सरकार ने दी है ग्रामीण इलाकों में दुकान खोलने की मंजूरी
सरकार और ठेकेदारों की वार्ता में नहीं बनी शर्तों पर सहमति
कोरोना वायरस की महामारी के कारण देश में लागू लॉकडाउन की वजह से आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर अन्य सभी दुकानें बंद थीं. शराब की दुकानें भी बंद रहीं. अब, केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन में अनुमति मिलने पर देश के अलग-अलग राज्यों में 4 मई से ही शराब की दुकानें खुल गई हैं. लेकिन, मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में शराब के ठेके अभी भी बंद ही रहे.
दरअसल, प्रदेश सरकार ने रेड जोन के शहरी क्षेत्र को छोड़कर ग्रामीण इलाकों में शराब की दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है, लेकिन शराब के ठेकेदारों के साथ बातचीत में शर्तों को लेकर सहमति नहीं बन पाई. इसी कारण कई स्थानों पर शराब की दुकानें बंद ही रहीं. इससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है.
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आजतक से बात करते हुए प्रदेश के आबकारी आयुक्त राजेश बहुगुणा ने बताया कि मार्च और अप्रैल में राजस्व का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग ने मार्च 2020 में 1995 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा था, लेकिन इस दौरान 1342 करोड़ रुपये का राजस्व ही प्राप्त हुआ. यानी 653 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति विभाग को हुई.
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आबकारी आयुक्त ने कहा कि इसी तरह अप्रैल 2020 के 1150 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन पूरा अप्रैल लॉकडाउन में ही गुजर गया. इस दौरान महज 121 करोड़ रुपये का राजस्व ही प्राप्त हो सका. अप्रैल महीने में आबकारी विभाग को 1029 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ.
नहीं मिले वैट के 118 करोड़ रुपये
आबकारी आयुक्त ने कहा कि शराब की बिक्री नहीं होने से इस पर लगने वाले वैट की धनराशि भी विभाग को नहीं मिल पाई. उन्होंने बताया कि मार्च और अप्रैल में, कुल मिलाकर 118.69 करोड़ रुपये का राजस्व वैट के जरिए प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. इसका भी नुकसान उठाना पड़ा. आबकारी आयुक्त ने कहा कि लॉकडाउन के कारण केवल शराब नहीं बिकने से ही प्रदेश को लगभग 1800 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है.
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खाड़ी देशों में दस हजार से अधिक भारतीयों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता चला है
नई दिल्ली:
खाड़ी देशों और दुनिया के अनेक हिस्सों में फंसे हुए हजारों भारतीयों को घर लाने के लिए भारत कई दशकों में सबसे बड़ा देश वापसी अभियान शुरू करने जा रहा है, जिसमें असैन्य विमानों और नौसैनिक पोतों के बेड़े को लगाया जा रहा है. सरकार के सूत्रों ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में तीन लाख से अधिक लोगों ने वहां से निकलने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन सरकार केवल उन्हें पहले वापस लाएगी जिनके सामने घर वापसी के लिए चिकित्सा संबंधी आपात स्थिति, वीजा अवधि समाप्त होने या निर्वासन की संभावना जैसे अत्यावश्यक कारण हैं. अधिकारियों के अनुसार, खाड़ी देशों में दस हजार से अधिक भारतीयों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता चला है जिनमें से 84 की मौत हो चुकी है.
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सूत्रों ने बताया कि कई एजेंसियों के सहयोग से चलाये जाने वाले ‘वंदे भारत मिशन’ नाम के इस अभियान में सबसे प्रमुख ध्यान खाड़ी क्षेत्र, पड़ोसी देशों के साथ ही अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर से भारतीयों को वापस लाने पर केंद्रित किया जाएगा. हजारों भारतीय जहां विदेशों में नौकरी जाने के बाद अपने देश लौट रहे हैं, ऐसे में विदेश मंत्रालय राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ कुशल कामगारों के लिए संभावित रोजगार के अवसरों के बारे में विस्तृत डेटाबेस साझा करेगा. सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्रालय इस व्यापक अभियान को सुगमता से संचालित करने के लिए राज्यों तथा विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ समन्वय से काम कर रहा है। इसे कई दशकों में अब तक का सबसे बड़ा देश वापसी अभियान बताया जा रहा है.
सूत्रों ने बताया कि इसमें राज्यों के साथ तालमेल के लिए बड़ी संख्या में अतिरिक्त सचिवों और संयुक्त सचिवों को तैनात किया गया है. भारतीय नौसेना पहले ही दूसरे देशों से भारतीयों को वापस लाने के प्रयासों के तहत ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु’ शुरू कर चुकी है. भारतीय नौसेना के पोत ‘जलाश्व’ और ‘मगर’ इस समय मालदीव से भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए माले बंदरगाह के रास्ते पर हैं. एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में करीब 1.4 करोड़ भारतीय रहते हैं और इनमें से बड़ी संख्या में लोग अपने वतन लौटना चाहते हैं.
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बच्चों की मृत्यु पर दुख जाहिर किया
भोपाल : मंगलवार, मई 5, 2020, 18:37 IST
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन जिले में नर्मदा नदी के सोकलपुर घाट के पास 3 बच्चों की आज हुई असामयिक मृत्यु पर दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कलेक्टर रायसेन को प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं।
रूस ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन (Kim Jong Un) को द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक पदक से सम्मानित किया है. यह सम्मान उन्हें उत्तर कोरिया में मारे गए सोवियत सैनिकों की स्मृति को संरक्षित रखने के लिए दिया गया है.
भारत में मंगलवार की सुबह कोरोना वायरस के मामलों में एक दिन का सबसे बड़ा उछाल दर्ज किया गया. एक ही दिन में कोरोना संक्रमण के 3,900 मामले सामने आए जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. इसके ठीक एक दिन पहले स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया था कि Covid-19 का ग्राफ नीचे आ रहा है. 5 मई की दोपहर तक, भारत में 46,711 मामले दर्ज हुए हैं और अब तक 1,583 मौतें हो चुकी हैं.
भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसने अब बहस छेड़ दी है कि 40-दिवसीय लॉकडाउन की प्रासंगिकता क्या रही? इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने पाया कि 25 मार्च को जिस दिन लॉकडाउन लागू किया गया था, उस दिन से लेकर 5 मई तक भारत में हर दिन कोरोना वायरस के औसतन 1,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं.
अगर लॉकडाउन के पहले और दूसरे चरण की तुलना करें तो दूसरे चरण में कोरोना वायरस के औसतन तीन गुना ज्यादा नये मामले दर्ज किए गए हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने सोमवार को कहा, “लॉकडाउन और दूसरे प्रतिबंधों के दौरान, हम कोरोना मामलों को अपेक्षाकृत नियंत्रित करने में सक्षम रहे हैं. कोरोना का ग्राफ अब नीचे आ रहा है.”
इसके उलट, डीआईयू ने पाया कि कोविड-19 का ग्राफ नीचे आना तो दूर, रोजाना नये मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. 25 मार्च को 606 मामले सामने आए थे. इसी दिन लॉकडाउन प्रभाव में आया. 3 मई को जिस दिन लॉकडाउन का दूसरा चरण समाप्त हुआ, उस दिन कोरोना मामलों की संख्या 39,980 तक पहुंच गई. अगले दो दिनों में इसमें 6,700 से अधिक मामले जुड़ गए.
इसका मतलब है कि भारत में लॉकडाउन के दौरान हर दिन औसतन 1,099 नए कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं. नए मामलों में औसत वृद्धि 11.3 प्रतिशत रही. 1 मई से भारत में हर दिन 2,000 से अधिक नये मामले सामने आए हैं. 19 से 30 अप्रैल के बीच हर दिन नये मामलों की संख्या लगातार 1,000 से 2,000 के बीच रही.
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि लॉकडाउन के दूसरे चरण (15 अप्रैल-3 मई) में हर दिन औसतन 1,574 नए मामले सामने आए, जबकि लॉकडाउन के पहले चरण (25 मार्च-14 अप्रैल) के यह संख्या 469 थी. भारत में कोरोना वायरस का पहला केस 30 जनवरी को सामने आया था. तब से लेकर 24 मार्च तक नये मामलों की संख्या प्रतिदिन औसतन 9.4 रही.
इस दौरान कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की गति भी बढ़ रही है. 14 अप्रैल को भारत में संक्रमण के 10,000 केस हुए थे. इसके बाद 20,000 होने में मात्र नौ दिन लगे, अगले छह दिन में यह आंकड़ा 30,000 के पार चला गया और अगले पांच दिनों में ही यह 40,000 को पार कर गया. यह तब है जब भारत 40 दिनों के संपूर्ण लॉकडाउन में था.
4 मई को भारत ने घातक कोरोना वायरस के मामलों में उछाल के बीच लॉकडाउन के तीसरे चरण में प्रवेश किया. इस चरण में प्रतिबंधों पर काफी छूट भी दे दी गई है. कोरोना वायरस के मामलों की संख्या में उछाल, रिकवरी से काफी आगे निकल गया है और इसकी वजह से भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था और दबाव में आ गई है, जो पहले से ही काफी दबाव झेल रही थी.
स्वास्थ्य मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि कोरोना वायरस का रिकवरी रेट 27.5 प्रतिशत है. 5 मई की दोपहर तक भारत में कुल 13,161 रिकवरी हुई है यानी इतने लोग स्वस्थ्य हो चुके हैं. 25 मार्च को यह संख्या 43 थी. इसका मतलब है कि लॉकडाउन के दौरान प्रतिदिन औसतन 312 लोग संक्रमण से मुक्त हुए. हालांकि, रोज सामने आ रहे नये मामलों और रोज ठीक होने वालों की संख्या के बीच काफी चौड़ी खाई है जो कि चिंता का विषय है.
संक्रमित लोगों के ठीक होने के सबसे ज्यादा मामले (1,074) 4 मई, सोमवार को दर्ज हुए. संयोग से भारत में एक हजार से अधिक लोगों के ठीक होने की सूचना सिर्फ तीन दिन दर्ज की गई. ये सभी तारीखें मई की हैं. जबकि 19 अप्रैल के बाद से हर दिन 1,000 से अधिक नये मामलों की पुष्टि हो रही है और यह संख्या बढ़ रही है. लॉकडाउन के दौरान रिकवरी की औसत दर 15.3 प्रतिशत रही.
यह भी गौरतलब है कि भारत में लगभग 60 फीसदी कोरोना वायरस के मामले केवल 12 शहरों से सामने आए हैं. मुंबई में 5 मई की सुबह तक 9,123 मामले दर्ज हो चुके हैं. यह भारत में कुल कोरोना वायरस केसों की संख्या का 19.6 फीसदी है. मुंबई के बाद सबसे ज्यादा केस दिल्ली (4,898), अहमदाबाद (3,293), चेन्नई (1,729) और इंदौर (1,611) में सामने आए हैं. इन पांचों शहरों में कोरोना मामलों की संख्या, भारत में कुल मामलों की संख्या का लगभग आधा (45 फीसदी) है.
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ICJ के फैसले को लागू करने के लिए भारत राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान के संपर्क में हैं.
नई दिल्ली:
कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने को लेकर भारत पाकिस्तान के संपर्क में है. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव को अप्रैल 2017 में एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी. बाद में भारत जाधव तक राजनयिक पहुंच प्रदान करने से इनकार करने और मौत की सजा को चुनौती देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ आईसीजे पहुंचा.
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पिछले साल 17 जुलाई को इस मामले में अपने फैसले में आईसीजे ने पाकिस्तान को जाधव की सजा की प्रभावी समीक्षा करने का आदेश दिया और बिना किसी देरी के उन्हें राजनयिक पहुंच प्रदान करने को कहा. सूत्रों के अनुसार आईसीजे के फैसले को लागू करने के लिए भारत राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान के संपर्क में हैं.
लॉकडाउन के चलते सामान्य लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं लेने में कई दिक्कतों का सामना करना पड रहा है। कोरोना संक्रमण के चलते लोगों में अस्पताल जाने में एक झिझक भी है, व्यवाहारिक रूप से अभी अस्पतालों में भीड लगाना उचित भी नहीं है। पूर्व में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मध्यप्रदेश द्वारा टेलीमेडिसिन के माध्यम से होम क्वेरेण्टाईन लोगों को चिकित्सीय सलाह एवं परामर्श हेतु 51 जिलों में टेलीमेडिसिन सुविधाएं प्रारंभ की थी। इसी क्रम में अन्य बिमारियों के लिये प्रदेश के जिला चिकित्सालय में विश फाउण्डेशन के तकनीकी सहयोग से ई संजीवनी ओपीडी प्रारंभ की जा रही है। लोगों को घर बैठे स्वास्थ्य सेवाएं चिकित्सीय परामर्श एवं उपचार ई-संजीवनी मे माध्यम से उपलब्ध होंगी।
जैसा कि ई-संजीवनी नाम से स्पष्ट है, यह स्वास्थ्य सेवाएं ऑनलाईन सेवाएं होंगी और इसके लिये मरीज को टेबलेट, लेपटॉप या डेस्कटॉप जिसमें वेब केमरा, स्पीकर, माईक एवं इंटरनेट हो, की आवश्यकता होगी, ताकि वह चिकित्सक से सीधा ऑडियो-विजुअल संवाद स्थापित कर सके। ई-संजीवनी का ओपीडी समय प्रात- 9 बजे से दोपहर एक बजे तक रहेगा।
उक्त उपकरणों की सहायता से मरीज को सर्वप्रथम www.esanjeevaniopd.in पर ‘पेशेंट रजिस्टर’ पर अपने मोबाईल नंबर की सहायता से पंजीकृत कर ओटीपी प्राप्त करना होगा। ओटीपी इण्टर करने के पश्चात ‘पेशेंट रजिस्टेशन एवं टोकन जनरेशन’ में नाम, पता, आयु संबंधी जानकारी दर्ज करना होगी। यदि कोई रिपोर्ट/एक्स-रे आदि डाक्टर को बताना चाहते हैं तो उसे भी अपलोड करना होगा। यहॉ ‘ओके’ करने के बाद आपको पंजीकृत मोबाईल नंबर पर टोकन प्राप्त होगा, जो कि मरीज की वेटिंग लिस्ट को दर्शाता है।
एस एम एस के आधार पर प्राप्त टोकन नंबर के माध्यम से ‘लाग-इन’ कर कतार में अपनी बारी का इंतजार करें, अपनी बारी आने पर ‘कॉल नाउ’ विकल्प को चुने एवं चिकित्सक से संवाद प्रारंभ करें। संवाद पूर्ण होने के पश्चात आपको आवश्यकतानुसार दवा की पर्ची का ई-प्रिस्क्रिप्शन प्राप्त होगा, जिसके आधार पर आप दवाई खरीद सकते हैं।
आवश्यकता के आधार पर डॉक्टर मरीजों को अस्पताल हेतु रेफर करने की सलाह भी दे सकते हैं। इस प्रकार यह ई-संजीवनी ओपीडी की प्रक्रिया पूर्ण होगी, और लोग घरों से ही स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे।
वाशिंगटन: खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए अच्छी खबर है. उन्हें 5 मई से 6 मई के बीच एटा एक्वेरिड उल्कापात (Eta Aquariid meteor shower) देखने का मौका मिलेगा. एटा एक्वारिड उल्काएं हैली धूमकेतु (Halley’s Comet) का मलबा हैं, जो हर 76 साल में पृथ्वी के पास से गुजरता है. उल्काएं हर साल मई की शुरुआत में चरम पर होती हैं और अपनी गति के लिए जानी जाती हैं. NASA ने इस बारे में अपने मीडियाकास्ट पेज पर जानकारी दी है. उसने बताया है कि उल्कापात का कोई शार्प पीक नहीं है, यह हर रात, मुख्यतः 6 मई को अच्छी दर से होगा. साथ ही यह भी बताया गया है कि उल्कापात देखने के लिए क्या किया जाना चाहिए.
NASA के अनुसार, उल्काओं को देखने के लिए कम से कम एक घंटे का समय निकालना चाहिए, क्योंकि यह लगातार न होकर अचानक बीच-बीच में दिखाई देते हैं. ऊपर से आपकी आंखों को अंधेरे में ढलने में लगभग 20 मिनट लगते हैं. आपको सीधे चमकती रोशनी की ओर देखने की जरूरत नहीं है. इसके बजाय कहीं और देखें या सीधे ऊपर की ओर देखते हुए जमीन पर लेट जाएं. इससे आपको आराम से देखने के लिए पूरा आसमान मिल जाता है. गौरतलब है कि हैली धूमकेतु आखिरी बार 1986 में दिखा था और अब यह 2061 में दिखेगा. हालांकि, यह धूमकेतु एक अवधि पर ही वापस आता है, लेकिन पृथ्वी हर साल एटा एक्वारिड बनाने के लिए इसके मार्ग से गुजरती है.
क्या होती हैं उल्काएं? उल्काएं या मेटिअरॉइट जिसे सामान्य भाषा में टूटते तारे भी कहते हैं, असल में धूमकेतु के पीछे चलते धूल के कण और पत्थर आदि होते हैं. ये पृथ्वी के वातावरण में बेहद तेज गति से प्रवेश करते हैं, जिसके चलते हमें आसमान में आतिशबाजी जैसा नजारा देखने को मिलता है.
कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की तादाद 15000 के पार पहुंच चुकी है. अकेले राजधानी मुंबई में ही कोरोना के लगभग 10000 मामलों की पुष्टि हो चुकी है. लगातार बढ़ती मरीजों की तादाद के बीच राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुरूप प्रदेश में शराब की दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है.
शराब की दुकानें खुलीं, तो एक दिन में ही 11 करोड़ की शराब बिकी. अब होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया ने भी शराब और बीयर की बोतलों की एक्सपायरी डेट करीब होने का हवाला देते हुए इसे बेचने की अनुमति देने की मांग की है. एसोसिएशन ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाते हुए कहा है कि हम रेस्टोरेंट्स नहीं खोलेंगे, लेकिन हमें अनसोल्ड स्टॉक खत्म करने की अनुमति दी जाए.
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एसोसिएशन के अनुसार पूरे प्रदेश में लाइसेंसधारकों के पास लगभग 10 करोड़ रुपये मूल्य के शराब और बीयर का स्टॉक है, जिसकी एक्सपायरी डेट करीब है. इस संबंध में एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरबख्शीष सिंह कोहली ने कहा अब तक नहीं बिक सके इस स्टॉक को खत्म करने की अनुमति मिलती है तो नुकसान कम होगा और पूंजी भी कार्यशील होगी. उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के कारण होटल और रेस्टोरेंट्स काफी प्रभावित हुए हैं. इस अवधि के दौरा शराब की बिक्री पर भी प्रतिबंध था.
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सिंह ने कहा कि एक्साइज डिपार्टमेंट ने परमिट रूम लाइसेंस निलंबित कर दिए थे. बगैर बिके रह गए स्टॉक को खत्म करने की अनुमति मिलने की उम्मीद व्यक्त करते हुए सिंह ने कहा कि अब सरकार ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध में सरकार ने ढील दे दी है. उन्होंने कहा कि इससे हमारे व्यवसाय में भी पूंजी कार्यशील हो सकेगी. उन्होंने बताया कि प्रदेश के 5000 रेस्टोरेंट्स एसोसिशन से जुड़े हैं. एसोसिएशन ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, दमन दीव और सिलवासा के प्रशासन से भी अनसोल्ड स्टॉक खत्म करने के लिए अनुमति देने की मांग की है.
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शराब की दुकानों पर लोगों के बीच दूरी रखने के नियम को तोड़ा जा रहा है
नई दिल्ली:
भारतीय एल्कोहल इंडस्ट्री के एक टॉप ग्रुप ने मंगलवार को दिल्ली सरकार से मांग की है कि उसे राष्ट्रीय राजधानी में शराब की सीधे घर पर डिलीवरी करने की अनुमति दी जाए. उद्योग ने कहा है कि शराब की दुकानों पर लोगों के बीच दूरी रखने के नियम को तोड़ा जा रहा है ऐसे में उसे सीधे घर पर शराब की डिलीवरी करने की अनुमति दी जानी चाहिए.
कन्फेडरेशन आफ इंडियन एल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज (CIABC) ने कहा कि सरकार शराब बेचने के लिये टोकन प्रणाली की भी अनुमति दे सकती है. इससे भीड़ का बेहतर ढंग से प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है.
दिल्ली में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन शराब की दुकानों पर लंबी लाइनें देखी गई। भीड़ इस कदम उमड़ पड़ती है कि दुकानों पर लोगों के बीच शारीरिक दूरी का नियम समाप्त हो जाता है. यहां तक कि शराब पर उसके अधिकतम खुदरा मूलय के ऊपर 70 प्रतिशत की दर से विशेष कोरोना शुल्क लगा दिये जाने का भी खरीदारों पर कोई असर नहीं दिखाई दिया. सीआईएबीसी के महानिदेशक विनोद गिरी ने कहा कि शराब की आनलाइन बुकिंग शुरू किये जाने से शराब की दुकानों के बाहर भीड़ को कम किया जा सकता है. गिरी ने कहा, ‘‘हम दिल्ली सरकार के पास जायेंगे और उससे शराब की घर पर डिलीवरी के विकल्प पर विचार करने का आग्रह करेंगे. शराब की घर पर डिलीवरी सुरक्षित तरीका है और इसमें कोई खतरा नहीं है.”
गिरी ने दूसरे तरीके का सुझाव देते हुये कहा कि सरकार टोकन प्रणाली भी शुरू कर सकती है. कोई भी व्यक्ति आनलाइन शराब की बुकिंग कर टोकन निकाल सकता है और बाद में वह बताये गये समय पर दुकान से अपनी मनपसंद शराब ले सकता है. दिल्ली में शराब पर 70 प्रतिशत की दर से ‘‘विशेष कोरोना शुल्क” लगाये जाने के मुद्दे पर गिरी ने कहा कि शराब के दाम को अलग रखकर नहीं देखा जा सकता है. इन्हें पड़ोसी शहरों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
सूत्रों ने बताया कि सरकार ने कहा है कि पड़ोसी राज्यों से राजधानी में शराब की तस्करी को रोकना बड़ी चुनौती है. ‘‘हमें इस पर कड़ी नजर रखनी होगी क्योंकि इससे सरकार के राजस्व पर असर पड़ता है.” गृह मंत्रालय द्वारा लॉकडाउन में कुछ राहत दिये जाने के बाद सोमवार से दिल्ली में 190 शराब की दुकानें खुल गईं। मंगलवार को इनमें से करीब 150 दुकानें खुलीं. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को कहा कि जिन इलाकों में लोग सामाजिक स्तर पर दूरी रखने के नियम का पालन नहीं करेंगे उन इलाकों से राहत को वापस ले लिया जाएगा.
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