रोग का खतरा 40% तक बढ़ जाता है। एक स्टडी में पाया गया कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में हर पांच साल में स्ट्रोक का खतरा 5% बढ़ जाता है। हालांकि, 15 साल लगातार नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में ही स्ट्रोक का जोखिम देखने के लिए मिला है।

​मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा

नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा ज्यादा रहता है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त शर्करा, मोटापा और अस्वास्थ्यकर कोलेस्ट्रॉल के स्तर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का एक संयोजन है। यह मधुमेह, दिल के दौरे और स्ट्रोक के लिए एक गंभीर जोखिम कारक है।

​इनफर्टिलिटी की समस्या

नाइट शिफ्ट का काम महिला के प्रजनन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। फ्लाइट अटेंडेंट पर किए गए एक स्टडी के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान काम करने वाली फ्लाइट अटेंडेंट में गर्भपात होने की संभावना दोगुनी थी। नाइट शिफ्ट का काम प्रसव के दौरान जटिलताओं, प्रजनन समस्याओं, एंडोमेट्रियोसिस, अनियमित पीरियड्स और दर्दनाक पीरियड्स के साथ जुड़ा हुआ है।

​गंभीर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानी

नाइट शिफ्ट के काम से पेप्टिक अल्सर का खतरा बढ़ जाता है। यह सामान्य जीआई लक्षणों (जैसे मतली, दस्त, और कब्ज) और संभवतः कुछ प्रकार के कार्यात्मक आंत्र रोग के जोखिम को बढ़ाता है।

​ऐसे करे नाइट शिफ्ट के परिणामों से बचाव

आयुर्वेद एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि आप नाइट शिफ्ट करते हैं, तो अपने जीवनशैली और खान-पान की आदतों में सुधार करना बहुत जरूरी है। कोशिश करें कि आप रात 8 बजे से पहले हल्का भोजन कर लें। अधिक तरल भोजन विशेष रूप से रात में पानी पीना आवश्यक है। क्योंकि नींद के बिना शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है। ध्यान रखें कि नाइट शिफ्ट करके घर जाकर सीधे सोएं नहीं पहले कुछ हल्का नाश्ता करें, फिर सोएं। ऐसा करने से आप नाइट शिफ्ट के वजह से नींद की कमी से होने वाले दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।


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