नई दिल्लीः कोविड-19 के चलते अब चीन के लोग मांस खाने से डर रहे हैं. चीन हर तरह के अनहेल्दी फूड का सेंटर माना जाता है. चाहे वह सेंटीपीड्स हो, कुत्ते का मांस हो या फिर टारेंटुलस यानी कि एक विषैली मकड़ी. यहां के बाजार में इस तरह के अनहेल्दी फूड हमेशा रहते हैं. हालांकि कोरोना के कहर के चलते यहां के लोगों के खान-पान में काफी बदलाव देखने को मिल रहा है.
कोरोना काल में चीन की तमाम कंपनियां सेहत को ध्यान में रखते हुए प्लांट बेस्ड मीट (Plant-based Meat) उत्पादों में निवेश कर रही हैं. हालांकि वर्तमान में भी चीन अधिक मात्रा में मीट सप्लाई करता है और कोविड में यहां की मांस आपूर्ति में ज्यादा कुछ बदलाव देखने को नहीं मिला. लेकिन दुनियाभर में तमाम लोग ऐसे भी हैं जो मांसाहार के बदले शाकाहारी विकल्प का चुनाव कर लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं. इनमें चीन भी एक देश शामिल है.
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मीट इंक से परे, हाल ही में अमेरिका की एक कंपनी ने शंघाई के पास प्रोडक्शन फैसेलिटी स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है. गौरतलब है कि इससे पहले, कंपनी ने चीन में कॉफी की दुकानों में अपने प्लांट बेस्ड मीट प्रोडट्क्स की सर्विस के लिए स्टारबक्स के साथ साझेदारी की थी.
प्रोडक्शन के क्षेत्र में यहां के स्थानीय लोग भी पीछे नहीं हैं. झेनमीट (Zhenmeat) बीजिंग की प्लांट-बेस्ड प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी, मीटबॉल, स्टेक, पोर्क, बीफ पैटी, पोर्न लॉयन, Dumplings (मोमोस) और क्रेफिश का उत्पादन करती है. जानकारी के लिए बता दें कि झेनमीट (Zhenmeat) कई चीनी कंपनियों में से एक है जो एक ऐसे देश में प्लांट बेस्ड फूड बनाने की शुरुआत कर रही है जो सभी प्रकार के मांस को कंज्यूम करती है.
जेनवेट के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विंस लू (Vince Lu) ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘कोविड -19 महामारी के बाद लोग अपने स्वास्थ्य और रेस्तरां ब्रांडों को लेकर काफी सजग रहते हैं.’ लू ने कहा कि जून के बाद से बिक्री “काफी बढ़ गई थी”, यह सुझाव देते हुए कि लोग कोरोनो वायरस संकट का जवाब दे रहे हैं.
होप ट्री रेस्तरां (Tree restaurant), जहां पर मीटबॉल लोगों को परोसा जा रहा है वहां पर आए एक ग्राहक ने कहा, प्लांट-आधारित मीटबॉल का टेस्ट टोफू यानी सोयाबीन के पनीर की तरह है.