केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से मिली रियायत के बाद लॉकडाउन में फंसे प्रवासी अपने प्रदेश लौटने की कोशिश कर रहे हैं. मंगलवार को मध्य प्रदेश लौट रहे कुछ लोग मथुरा में सड़क हादसे का शिकार हो गए. इस सड़क हादसे में 7 की मौत हो गई जबकि 2 की हालत गंभीर बताई जा रही है.
असल में, मथुरा में एक डीसीएम ने टेम्पो में टक्कर मार दी जिससे यह हादसा हुआ. टेम्पो में सवार लोग मध्य प्रदेश के छतरपुर के बताए जा रहे हैं. ये सभी लोग कोरोना लॉकडाउन में फंसे हुए थे और अपने प्रदेश लौट रहे थे. मरने वाले सभी छतरपुर के निवासी बताए जा रहे हैं.
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ओडिशा में मजदूरों को ला रही बस हादसे का शिकार
इससे पहले, ओडिशा में कोरोना लॉकडाउन के दौरान तेलंगाना में फंसे प्रवासी मजदूरों को ला रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. इस हादसे में बस ड्राइवर की मौत हो गई जबकि 2 अन्य लोग घायल हो गए थे.
यह हादसा मंगलवार सुबह ओडिशा के खुर्दा जिले में NH 16 पर कुहुंडी के समीप हुआ है. बस हैदराबाद से ओडिशा के बांकी जा रही थी. यह तीसरी ऐसी घटना है जब प्रवासियों को ले जा रही बस की ओडिशा में दुर्घटना हुई है.
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इससे पहले 3 मई को गुजरात के सूरत से प्रवासी मजदूरों को लेकर वापस आ रही बस ओडिशा के गंजाम और कंधमाल की सीमा पर कलिंगा घाट के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. इस हादसे में बस के चालक समेत पांच लोग घायल हो गए. सूचना मिलते ही पुलिस दमकलकर्मियों के साथ मौके पर पहुंच गई. इस बस में तीन महिलाओं समेत 57 लोग सवार थे. इन सभी को बस से गंजाम ले जाया जा रहा था.
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यूपी के सीएम ने कहा है, कुछ लोग स्वार्थ के लिए कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ को कमजोर कर रहे हैं
लखनऊ:
Coronavirus Pandemic: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने मंगलवार को विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे समय जब देश में कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई मजबूती से आगे बढ़ रही है, कुछ लोग निहित स्वार्थों के लिए इसे कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने यहां एक बयान में कहा कि कोरोना वायरस की इस महामारी (Coronavirus Pandemic) के दौरान बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो आज भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे हैं. उन्होंने कहा, “यह अत्यंत दुखद है कि भारत की इस मजबूत लड़ाई को कुछ लोग अपने निहित राजनीतिक स्वार्थों के लिए कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं.”
सीएम ने कहा, “पहली बार देश के अंदर आपदा के समय में गरीबों, मजदूरों और महिलाओं के लिए एक बड़ा राहत पैकेज प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के रूप में घोषित हुआ. जो लोग अपने शासनकाल में गरीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का पैसा हड़प जाते थे, आज जब पैसा सीधे उन गरीबों के खाते में पहुंच रहा है तो उनकी बौखलाहट स्पष्ट दिखाई देती है.” उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि जब सरकार बिना किसी भेदभाव के हर एक तबके के साथ खड़ी है तब कुछ विपक्षी दल केवल राजनीतिक रूप से हर एक मुद्दे में अनावश्यक राजनीति करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह राजनीतिक गरिमा के प्रतिकूल अभद्र आचरण है. जनता सब कुछ जान रही है. इन लोगों के इस नकारात्मक रवैया का जवाब जनता स्वयं देगी. मेरी प्रदेशवासियों से अपील है कि वे देश की लड़ाई में जिस धैर्य और संवेदनशीलता के साथ लड़े हैं, आगे भी इसी तरह सहयोग करें. योगी ने कहा कि मैं इस बात के लिए आश्वस्त करता हूं कि उत्तर प्रदेश में 23 करोड़ जनता और अपने सभी प्रवासी कामगारों तथा श्रमिकों के हितों की चिंता और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है.
VIDEO: रैपिड टेस्टिंग किट चीन को वापस करेगा भारत
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
अब तक करीब 64 हजार श्रमिक प्रदेश में वापस लाये गये
भोपाल : सोमवार, मई 4, 2020, 18:54 IST
कोरोना संक्रमण के कारण विभिन्न प्रदेशों में फँसे मध्यप्रदेश के करीब 64 हजार श्रमिक अब तक वापस लाये जा चुके हैं। गुजरात से करीब 3 हजार लोग आज वापस लाये गये। प्रतिदिन पैदल प्रदेश में 2 से 3 हजार लोग आ रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव एवं प्रभारी स्टेट कंट्रोल-रूम श्री आई.सी.पी. केशरी ने जानकारी दी है कि 3 मई, 2020 तक मुख्यत: गुजरात से 20 हजार, राजस्थान से 33 हजार, हरियाणा से 1350, उत्तर प्रदेश से 2 हजार श्रमिक वापस लाये गये हैं। नासिक से ट्रेन से 347 लोग भोपाल लाये गये हैं। इन सभी को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उनके गृह स्थान पहुँचा दिया गया है।
विभिन्न जिलों में फँसे 43 हजार श्रमिकों को पहुँचाया गृह स्थान
प्रदेश के विभिन्न जिलों में फँसे मध्यप्रदेश के ही करीब 43 हजार श्रमिकों को उनके गृह स्थान पहुँचा दिया गया है।
श्री केशरी ने बताया है कि तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश, कर्नाटका, गोवा, हरियाणा, पंजाब एवं गुजरात में फँसे श्रमिकों को वापस लाने के लिये रेल मंत्रालय से ट्रेन उपलब्ध करवाने की कार्यवाही की जा रही है।
नई दिल्ली: चीन के वुहान (Wuhan) की लैब को पूरी दुनिया शक की निगाह से देख रही है . दावा है कि इसी लैब से कोरोना वायरस (Coronavirus) पहले चीन में और फिर चीन से पूरी दुनिया में फैल गया. अपनी गलती वैसे तो चीन मानने वाला नहीं, इसीलिए अमेरिका चीन के खिलाफ कड़ी जांच कर रहा है. इस जांच के बाद चीन परेशान हो गया है और अब उसने मौत बांटने वाली अपनी लैब के सबूतों को छिपाना शुरू कर दिया है. चीन ने इसकी शुरुआत वुहान लैब की वेबसाइट से अहम जानकारियां और फोटो हटाकर की है.
दुनिया भर में कोरोना फैलाने वाले चीन पर दबाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिका ने वुहान की लैब की जांच करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और यही वजह है कि घबराए और तिलमिलाए चीन ने अब वुहान लैब से कोरोना के लीक होने के सबूतों को मिटाना तेज कर दिया है.
चीन ने सबसे पहले वुहान की उस लैब से सबूत को हटाना शुरू कर दिया है, जहां से कोरोना के फैलने का दावा दुनिया के कई मुल्क कर रहे हैं. चीन ने वुहान लैब की वेबसाइट से कई तस्वीरों को हटा दिया है.
चीन ने जिन तस्वीरों को हटाया, उसमें क्या दिख रहा था – वुहान लैब में चीन के वैज्ञानिकों की बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम करने वाली तस्वीर को चीन ने वेबसाइट से हटा दिया. – वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी से जिन तस्वीरों को हटाया गया है उनमें से कुछ तस्वीरों में वुहान इंस्टीट्यूट का स्टाफ बिना किसी सुरक्षा किट के गुफाओं में जाकर चमगादड़ों को पकड़ता नजर आ रहा है. इस तस्वीर में स्टॉफ के पास मास्क और ग्लब्स तक नहीं हैं. – वुहान लैब के वैज्ञानिक जंगलों में भी चमगादड़ों को पकड़ने जाते थे, लेकिन इस दौरान भी लापरवाही बरती जाती थी. इससे जुड़ी तस्वीर भी बेवसाइट से हटा दी गई है. – चीन ने वुहान इंस्टीट्यूट आफ वायरोलॉजी से उस तस्वीर को भी हटा दिया है, जिसमें कोरोना जैसे 1500 घातक वायरस को स्टोर करने वाले फ्रिज को दिखाया गया था.
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चीन ने वेबसाइट से और भी कई जानकारियां हटाई हैं अमेरिकी वैज्ञानिको के दौरे से जुड़ी जानकारियों को हटा दिया. मार्च 2018 में अमेरिकी दूतावास के वैज्ञानिक रिक स्विटजर ने इस लैब में विजिट किया था. इस दौरे के बाद स्विटजर ने अमेरिका के विदेश विभाग को चेतावनी भरा संदेश भेजा था. इस संदेश में स्विटजर ने कहा था कि इस लैब में प्रशिक्षित लोगों की भारी कमी है. यानि अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पहले ही इस बात की चेतावनी दे दी थी कि लैब में कभी भी कुछ भी हो सकता है. इन सभी तस्वीरों के बाद वुहान लैब शक के घेरे में आ गई थी और अमेरिका के उस दावे को मजबूती मिल रही थी जिसमें बार बार कहा जा रहा है कोरोना वायरस वुहान लैब से लीक हुआ.
आमतौर पर लड़कियां जब साड़ी पहनना सीखती हैं, तो इसके लिए वह सबसे पहले अपनी मां की ही साड़ी ट्राई करती है। इतना ही नहीं मां के कलेक्शन से बार-बार साड़ी लेकर पहनना भी आम सी बात है। वहीं साउथ की ऐक्ट्रेस ऐश्वर्या ने तो अपनी मां की साड़ी पहनकर फोटोशूट ही करवा लिया है।
Edited By Akshara Upadhyay | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:
हर लड़की ने कभी न कभी अपनी जिंदगी में मां की साड़ी जरूर पहनी होती है और इसमें फिल्मी दुनिया की हसीनाएं भी शामिल हैं। इस लिस्ट में अब नया नाम साउथ की फिल्मों की ऐक्ट्रेस ऐश्वर्या लक्ष्मी का भी जुड़ गया है। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह अपनी मां की बेहद खूबसूरत साड़ी पहनी दिखाई दे रही हैं।
शेयर किए गए फोटो में ऐश्वर्या ब्लू सिल्क साड़ी पहनी देखी जा सकती हैं। इस साड़ी पर ओवरऑल सिल्वर थ्रेड से पोल्का डॉट्स डिजाइन्स बनाई गई थीं। वहीं बॉर्डर पर प्लेन सिल्वर थ्रेड स्टिच की गई थी। इस ब्रॉड बॉर्डर से साड़ी का लुक और खास बनता दिखाई दे रहा था।
ऐश्वर्या ने इस लुक को पूरा करते हुए नथ और कानों में झुमके पहने थे। इसके अलावा उन्होंने कोई और जूलरी पहनना अवॉइड किया था, जो दिखाता है कि वह सिर्फ उस साड़ी को हाईलाइट करना चाहती थीं। वहीं उन्होंने मेकअप को न्यूड टोन रखते हुए, आईज को हाईलाइट किया है। उन्होंने बालों को लूज बन में स्टाइल किया था। दूसरी तस्वीर में ऐश्वर्या की मां को भी सेम साड़ी में देखा जा सकता है। वैसे आपको बता दें कि, ऐश्वर्या ने एक मैगजीन फोटोशूट के लिए मां की इस साड़ी को पहना था।
यह पहली बार नहीं है जब ऐश्वर्या लक्ष्मी ने अपने साड़ी लुक से इम्प्रेस किया हो। इस बाला के पास सिल्क साड़ियों का अच्छा खासा कलेक्शन है। उन्होंने तो सिल्क साड़ियों में फोटोशूट तक करवाया था, जिसमें कई ऐसे शेड्स नजर आए थे, जिन्हें साड़ी लवर लड़कियां अपनी वॉरड्रोब में जरूर शामिल करना चाहेंगी।
Web Title aishwarya lekshmi donned her mother silk saree for a photoshoot and impresses her fans(News in Hindi from Navbharat Times , TIL Network)
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छत्तीसगढ़ में मिले नए मामलों के कारण एकाएक कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ गई है.
Fight Against COVID-19: प्रवासी मजदूर लगातार दूसरे प्रदेशों से छत्तीसगढ़ पहुंच रहे हैं. इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है.
रायपुर. पूरा देश कोरोना संकट (Corona Crisis) से जुझ रहा है. इस दौरान प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) का मुद्दा लगातार मीडिया के सुर्खियों में बना हुआ है. लेकिन, ये प्रवासी मजदूर जब वापस अपने घर लौट रहे थे, तो वो इस खतरनाक वायरस को भी साथ में ला रहे हैं. इस तरह के कई मामले देश के अनेक राज्यों से सामने आए हैं. छत्तीसगढ़ (Chattisgarh) वापस लौटने वाले 14 प्रवासी मजदूरों को अपने अपने घरों में क्वारंटाइन किया गया था. रविवार को जानकारी मिली की ये सारे लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हैं.
छत्तीसगढ़ के अलावा कई अन्य राज्यों में इस तरह के मामले सामने आये. इससे भी ज्यादा चिंता की बात ये है कि लंबी यात्रा कर वापस लौट रहे इन मजदूरों के कर्नाटक और राजस्थान की सीमा से गुजरने के बावजूद इनके संक्रमित होने की जानकारी नहीं मिल सकी. सोमवार को कर्नाटक और राजस्थान के बॉर्डर से गुजरने वाले तीन लोगों में संक्रमण के नए मामले सामने आये. माना जा रहा है कि वापस लौटने के दौरान इनमें से किसी भी सही तरीके से स्क्रीनिंग नहीं हुई.
छत्तीसगढ़ में एकाएक बढ़े Covid-19 के मामले
छत्तीसगढ़ में मिले नए मामलों के कारण एकाएक कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ गई है, जबकि यहां इसके केवल 7 मरीज कई अस्पतालों में भर्ती थे. सोमवार को एक और मरीज के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद यहां मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 55 हो गया है. इससे पहले झारखंड से वापस लौटने वाले 14 प्रवासी मजदूरों की जांच के दौरान इस खतरनाक वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी. इन 14 प्रवासी मजदूरों से पहले झारखंड से लौटे 3 लोगों में Covid-19 वायरस का संक्रमण मिला था.कर्नाटक के मंडाया में मिले 2 पॉजिटिव
कर्नाटक के मंडाया में 10 दिनों के भीतर 2 लोगों के जांच के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है. ये लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर मुंबई से अपने गांव वापस लौटे थे. द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार,डीसी वेंकटेश ने बताया कि ये सभी लोग अपने परिवार के लोगों के साथ एक ही कार से 23 अप्रैल को वापस लौटे थे. उसके बाद इन सभी को मंडाया मेडिकल कॉलेज के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया. डॉक्टर इन संक्रमित मरीजों के प्राइमरी और सेकेंडरी संपर्क की जानकारी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं.
राजस्थान में भी हुआ है प्रसार
राजस्थान में भी प्रवासी मजदूरों के माध्यम से कोविड-19 का संभावित प्रसार हुआ है. प्रवासी मजदूर अवैध तरीके से गुजरात से यहां डूंगरपुर वापस लौटे थे. इनमें से कास्बा गांव का रहने वाला एक मजदूर संक्रमित मिला है. जिससे जिले में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 6 हो चुकी है. अधिकारियों का कहना है कि यह मरीज 17 अप्रैल को यहां पहुंचा. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई. 23 अप्रैल को यह बाहर घूमते दिखा. जिसके बाद के दौरान इसे क्वारेंटाइन में रखा गया. 24 अप्रैल को हुई पहली जांच में इसे नेगेटिव पाया गया. लेकिन दूसरी जांच के दौरान ये कोरोना वायरस से संक्रमित मिला. जानकारी मिलने के बाद इसके गांव को पूरी तरह सील कर दिया गया है. इस संबंध में जिला स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि बहुत सारे मजदूर गुजरात से राजस्थान वापस आने के दौरान सीमा पर चेक प्वाईंटस से बचने का प्रयास कर रहे हैं.
कोरोना के बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन के तीसरे चरण को लेकर केंद्रीय मंत्रियों के समूह (जीओएम) की अहम बैठक होगी. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन की अगुवाई में यह बैठक स्वास्थ्य मंत्रालय में होगी. बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, सीडीएस विपिन रावत समेत कई मंत्री-अधिकारी मौजूद रहेंगे.
बैठक में लॉकडाउन-3 के दौरान दी गई छूट के पहले दिन मिले फीडबैक और पिछले एक हफ्ते में संक्रमित लोगों के बढ़ते आंकड़ों पर भी चर्चा होगी. कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की आगे की तैयारियों पर भी चर्चा होगी. साथ ही बेहतर सुविधाओं की रणनीति बनाई जाएगी.
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छात्रों की ओर से बनाए गए ग्रुप पर लड़कियों को लेकर बेहद आपत्तिजनक बातें की जाती थी (प्रतीकात्मक फोटो)
नई दिल्ली:
छात्रों के एक इंस्टाग्राम ग्रुप की चैटिंग (Group Chat) में स्कूली छात्राओं के साथ रेप की बात करने संबंधी मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. दिल्ली के एक स्कूली छात्र (Delhi Schoolboy) को हिरासत में लिया गया है. उसके मोबाइल को जब्त कर लिया गया है. जबकि मामले से संंबंधित 20 और छात्रों की पहचान कर ली गई है. गौरतलब है कि ‘बोइस लॉकर रूम’ (Bois Locker Room) नाम के ग्रुप का इस मामले में नाम सामने आया था. इस मामले को लेकर लोगों के बीच काफी गुस्सा और नाराजगी थी. इस ग्रुप को अब डिएक्टिवेट कर दिया गया है. दिल्ली के एक मशहूर स्कूल के छात्र ने 20 और लोगों के नाम बताए हैं जो इस ग्रुप में एक्टिव थे. इसके मोबाइल फोन को दिल्ली पुलिस के साइबर सेल (Cyber Cell of Delhi Police) ने जब्त कर लिया है और इसकी जांच की जा रही है.
माना जा रहा कि दक्षिणी दिल्ली के चार या पांच स्कूलों के कक्षा 11 और 12 के छात्र इस ग्रुप में शामिल थे. ये सभी स्कूली छात्र रेप, सेक्स और इससे जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा किया करते थे. पुलिस के साइबर-क्राइम डिवीजन ने इस ग्रुप की चैंटिंग के विवरण को लेकर फेसबुक के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम को भी लिखा है. रविवर को यह विवादित और हर किसी को हैरान करने वाला मामला सामने आया था जब कई सोशल मीडिया यूजर्स ने ‘बोइस लॉकर रूम’ की चैंटिंग के स्क्रीनशॉट इंस्टाग्राम और ट्विटर पर पोस्ट किए थे.ये स्क्रीनग्रेब दिल्ली के शीर्ष स्कूलों के कुछ छात्रों के थे जिसमें कुछ स्कूली छात्राओं के फोटोज उनकी सहमति के बिना पोस्ट किए गए थे और ऐसे आपत्तिजनक कमेंट्स किए गए थे जिन्हें यहां लिखा भी नहीं जा सकता.
अपने ही सहपाठियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के इर्द-गिर्द घूमती कई चैटिंग इन किशोरों की कुंठा को उजागर करती है. रेप जैसे विषय को इतने सामान्य तरीके से लेने की इनकी प्रवृत्ति समाज के लिए चिेता का विषय हो सकती है. इस मुदृदे को लेकर बड़ी संख्या में लोगों ने ट्विटर सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हैशटैग#BoysLockerRoom के साथ बड़ी संख्या में पोस्ट करके अपनी चिंता का इजहार किया. स्क्रीनशॉट्स पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के अनुसार, “बोइस लॉकर रूम” के सदस्यों ने उन महिलाओं की निर्वस्त्र तस्वीर फोटो लीक करने की धमकी दी, जिन्होंने उन्हें रिपोर्ट किया और एक दूसरा ग्रुप बनाया.
VIDEO: शेल्टर होम में प्रवासियों को खाना, पानी, दवा आदि सुविधाएं दी जाएं : सुप्रीम कोर्ट
1200 करोड़ का राहत पैकेज अपेक्षित : मंत्री डॉ. मिश्रा
ऑक्सीजन थेरेपी से कोरोना के उपचार में मदद मिली
भोपाल : सोमवार, मई 4, 2020, 18:42 IST
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन से चर्चा करते हुए कोविड-19 संक्रमण नियंत्रण के लिये 1200 करोड़ रूपये के राहत पैकेज के प्रस्ताव को अनुमोदित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने आरएनए एक्स्ट्रेक्शन किट प्रदेश को उपलब्ध कराने की मांग की। मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में ऑक्सीजन थेरेपी से कोरोना वायरस की बीमारी के उपचार में मदद मिली है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री अश्विनी चौबे भी उपस्थित थे।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि चिरायु अस्पताल भोपाल में अब तक 600 मरीज भर्ती हुए हैं, जिसमें से 250 से अधिक स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। अस्पताल में उपचार के दौरान एक भी मरीज काल-कवलित नहीं हुआ है। मंत्री डॉ. मिश्रा ने बताया कि ऑक्सीजन थेरेपी के उपचार से यह संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से एम्स और इंदौर में भी उपचार किया जा रहा है। इससे मध्यप्रदेश में कोरोना संबंधी मृत्यु दर में भी कमी आई है।
मंत्री डॉ. मिश्रा ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से ग्वालियर जिले को रेड जोन से हटाने की मांग की। उन्होंने बताया कि ग्वालियर में 4 कोरोना मरीज सामने आये थे, जो स्वस्थ हो चुके हैं। वर्तमान में जिले में कोई भी कोरोना पॉजीटिव मरीज नहीं है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण नियंत्रण के लिये सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं और उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जा रहा है। अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि प्रदेश में अब तक 2037 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं, इसमें से 800 पूर्ण स्वस्थ हो चुके है। प्रदेश में अब तक 50 हजार लोगों का कोरोना टेस्ट कराया जा चुका है। प्रदेश में 3 मई को 50 कोरोना संक्रमित मरीज सामने आये जबकि 174 मरीज स्वस्थ हुए हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिये समीक्षा करते हुए डॉ. मिश्रा से कहा कि वे निरंतर दूरभाष पर संपर्क में बने रहे। अब तक कोरोना से अप्रभावी जिलों को सुरक्षित रखने के लिये साथ ही रेड जोन के जिलों को ऑरेंज जोन में लाने के लिये सभी आवश्यक प्रबंध करें। ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग करवाएं। उन्होंने ऑक्सीजन थेरेपी से उपचार की प्रशंसा की।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्रीमती पल्लवी जैन गोविल, स्वास्थ्य आयुक्त श्री फैज एहमद किदवई भी मौजूद थे।
बीजिंग: एक आंतरिक रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वैश्विक रूप से चीन (China) विरोधी भावनाएं इस वक्त अपने चरम पर हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, रिपोर्ट में ये चेतावनी दी गई है कि कोरोना वायरस (coronavirus) प्रकोप के मद्देनजर चीन (China) बढ़ते द्वेष का सामना कर रहा है, जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के साथ उसके संबंध बिगड़ सकते हैं.
कोरोना वायरस जो सबसे पहली बार चीन के वुहान शहर में दिखा था, उसने विश्व स्तर पर अब तक 3 मिलियन से अधिक लोगों को संक्रमित किया है और इसके कारण करीब 2 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
राज्य सुरक्षा मंत्रालय ने चीनी की इस रिपोर्ट को पिछले महीने के शुरुआत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित बीजिंग के शीर्ष नेताओं को सौंपा था. रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को अमेरिका के साथ सशस्त्र टकराव की सबसे खराब स्थिति के लिए तैयार रहने की जरूरत है.
ये रिपोर्ट चीनी रक्षा मंत्रालय से संबद्ध एक थिंक टैंक चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कंटेमंपरेरी इंटरनेशनल रिलेशन्स (CICIR) द्वारा तैयार की गई थी, जो चीन के शीर्ष खुफिया एजेंसी है.
दोनों देशों के बीच बढ़ती खाई
चीन और अमेरिका के बीच संबंध पिछले कुछ दशकों में अपने सबसे खराब स्तर पर देखे जा रहे हैं. अनुचित व्यापार और प्रौद्योगिक कार्यों को लेकर अमेरिका के अविश्वास और मनमुटाव से शुरू होते हुए, हांगकांग, ताइवान और दक्षिण चीन सागर के विवादित इलाकों पर तकरार तक, अमेरिका-चीन संबंधों के बीच खाई बढ़ती जा रही है.
कोरोना वायरस ने हजारों अमेरिकी लोगों की जान ली है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तब से चीन की आलोचना कर रहे हैं और चीन पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं. इस बीच, उनका प्रशासन चीन से बदला लेने के तरीकों पर विचार कर रहा है.
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इसके विपरीत, बीजिंग में यह व्यापक रूप से माना जाता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका उभरते हुए चीन को नियंत्रित करनाचाहता है, जो अर्थव्यवस्था बढ़ने के कारण विश्व स्तर पर अधिक मुखर हो गया है.
अंत में रिपोर्ट में ये निष्कर्ष निकाला गया कि वाशिंगटन, चीन के उदय को आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरे और पश्चिमी लोकतंत्र के लिए एक चुनौती के रूप में देखता है. रिपोर्ट ने यह भी कहा है कि अमेरिका का लक्ष्य जनता के विश्वास को कम करके सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को हटाना है.
चीन COVID-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों के लिए अपने डोनेशन और चिकित्सा उपकरणों की बिक्री और अपने अनुभव साझा करना शामिल है. लेकिन चीन को उन आलोचकों के बढ़ते द्वेष का भी सामना करना पड़ रहा है जिन्होंने इस महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है.
ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पर चीन को लेकर पक्षपती रवैया अपनाने का आरोप लगाया था और कहा था कि वो अब WHO को फंड नहीं देंगे. ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने भी वायरस की उत्पत्ति और इसके फैलने को लेकर एक अंतर्राष्ट्रीय जांच की मांग की है.
पिछले महीने, फ्रांस ने चीनी दूतावास की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख के विरोध में चीन के राजदूत को तलब किया था. इस लेख में कोरोना वायरस से निपटने के लिए पश्चिमी देशों के प्रयासों की आलोचना की गई थी.
और रिपोर्ट के अंत में..
रिपोर्ट से पता चलता है कि चीन विरोधी भावना चीन के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश परियोजनाओं के विरोध को और भड़का सकती हैं. और अमेरिका क्षेत्रीय सहयोगियों को आर्थिक और सैन्य समर्थन देकर एशिया में सुरक्षा स्थितियों को और लचीला बना सकता है.
तियानमेन नरसंहार के बाद जो परिस्थितियां बनी थीं, अब वैसी स्थिति नहीं है क्योंकि चीन अब पहले से ज्यादा ताकतवर है.तब कई पश्चिमी सरकारों ने चीन के खिलाफ कई प्रतिबंध लगाए थे और चीन अलग-थलग पड़ गया था.
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