लॉकडाउन 3.0 शुरू होने के बाद दिल्ली सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम में बड़ी बढ़ोतरी की है. लॉकडाउन के चलते रेवेन्यू कम रहा, जिसके चलते अब सरकार भरपाई करने में जुटी है. लेकिन दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के इस फैसले से भारतीय जनता पार्टी को निशाना साधने का मौका मिल गया. भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने ट्वीट कर लिखा कि ये आप का बेजोड़ अर्थशास्त्र है.
गौतम गंभीर ने मंगलवार को ट्वीट कर लिखा कि चुनाव से पहले ‘सबकुछ मुफ्त में देंगे, पैसे की कमी नहीं है…2 महीने बाद दोगुना टैक्स लेंगे, तन्ख्वाह के भी पैसे नहीं हैं. ये है आप का बेजोड़ अर्थशास्त्र’
चुनाव से पहले – “सब कुछ मुफ़्त में देंगे, पैसे की कमी नहीं है”
2 महीने बाद – “दोगुना टैक्स लेंगे, तनख़्वाह देने के भी पैसे नहीं है”
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल में वैट बढ़ाने का फैसला लिया, जिसके बाद पेट्रोल 1.67 रुपये और डीजल 7 रुपये महंगा हो गया. यानी कोरोना संकट के बीच जनता पर महंगाई की मार भी पड़ी है.
दिल्ली समेत पूरे देश में लॉकडाउन के कारण 40 दिनों से सबकुछ बंद पड़ा था. लॉकडाउन 3.0 की शुरुआत में कुछ रियायत दी गई, जिसमें जरूरत की दुकानों के अलावा इक्की-दुक्की दुकानों को खोलने दिया गया. इनमें शराब की दुकानें भी शामिल रहीं.
कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें…
लेकिन, सोमवार को जब शराब की दुकानों के बाहर भीड़ आई तो सरकार ने शाम को शराब के दामों में 70 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी. वहीं, मंगलवार को पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा दिया गया.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ओर से कई बार बयान दिया जा चुका है कि अप्रैल में सरकार के रेवेन्यू पर काफी असर पड़ा है. दिल्ली में जहां पिछले साल अप्रैल में 3000 करोड़ का रेवेन्यू आया था, वहीं इस बार सिर्फ 323 करोड़ रुपये ही आ पाए हैं.
दाम बढ़ने के बाद वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी कहा कि हर वक्त एक जैसा नहीं रहता, कई बार कड़े फैसले लेने पड़ते हैं.
आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
कोरोनावायरस लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) के बीच सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों और छात्रों के आवागमन को अनुमति दी है. राज्य सरकारों के अनुरोध पर विशेष श्रमिक ट्रेनें चलाई गई हैं. इन ट्रेनों में सफर के लिए मजदूरों से टिकट के पैसे लेने में मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं. इस बीच, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने दावा किया है कि मजदूरों का रेल किराया राज्य सरकारें भर रही है. उन्होंने कांग्रेस पर इस मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया है.
केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट में कहा, “मजदूरों से रेल किराये की सच्चाई- सभी राज्य सरकारें मजदूरों के रेल के किराये का पैसा भर रही हैं. केवल महाराष्ट्र, केरल और राजस्थान सरकारें नहीं दे रही. वह किराया मजदूरों से ले रही हैं.” उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा- “बाकी सरकारें स्वयं दे रही हैं. यह तीन राज्य की महाराष्ट्र, केरल और राजस्थान की सरकार मजदूरों से किराया ले रही हैं. इन राज्यों में सरकार शिवसेना गठबंधन, कम्युनिस्ट और कांग्रेस की है. यही चिल्ला रहे हैं. इसे कहते है ‘उल्टा चोर कोतवाल को डाटें’.”
मजदूरों से रेल किराये की सच्चाई – सभी राज्य सरकारे मजदूरों के रेल के किराये का पैसा भर रही है। केवल महाराष्ट्र , केरल और राजस्थान सरकारे नहीं दे रही। वह किराया मजदूरों से ले रही है। @BJP4India@BJP4Maharashtra@JPNadda@PiyushGoyal
— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) May 4, 2020
इससे पहले, सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ऐलान किया था कि देशभर में फंसे मजदूरों के घर वापस जाने के लिए रेलयात्रा का खर्च कांग्रेस पार्टी उठाएगी. कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए लिखा है, ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे जरूरी कदम उठाएगी.’
Truth behind railway controversy. State Governments are paying fare of migrants. Only Congress Govt in Rajasthan, communist in Kerala and Shiv Sena alliance in Maharashtra are not paying. This is Congress politics. Shame on such politics !@BJP4India@BJP4Maharashtra@JPNadda
— Prakash Javadekar (@PrakashJavdekar) May 4, 2020
देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) से पिछले 24 घंटों में अब तक सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं और सबसे ज्यादा नए मामले सामने आए हैं. देश में Covid-19 संक्रमित मरीजों का कुल आंकड़ा बढ़कर 46,000 के पार पर पहुंच गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोरोनावायरस से अब तक 1,568 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि संक्रमितों की संख्या 46,433 हो गई है.
वहीं, पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3900 नए मामले सामने आए हैं और 195 लोगों की मौत हुई है. 24 घन्टे में अब तक के सबसे ज्यादा नए मामले और मौत के आंकड़े भी सबसे ज्यादा है. थोड़ी राहत वाली बात यह है कि इस बीमारी से अब तक 12,727 मरीज ठीक को चुके हैं. मरीजों का रिकवरी रेट लगातार सुधरकर 27.40 प्रतिशत हो गया है.
वीडियो: कांग्रेस ने किया किराया देने का एलान, मगर ट्रेन तक पहुंचने की राह नहीं आसान
नई दिल्ली: मेक्सिको सिटी से हमारे संवाददाता सिद्धांत सिब्बल से बात करते हुए, मेक्सिको में भारत के राजदूत मनप्रीत वोहरा ने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच में हाल में हुई चर्चा पर बात की. उन्होंने बताया कि मिशन किस तरह से वहां फंसे हुए भारतीयों की मदद कर रहा है. उन्होंने बताया कि अभी तक वहां मौजूद भारतीय समुदाय के किसी भी व्यक्ति में COVID-19 के संक्रमण की शिकायत नहीं दर्ज की गई है. करीब 265 भारतीयों ने देश वापसी के लिए दूतावास में पंजीकरण कराया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने मैक्सिको के विदेश मंत्री से बात की, हम कोविड संकट के समय अपने देश तक कैसे पहुंच रहे हैं? क्या इस बाबत कोई सहयोग मिल रहा है?
मनप्रीत वोहरा: भारतीय विदेश मंत्रालय और मैक्सिको के विदेश सचिव मारसेलो ईब्रार्ड ने कोविड -19 की स्थिति और विभिन्न रणनीतियों का पालन करने को लेकर बातचीत की है. वे इस बात पर सहमत हुए कि भारत और मैक्सिको अपने बेहतर स्वास्थ्य अनुभवों को साझा करेंगे. उन्होंने कोविड के बाद आर्थिक सुधार पर भी बातचीत की.
क्या हमने उनके साथ कोरोना से निपटने के मॉडल के बारे में बात की है या उन्होंने हमारे मॉडल में कोई रुचि दिखाई?
मनप्रीत वोहरा: भारतीय विदेश मंत्रालय ने मैक्सिको के विदेश सचिव को बताया कि मेक्सिको के अनुरोध पर, भारत सरकार ने मैक्सिको को 2.50 MT हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वाइन एपीआई के कमर्शियल निर्यात को मंजूरी दी है.
मेक्सिको में कितने भारतीय फंसे हैं और हम उन तक कैसे पहुंच रहे हैं?
मनप्रीत वोहरा: मेक्सिको में फंसे करीब 265 भारतीय हमारे संपर्क में हैं, जो जल्द ही घर लौटना चाहते हैं. दूतावास उनके साथ नियमित रूप से जुड़ा हुआ है और उनके लिए 24×7 आपातकालीन संपर्क सेवा उपलब्ध है. उनकी वीजा एक्सटेंशन या रहने की व्यवस्था आदि जरूरतें पूरी की जा रही हैं. उनके हालचाल लेने के लिए मैंने खुद फेसबुक लाइव पर उनसे बात की है. वे सभी ठीक हैं. मेक्सिको में 6500 भारतीयों में से कोई भी अब तक संक्रमित नहीं हुआ है. मुझे उनपर गर्व है, मैं खुश हूं कि वे सभी सावधानी बरत रहे हैं, सोशल डिस्टेंसिंग और मैक्सिकन सरकार के दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं.
जमीनी हालात कैसे हैं और हमारे राजनयिक किस तरह से काम कर रहे हैं, क्या ये मुश्किल है? मनप्रीत वोहरा: मैक्सिको में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. पिछले कुछ दिनों में , मैक्सिकन सरकार ने अस्पताल की क्षमता और आपातकाल सुविधाएं बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत की है. दूतावास में मेरे सहयोगी और उनके परिवार सुरक्षित हैं. हम सभी लोग आवश्यक सावधानी बरत रहे हैं. हम ज्यादातर घर से ही काम कर रहे हैं और तकनीक का सही इस्तेमाल कर रहे हैं. और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे किसी भी काम में कोई परेशानी न आए. लॉकडाउन किसी के लिए भी मुश्किल हो सकता है, ये संकट का समय है, लेकिन हमारा विश्वास है कि हम इस चुनौती का सामना करेंगे और इस पर जीत हासिल करेंगे.
छत्तीसगढ़ विधानसभा (Chhattisgarh Assembly) में पेश एक आंकड़े के मुताबिक अप्रैल 2018 से 15 फरवरी 2020 तक राज्य सरकार को 8 हजार 769.11 करोड़ रुपयों का राजस्व (Revenue) शराब बेचकर मिला.
रायपुर. कोरोना वायरस (Corona Virus) के संक्रमण के फैलने के खतरे को लेकर छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार ने 13 मार्च 2020 को ही स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए. 14 मार्च को जिम, मल्टीप्लेक्स, सिनेमा घर, मॉल बंद करने के निर्देश जारी कर दिए. राजनीतिक, धार्मिक सभाओं पर भी रोक लगा दी. लेकिन इसके बाद भी विपक्षी दल सरकार की शराब (Liquor) की दुकानें बंद नहीं करने के निर्णय की आलोचना करते रहे. कोरोना को फैलने से रोकने के तमाम निर्णयों के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने आखिरकार 23 मई को शराब की दुकानों को बंद करने का निर्णय पहली बार लिया, लेकिन इस निर्णय में 23 से 25 मई तक ही शराब की दुकानें बंद करने निर्देश थे. 23 मार्च को ही राज्य की भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) सरकार ने प्रदेश में 31 मार्च तक लॉकडाउन (Lockdown) का ऐलान कर दिया.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 24 मार्च को देशभर में लॉकडाउन का ऐलान किया. इसकी मियाद 14 अप्रैल रखी गई. इसके बाद राज्य सरकार ने 25 से 31 मार्च, 1 अप्रैल से 6 अप्रैल, 6 से 14, 15 से 20 फिर 21 अप्रैल से 3 मई तक शराब की दुकानें बंद रखने के अलग-अलग समय में निर्देश जारी किए. यानी कि साफ था कि सरकार की नीति शुरू से ही लंबे समय तक शराब की दुकानें बंद करने की नहीं थी. लॉकडाउन फेज-3 में केन्द्र सरकार की ढील के बाद आखिरकार 4 मई से राज्य में शराब की दुकानें खोल दी गईं. विपक्षी दल और शराबमुक्ति के लिए काम करने वाले लोग इसका विरोध कर रहे हैं. इनके विरोध के कारणों को जानेंगे, इससे पहले जानते हैं कि शराब बेचने से छत्तीसगढ़ सरकार को क्या लाभ है?
भिलाई में शराब की एक दुकान के बाहर लगी लाइन.
करोंड़ों रुपयों का कारोबारछत्तीसगढ़ में शराब की दुकानों का संचालन राज्य सरकार के अंग छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पाेरेशन द्वारा संचालित की जा रही हैं. विधानसभा में 5 मार्च 2020 को पेश किए गए एक आंकड़े के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4054.21 करोड़ रुपयों का राजस्व शराब बेचकर मिला. इसके बाद 2018-19 में 4491.35 करोड़ रुपये और अप्रैल 2019 से जनवरी 2020 तक 4089.91 करोड़ रुपयों का राजस्व सरकार को शराब से मिला. इसके बाद 1 से 15 फरवरी 2020 के बीच राज्य सरकार को 187.85 करोड़ रुपयों का राजस्व मिला. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन में बंदी के बाद 4 मई को शराब की दुकान खोलने के बाद राज्य सरकार को करीब 50 करोड़ रुपयों का राजस्व मिला है.
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह. फाइल फोटो.
कोरोना फैलाने की खुली छूट
कोरोना वायरस के फैलने के खतरे के बीच प्रदेश में शराब की दुकानें खोलने के निर्णय का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह न्यूज 18 से कहते हैं- ‘शराब की दुकानों में पहले ही दिन सोशल डिस्टेसिंग व लॉकडाउन के नियमों के खुला उल्लंघन हुआ. सरकार ने शराब की दुकानें खोलकर कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलाने की खुली छूट लोगों को दे दी है. ये स्थिति विस्फोटक है. इस संकट में लोगों के पास वैसे भी पैसे नहीं हैं. शराबी घरों में बर्तन और महिलाओं के गहने बेचेंगे और शराब की दुकानों में उस पैसे को देंगे.’
छत्तीसगढ़ में 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन कहते हैं- ‘कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में पूर्ण शराबबंदी का वायदा किया था. 40 दिनों तक प्रदेश में शराब की दुकानें बंद थीं. ये एक अच्छा मौका था कि वो अपने वायदे को पूरा करे, लेकिन वर्तमान सरकार को तो शराब से पता नहीं कितना प्यार है. पैसे किसी व्यक्ति के जीवन से ज्यादा बहुमूल्य नहीं हैं.’
शराब की दुकान.
सत्ता का बेशर्म चेहरा
शराबबंदी के लिए छत्तीसगढ़ में तमाम आंदोलनों का नेतृत्व करने वाली ममता शर्मा कहती हैं कि ‘आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सरकार सामाजिक स्थिति को खराब कर रही है. अगर शराब को पैसों से जोड़कर देखेंगे तो फिर सरकार को चकलाघरों के संचालन समेत हर उस गैरकानूनी कार्यों को लाइसेंस दे देना चाहिए, जिससे समाज को खतरा है. इस भयावह महामारी के फैलने के खतरे के बीच शराब की दुकानों को खोलना सत्ता के बेशर्म चेहरे को दिखाता है.’
केन्द्र की इजाजत पर खुली हैं दुकानें
लॉकडाउन में शराब की दुकानें खुलने के विरोध को लेकर राज्य के आबकारी मंत्री कवासी लखमा कहते हैं- ‘शराब की दुकानें खोलने की इजाजत केन्द्र सरकार ने राज्यों को दी है. केंद्र सरकार ने राजस्व बढ़ाने जहां केंद्रीय कर्मचारियों का डीए और दूसरी चीजों में कटौती की हैं. जबकि राज्य सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है. जो शराब दुकानें खोली भी जा रही हैं, वहां सोशल डिस्टेसिंग के पालन के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत होम डिलीवरी की व्यवस्था भी की गई है.’
केरल के तिरुवनंतपुरम से 1129 मजदूरों का जत्था लेकर विशेष ट्रेन सोमवार शाम देवघर के जसीडीह स्टेशन पहुंचा. इनमें से अधिकांश मजदूर संतालपरगना के रहने वाले हैं. इसके अलावा साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा, गिरिडीह, गढ़वा, लातेहार, रामगढ़, धनबाद और गुमला जिला के रहने वाले हैं. इन सभी मजदूरों से रेल किराया लिया गया था.
घर लौटे इन मजदूरों और कामगारों का कहना है कि एक-एक मजदूर से 875 रुपये बतौर भाड़ा वसूला गया था, बहुतों को तो टिकट की राशि का जुगाड़ करने में भारी मसक्कत का सामना करना पड़ा, हालांकि इसी में उन्हें यात्रा के दौरान खाने का पैकेट भी उपलब्ध कराया गया था. स्टेशन पहुंचने के बाद सभी मजदूरों को बस से संबंधित जिले में भेजा गया.
सूरत से आए मजदूरों से भी लिए गए पैसे
इसी तरह सूरत से झारखंड आए 1200 मजदूरों ने भी रेल टिकट दिया. लॉकडाउन के बीच फंसे इन मजदूरों के पास सूरत में खाने पीने का ठिकाना नहीं था तो भला अपने गांव कैसे ट्रेन से यात्रा कर पाते. कई लोगों ने अपने गांव से रुपए मंगाए थे तो किसी ने अपने मालिक से उधार लिए थे. इन मजदूरों से यात्रा के लिए 700-700 रुपये लिए गए थे.
सीएम हेमंत सोरेन ने उठाए सवाल
इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रेलवे पर बड़ा सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि रेलवे ने पीएम राहत कोष में 150 करोड़ रूपये का योगदान दिया है. कहीं ये पैसे मजदूरों से लेकर तो नहीं दिए गए. अगर ऐसा है तो आश्चर्य का विषय है. मजदूरों से रेल किराया लेने की खबरों पर सीएम हेमंत सोरेन ने यह बात कही थी.
8-9 लाख मजदूरों-छात्रों को लाया जा रहा वापस
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड देश का अकेला ऐसा राज्य है, जो रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व देता है, इसलिए यहां के मजदूरों और छात्रों से छूट मिलना चाहिए. बता दें कि लॉक डाउन में देश के अन्य राज्यों में फंसे झारखंड के लगभग 8 से 9 लाख मजदूर, कामगार और छात्रों को वापस लाया जा रहा है.
आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Coronavirus Pandemic: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोरोना वायरस की महामारी के कारण जारी लॉकडाउन के दौरान मकान का किराया न देने की स्थिति में मजदूरों-छात्रों को घरों से निकाले जाने पर रोक लगाने से संबंधित याचिका खारिज कर दी है. गौरतलब है कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान सरकार ने मकानमालिकों से किरायेदार के प्रति मानवीयता दिखाते हुए फिलहाल किराया नहीं मांगने की बात कही थी. याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वकील लगातार इस तरह की याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं. सरकार ने इसके लिए हेल्पलाइन बनाई है इसलिए कोर्ट सरकार के आदेशों को लागू नहीं कर सकता. हालांकि अदालत ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में भारी जुर्माना लगाया जा सकता है.
गौरतलब है कि सरकार के आदेश के बावजूद कई जगह मकान मालिक, छात्रों और मजदूरों पर घर खाली करने का दबाव बना रहे हैं, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है.अर्जी में कहा गया केंद्र सरकार ने एडवाइजरी कर साफ किया था कि लॉकडाउन के दौरान किराया चुकाने में असमर्थ लोगों पर किराया देने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता. इसके बावजूद मकान मालिक की ओर से किरायेदारों को परेशान किया जा रहा है. किराया न देने की सूरत में उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट में वकील पवन प्रकाश पाठक और कुछ छात्रों की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया था कि सरकार ने लॉकडाउन का आदेश जारी कर रखा है, जिसकी वजह से लोग परेशानी में हैं. हर परिवार वित्तीय संकट से जूझ रहा है. लॉकडाउन की वजह से सारा काम ठप है. ये तमाम स्टूडेंट घर से दूर हैं और पढ़ाई कर रहे हैं. ये स्टूडेंट और मजदूर किराये के घर में रह रहे हैं. ये या तो मध्यम वर्ग से हैं या गरीब हैं. ज्यादातर स्टूडेंट अपना खर्चा प्राइवेट ट्यूशन करके निकालते हैं. इस तरह मजदूर के सामने भी इस समय रोजी-रोटी का संकट है, इसके बावजूद मकान मालिक इनसे किराया मांग रहे हैं.गृह मंत्रालय ने 29 मार्च 2020 को आदेश पारित किया था कि कोई भी मकान मालिक किसी भी किराएदार उनसे किराया वसूलने के लिए दबाव नहीं डालेंगे.
VIDEO: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, शेल्टर होम में प्रवासियों को खाना, दवा आदि सुविधाएं दी जाएं
नई दिल्ली: फिल्मों और किताबों में बैटमैन नाम का किरदार लोगों की जान बचाता था, लेकिन चीन की एक बैटवुमन पर दुनियाभर में लोगों की जान से खिलवाड़ करने का आरोप लग रहा है. बैटवुमन, दरअसल एक महिला वैज्ञानिक है जो वुहान के उसी मौत वाली लैब में रिसर्च करती हैं, जहां से कोरोना (Corona) के दुनियाभर में फैलने का दावा किया जाता है. दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि चाइनीज बैटवुमन ने पहले तो चीनी सरकार के इशारे पर लैब में कोरोना वायरस (Coronavirus) बनाया और अब दुनिया को दूसरा नया वायरस देने के मिशन में जुट चुकी है.
चीन की ये वही खतरनाक लैब है, जहां से खतरनाक कोरोना वायरस पूरी दुनिया में फैल गया. अब खुलासा हुआ है कि इसी लैब में काम करने वाली एक महिला वैज्ञानिक ने ही कोरोना वायरस का इजाद किया और दुनिया को कोरोना वायरस के युग में ढकेल दिया.
BATWOMAN दो शब्दों को जोड़कर बना है- बैट और वुमन. बैट मतलब चमगादड़ और वुमन मतलब महिला. चीन की महिला वैज्ञानिक शी झेंगली को बैटवुमन इसलिए कहा जाता है क्योंकि शी झेंगली कई सालों से वुहान की पी4 लैब में चमगादड़ों में पाए जाने वाले वायरस पर रिसर्च करती आ रही हैं.
जब चीन समेत दुनिया भर में कोरोना वायरस फैला और लाखों लोग संक्रमित होने लगे तो चीन की खुफिया एजेंसियों ने वैज्ञानिक शी झेंगली को कहीं छिपा दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी वैज्ञानिक शी झेंगली ने फरवरी के महीने में तो कोरोना वायरस के वुहान लैब से कनेक्शन होने से पूरी तरह से इंकार किया था, लेकिन मार्च आते आते उनके सुर बदल गए थे. उन्होंने दावा किया था कि कोरोना वायरस के लैब से लीक होने की आशंका से कई रात उन्हें नींद नहीं आई थी.
अभी दुनिया कोरोना से निपटने में ही लगी है. दुनिया के लगभग सारे देशों में लोगों की जान बचाने के लिए लॉकडाउन लगाया गया है. और तो और, अभी तक कोरोना की कोई दवा या वैक्सिन भी नहीं ढूंढी जा सकी है, लेकिन खबरों के मुताबिक चाइनीज बैटवुमन यानी वायरस वैज्ञानिक शी झेंगली वुहान के पी4 लैब में फिर से पहुंच गई हैं.
‘चाइनीज बैट-वुमन’ नया वायरस बनाने में जुटी! दावा किया जा रहा है कि वुहान की इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में शी झेंगली ने फिर से काम शुरू कर दिया है. दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि शी झेंगली अब कोरोना से भी खतरनाक वायरस बनाने में जुटी हुई हैं. यानी इसकी आशंका बनी हुई है कि अगर कोरोना का इलाज दुनिया आने वाले वक्त में ढूंढ भी लेती है तो चीन कोई दूसरा नया जानलेवा वायरस फैला सकता है.
Edited By Purnima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाने के लिए हम कई तरह के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते हैं। मगर घर में ही रखी चीजें आपके चेहरे पर चमक भर सकती हैं। जी हां, बेसन-हल्दी या फिर एलोवेरा इनमें से एक है, जो आपकी स्किन पर नेचुरल ग्लो भरेगा। आज हम आपको एलोवेरा की एक होम रेमिडी बताएंगे जिसे आजमा कर आपके चेहरे पर निखार आएगा।
इससे आपका रंग भी गोरा होगा और साथ ही साथ अगर पिंपल्स के निशान हैं तो वो भी कुछ ही दिनों में चले जाएंगें। ग्लोइंग स्किन रेमिडी को बनाने के लिए आपको बाजार से किसी भी मेहंगे प्रोडक्ट को खरीदने की जरूरत नहीं है। यहां जानें इसकी सामग्री और बनाने का तरीका…
इस घोल को बनाने के लिए सबसे पहले एक कटोरी में एलोवेरा जेल और शहद मिलाएं। जब दोनों चीजें अच्छी प्रकार से मिक्स हो जाए तब इसमें नींबू का रस मिलाएं। अच्छी तहर से सभी चीजों को मिक्स करने के बाद इसमें गुलाबजल डालें। लीजिए आपका क्लींजिंग लोशन बनकर तैयार है।
आप इसे एक बॉटल या कंटेनर में इसे भर कर रख लीजिए। फिर रोज सुबह चेहरा धोने से पहले इससे अपने चेहरे की सफाई कीजिए। इसकी कुछ बूंद अपने हाथों पर लेकर चेहरे पर लगाएं और कुछ देर इससे मसाज करें। 5 मिनट के बाद अपने चेहरे को ठंडे पानी से धो लें। इस क्लींजर को आप 10-15 दिन तक फ्रिज में रख सकती हैं।
ऐलो चेहरे को बिना चिपचिपा या ग्रीसी लुक दिए इसे मॉइश्चराइज करता है। ऐसे में ऑयली स्किन वालों के लिए यह बेहद उपयोगी है। इसके अलावा एलोवेरा एक एंटी एजिंग एलिमेंट के तौर पर काम करता है। ऐलोवेरा में बीटा कैरोटीन, विटामिन सी और ई जैसे ऐंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो स्किन को नेचुरल और जवां रखते हैं।
गर्मियों या धूप में रहने पर स्किन टैन होना आम बात है, हालांकि इसे सही ना किया जाए तो यह परमानेंट हो सकता है। ऐसे में ऐलोवेरा आपके लिए बेहद मददगार साबित होगा। 2 चम्मच ऐलोवेरा जेल, 1 चम्मच नींबू और थोड़ा शहद लेकर प्रभावित एरिया पर लगाएं। स्किन टोन काफी बेहतर होगा।
This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Cookie settingsACCEPT
Privacy & Cookies Policy
Privacy Overview
This website uses cookies to improve your experience while you navigate through the website. Out of these cookies, the cookies that are categorized as necessary are stored on your browser as they are essential for the working of basic functionalities of the website. We also use third-party cookies that help us analyze and understand how you use this website. These cookies will be stored in your browser only with your consent. You also have the option to opt-out of these cookies. But opting out of some of these cookies may have an effect on your browsing experience.
Necessary cookies are absolutely essential for the website to function properly. This category only includes cookies that ensures basic functionalities and security features of the website. These cookies do not store any personal information.
Any cookies that may not be particularly necessary for the website to function and is used specifically to collect user personal data via analytics, ads, other embedded contents are termed as non-necessary cookies. It is mandatory to procure user consent prior to running these cookies on your website.