रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) बाघों (Tiger) के लिए सबसे अनुकूल जगह माना जाता है. लेकिन 914.017 वर्ग किलोमीटर में फैले इस रिजर्व में अब बाघों समेत अन्य संरक्षित वन्य प्राणियों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है. यहां के बाघों व अन्य वन्य जीव शिकारियों और वन्य जीवों की तस्करी करने वालों के निशाने पर हैं. यहां वन्यजीवों पर खतरा इसलिए और बढ़ गया है कि क्योंकि यहां कार्यरत वन विभाग के कर्मचारी जंगलों में ड्यूटी करने से इनकार कर दिए हैं. कर्मचारी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं और बगैर सुरक्षा जंगलों में नहीं जाने का ऐलान कर दिए हैं.
छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ, जिला मुंगेली शाखा ने कलेक्टर को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में कर्मचारी संघ ने भारत सरकार की अधिसूचना अनुसार वन विभाग को अति आवश्यक सेवा में शामिल करने की मांग की है. संघ के जिला अध्यक्ष दिलीप द्विवेदी न्यूज 18 से बातचीत में कहते हैं- वन विभाग की टीम पर संदिग्ध शिकारी जानलेवा हमला कर रहे हैं. उनके साथ लूटपाट भी जा रही है. ऐसे में बगैर सुरक्षा मुहैय्या हुए वहां काम कर्मचारियों की जान को खतरे में डाल सकता है. दिलीप बताते हैं कि करीब 500 लोग अचानकमार टाइगर रिजर्व में सेवाएं दे रहे हैं. अगर सुरक्षा नहीं मिली तो सब जंगलों में काम बंद कर देंगे.
शिकारियों को पकड़ने गई टीम पर हमला
टाइगर रिजर्व के जंगलों में बाघों की गिनती के लिए ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं. इन्हीं कैमरों में रात के समय धनुष बाण और हथियार लिए कुछ शिकारी दिखे. इन संदिग्ध शिकारियों को पकड़ने के लिए 2 मई को सुरही वन परिक्षेत्र के रेंजर संदीप सिंह वन विभाग के 21 अन्य लोगों के साथ निवासखार गांव गए. रेंजर संदीप सिंह ने बताया कि वहां सदिग्धों की पहचान की गई और उनके घरों की तलाशी ली गई. इसी दौरान ग्रामीण आक्रोशित हो गए और वन विभाग की टीम को बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट की गई. उनके मोबाइलफोन तोड़ दिए गए. घरों से बरामद किए गए संदिग्ध वस्तुओं को छिन लिया गया. उनकी टीम पर जानलेवा हमला किया गया. ये सब राजनीतिक संरक्षण में किया जा रहा है...तो पुलिस टीम पर भी हमला
वन विभाग की टीम पर हमले की 17 लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत मुंगेली जिले के लोरमी पुलिस थाने में दर्ज कराई गई. इसके बाद 4 मई को पुलिस की टीम आरोपियों को पकड़ने के लिए निवासखार गांव गई, वहां 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया तो पुलिस टीम पर भी ग्रामीणों ने हमला कर दिया. 8 अन्य आरोपी फरार थे. फिर भी पुलिस गिरफ्तार आरोपियों को लेकर किसी तरह थाने पहुंची. पुलिस पर हमले के मामले में 150 ग्रामीणों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया गया है. वन टीम पर हमले के मामले 8 फरार आरोपियों ने 5 मई को पुलिस थाने में समर्पण कर दिया.
संरक्षित वन्यजीवों की तस्करी
हमले में गंभीर रूप से घायल वन रेंजर सन्दीप सिंह न्यूज 18 से बातचीत में कहते हैं- अचानकमार टाइगर रिजर्व में 7 बाघ हैं, जो कान्हा किशली और अमरकंटक तक विचरण करते हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या में तेंदुआ, पाइथन, सांभर, पैंगुलीन, हिरण व अन्य संरक्षित वन्य जीव हैं. बीते 12 अप्रैल को एक तेंदुए को घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था. उसके शरीर में तार फंसे थे. इलाज के दौरान 29 अप्रैल की उसकी मौत हो गई. तेंदुए के शरीर में जो तार फंसे मिले, वैसे ही तार ग्रामीणों के घर से बरामद किए गए थे. संदीप कहते हैं कि वन्य जीवों की तस्करी से जुड़े लोग इस इलाके में सक्रिय हैं. इनपर सख्ती की वजह से ही वन विभाग की टीम पर हमला किया गया है. यहां के वन्यजीवों को तस्करों से खतरा है.
कार्रवाई पर सवाल
लोरमी विधायक धर्मजीत सिंह ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वनविभाग ने कभी भी जंगलों में रहने वाले बैगा आदिवासियों के सुख दुख की चिंता नहीं की. साथ ही कभी इनका विश्वास भी नही जीता. ये बैगा धनुष बाण रखे कैमरे में दिखे होंगे, लेकिन शिकार के लिए नही रखते. 7 किलोमीटर दूर पुलिस चौकी में भी कार्रवाई से पहले वन अधिकारियों ने इसकी सूचना नही दी जो गलत है. पहली बार ऐसी घटना देखने को मिली कि ग्रामीण औऱ वनविभाग की टीम में मारपीट हुई, जो लगता है कि किसी गलतफहमी के चलते हुई होगी.
मंथन चल रहा है
छत्तीसगढ़ वन विभाग के सीसीएफ राकेश चतुर्वेदी ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि वन विभाग की टीम पर हमला चिंताजनक है. इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी पुलिस ने कर ली है. कर्मचारियों के पत्र की जानकारी भी मिली है. आला अधिकारियों से इसको लेकर मंथन चल रहा है. राज्य में पहली बार वन विभाग की टीम पर इस तरह का हमला ग्रामीणों ने किया है. इसके पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है.
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