obesity and hip bone fracture: Hip Fracture: आमतौर पर सिर्फ मोटे लोगों को झेलना पड़ता है इस तरह का फ्रैक्चर – obesity became a main reason for hip bone fracture

आमतौर पर लोग उन बीमारियों के बारे में तो बात करते हैं, जो इंसानों को मोटापे के कारण घेर रही हैं। लेकिन इस तरफ शायद ही किसी का ध्यान ज्यादा है कि मोटे लोगों में एक खास तरह के फ्रैक्चर यानी हड्डी के टूटने की समस्या अधिक होती है। आज यहां इसी बारे में जानेंगे…

हम सभी के लिए मोटापा एक मुसीबत बनता जा रहा है। यह स्थिति पिछले करीब एक दशक में अधिक बढ़ी है क्योंकि इस बीच हमारी जीवन में तकनीकी सुविधाओं का बहुत तेजी से विकास हुआ है। कारण चाहे जो भी हो लेकिन परिणाम यही है कि पूरी दुनिया के साथ ही हमारे देश में भी मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है।

25 साल तक चला शोध
-करीब 25 साल चली एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि सामान्य वजन के लोगों की तुलना में उन लोगों में कमर के निचले हिस्से की हड्डी में दिक्कत होने की समस्या अधिक होती है, जिनके शरीर पर आवश्यकता से कहीं अधिक फैट जमा होता है। Dietary Fiber: तवा रोटी में होते हैं इतने सारे पोषक तत्व, कम ही लोग जानते हैं ये फायदे

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बोन मिनरल डिफिशिऐंसी के कारण बढ़ते हैं हिप फ्रैक्चर के केस

-पिछले 10 साल में इस तरह की समस्या के केस और अधिक संख्या में सामने आए हैं क्योंकि इस एक दशक में मोटापे की समस्या कहीं अधिक दर से बढ़ी है। शोध से जुड़े लोगों का कहना है कि मोटापा एक महामारी का रूप लेता जा रहा है। इस स्थिति पर नियंत्रण बहुत जरूरी है।

हिप फ्रैक्चर की समस्या
-हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार यह एक तरह का विवादित सच है कि मोटापे के कारण हिप फ्रैक्चर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आमतौर पर सामान्य वजन की महिलाओं में इस तरह की समस्या बुढ़ापे में देखने को मिलती है। दोपहर में इंजॉय करें सलाद पत्ता से बने स्नैक्स, यहां जानें बनाने का आसान तरीका

-लेकिन जिन महिलाओं का वजन सामान्य से बहुत अधिक होता है, उनमें यह समस्या जीवन के शुरुआती स्तर पर ही देखने को मिल रही है। मोटापे के कारण हिप बोन फ्रैक्चर के केस बहुत तेजी के साथ बढ़ रहे हैं।

महिलाओं में अधिक है यह खतरा
-आप जानते हैं कि महिलाओं के शरीर में 30 साल की उम्र के बाद प्राकृतिक कैल्शियम की कमी होने लगती है। यदि भोजन और सप्लिमेंट्स के जरिए इस कमी को पूरा ना किया जाए तो उनकी हड्डियां कमजोर होकर खोखली होने लगती हैं।

-इसके साथ ही यह बात भी साफ है कि भारतीय महिलाओं की शारीरिक बनावट इस तरह की होती है कि उनके शरीर के निचले हिस्से पर वसा अधिक और बहुत जल्दी जमा होती है। इस कारण उनके शरीर का निचला हिस्सा अपेक्षाकृत भारी हो जाता है। जिसका हिप बोन्स पर सीधा असर पड़ता है। किडनी बीन्स खाइए, ना मोटापा बढ़ेगा ना ब्लड शुगर

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सामान्य वजन की महिलाओं में इस उम्र में होता है बोन फ्रैक्चर

-इन सभी कारणों के चलते महिलाओं में हिप फ्रैक्चर के केस बढ़ जाते हैं। खासतौर पर उन महिलाओं में जिनके शरीर पर सामान्य से कहीं अधिक फैट जमा होता है। हिप फ्रैक्चर से जुड़े इस शोध में यह बात भी सामने आई है कि मोटापे से ग्रसित महिलाओं में हड्डियों का रिसाव काफी तेज गति से होता है।

-सामान्य महिलाओं की तुलना में मोटापे से ग्रसित महिलाओं में हिप फ्रैक्चर के बाद डेथ रिस्क भी कहीं अधिक होता है। क्योंकि बोन लॉस की तेज प्रक्रिया के चलते उनकी हड्डी को जोड़ पाना कहीं अधिकि चुनौतिपूर्ण हो जाता है। साथ ही इस कारण उन्हें कई दूसरी सेहत संबंधी बीमारियां घेर लेती हैं। कोलेस्ट्रॉल को कम करने की दवाएं आपकी सेहत पर डालती हैं ऐसा असर

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कैल्शियम और विटमिन-डी हैं जरूरी

यह बात है एकदम साफ
-शोध से जुड़े हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बात एकदम साफ है कि मोटापे के कारण कम उम्र में हिप फ्रैक्चर के केस बढ़ रहे हैं। साथ ही मोटापे के कारण ही फ्रैक्चर के बाद होनेवाली मृत्युदर में भी बढ़ोतरी हो रही है।

-जिन महिलाओं की हड्डियों में बोन मिनरल डिफिशिऐंसी (BMD) की समस्या होती है। उनमें हिप फ्रैक्चर होने की आशंका कहीं अधिक होती है। अन्य किसी भी कारण से होनेवाले हिप फ्रैक्चर्स की तुलना में, इस कारण होनेवाले हिप फ्रैक्चर की संख्या कहीं अधिक होती है। हालांकि सामान्य वजन की महिलाओं में इस तरह के फ्रैक्चर की समस्या आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद होने की संभावना रहती है। इसलिए बढ़ते वजन को नियंत्रित करना जरूरी है। आपकी आंतें दो तरीके से सोखती हैं कैल्शियम, ऐसे समझें पूरी प्रक्रिया

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