Omicron XBB Variant के आतंक के बीच बढ़ रहा Dengue का कहर, दोनों के ये 4 लक्षण हैं एक से जानें कैसे करें फर्क – dengue and omicron xbb variant sharing these 4 symptoms know how to differentiate

पिछले दो सालों से कोविड-19 कई तरह वेरियंट के रूप में अपना आतंक पूरी दुनिया में दिखा चुका है। अब भारत में ओमिक्रॉन के नए XBB Variant के मामले मिलने लगे हैं। Omicron XBB एक हाइब्रिड वैरिएंट है, जो ओमिक्रॉन बीए.2.75 (Omicron BA.2.75) और ओमिक्रॉन बीए.2.10.1 सब वैरिएंट (Omicron BA.2.10.1) के कॉम्बिनेशन से बना है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो देश के करीब 9 राज्यों में ओमिक्रॉन का नया वेरियंट पहुंच चुका है।

दिल्ली, यूपी, केरल समेत कई राज्यों में डेंगू (Dengue) के मामले भी बढ़ रहें हैं। इसमें प्लेटलेट्स कम होने की वजह से मरीज की जान जाने का खतरा होता है। ऐसे में इसका सही समय पर उपचार शुरू करना जरूरी रहता है। लेकिन डेंगू और ओमीक्रोन के नए वेरियंट के लक्षणों में समानता होने के कारण इसके निदान मुश्किल आ रही है। ऐसे में हम आपको बता रहें हैं डेंगू और ओमीक्रोन के लक्षणों कैसे अतंर करें।

​डेंगू के वार्निग साइन

CDC के अनुसार, डेंगू का इंफेक्शन होने पर मरीज में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • पेट दर्द
  • उल्टी
  • नाक या मसूड़े से खून आना
  • उल्टी या मल में खून आना
  • थकान
  • चकते
  • आखों, जोड़ों, हड्डियों में दर्द
  • बुखार

​कोविड-19 के संकेत

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सांस लेने में दिक्क्त, सीने में लगातार दर्द या दबाव, उलझन, थकान, होंठ या चेहरे के रंग में बदलाव कोविड-19 के गंभीर संकेत हैं। ध्यान दें कि COVID-19 कई अन्य लक्षण भी पैदा कर सकता है, जो हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है।

​डेंगू और कोविड में है ये समानता

​डेंगू-कोविड इंफेक्शन के इतने दिन बाद दिखते हैं लक्षण

डेंगू का इंफेक्शन होने के 3-10 दिनों के बीच आमतौर लक्षण दिखाने देने लगते हैं जो सही उपचार मिलने पर 5-7 दिन में ठीक हो जाते हैं। वहीं, दूसरी ओर COVID का इंफेक्शन होने पर 4-5 दिन में लक्षण नजर आते हैं जिन्हें ठीक होने में कम से कम 14 दिन लगता है।

​डेंगू है या कोविड कैसे करें पहचान

कई समानता वाले लक्षणों के होने के कारण इसका निदान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में बेहतर है कि किसी भी तरह का लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। डॉक्टर डेंगू और कोविड दोनो का टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। कुछ मामलों में, मलेरिया और टाइफाइड परीक्षण भी निर्धारित किए जाते हैं, ताकि संक्रमण का कारण निश्चित रूप से पता चल सके।

इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।


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