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कृषक कल्याण पहली प्राथमिकता


कृषक कल्याण पहली प्राथमिकता


नकली खाद-बीज और दवाई बेचने वाले बख्शे नहीं जायेंगे : मंत्री श्री पटेल 


भोपाल : सोमवार, मई 4, 2020, 19:22 IST

कृषि विकास तथा कृ‍षक कल्याण मंत्री श्री कमल पटेल ने आज मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए प्रदेश के जिलाधिकारियों को बताया कि किसानों का हित और किसानों का कल्याण उनकी पहली प्राथमि‍कता है। सत्ता परिवर्तन से होने वाले व्यवस्था परिवर्तन का लाभ किसानों को उपलब्ध कराना ही प्रदेश सरकार का लक्ष्य है। उन्‍होंने निर्देशित किया कि प्रदेश में नकली दवाईयाँ और खाद-बीज बेचने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई करें। कार्यवाही नहीं करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध राज्य स्तर से कार्यवाही की जायेगी। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि उप-संचालक कृषि सुनिश्चित कर लें कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज और दवाईयाँ उपलब्ध हो। नकली खाद-बीज के व्यापार को न केवल रोकना है अपितु जड़-मूल से समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि जो किसानों के साथ धोखाधड़ी करेगा उनके विरूद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के अन्तर्गत कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

चना-मसूर का उपार्जन उत्पादन अनुसार होगा

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि चना और मसूर का उपार्जन जिलों में होने वाले उत्पादन के अनुसार किये जाने के निर्देश जारी किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरसों का उपार्जन 20 क्विंटल प्रति-हेक्टेयर किये जाने के भी निर्देश जारी किये जा रहे हैं।

योजनाओं को किसानों तक पहुँचायें

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि जन-प्रतिनिधियों के सहयोग से विभाग की योजनाओं को आम किसान तक पहुँचाया जाना सुनिश्चित करें। किसानों को योजनाओं के बारे में बताएँ, उन्हें समझाएँ जिससे उन्हें योजनाओं का लाभ मिल सके। किसान का कल्याण और कृषि का विकास तभी होगा जब लाभ सीधे किसानों तक पहुँचेगा।

डॉलर चने की खरीदी के लिये प्रस्ताव भेजेंगे

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मालवा और निमाड़ क्षेत्र में व्यापक स्तर पर डॉलर चने का उत्पादन हो रहा है। किसानों के लिये यह लाभकारी फसल है। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर डॉलर चने की खरीदी के लिये भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जायेगा। मंत्री श्री पटेल ने कहा कि किसानों के कल्याण के लिये सभी आवश्यक कदम उठाए जायेंगे।

बीज-अनुदान वितरण की वीडियोग्राफी कराएं

अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को बीज अनुदान योजनाओं के तहत होने वाली बीज वितरण प्रक्रिया की संपूर्ण वीडियोग्राफी कराई जाए। बीज वितरण जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही कराया जाना सुनिश्चित करें। एक भी किसान योजना से लाभान्वित होने से वंचित न रहे।

कृषक/अधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र और सम्मान निधि मिलेगी

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पिछले वर्ष से अधिक उत्पादन करने वाले कृषक सम्मानित किये जाएंगे। साथ ही वे अधिकारी जो बेहतर कार्य कर उत्पादकता को बढ़ाने में मददगार रहेंगे, उन्हें भी 15 अगस्त और 26 जनवरी को आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

खरीदी केन्द्रों पर बेनर-फ्लेक्स लगाएँ

मंत्री श्री पटेल ने कहा कि किसान इस देश की रीढ़ है। किसानों को आगे बढ़ाना ही प्रदेश सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौ‍हान ने मात्र एक माह में मंडी एक्ट में संशोधन कर निजी मंडियों की भी स्थापना की अनुमति प्रदान कर दी है। एकीकृत लायसेंस प्रणाली प्रारंभ कर दी है। ई-ट्रेडिंग की अनुमति दी गई है। किसानों से हम्माली और तुलावटी की राशि नहीं लेने का निर्णय लिया गया है। किसानों को सौदा-पत्रक के आधार पर व्यापारियों को फसल बेचने की सुविधा दी गई है। किसानों के खाते में फसल बीमा राशि के 2990 करोड़ रूपये जमा कराए गए हैं। कृषि विभाग में राजभाषा हिन्दी के प्रयोग करने संबंधी निर्देश जारी किये गये हैं। किसानों की समस्या के निराकरण हेतु कमल सुविधा केन्द्र की स्थापना की गई है। उन्होंने प्रत्येक खरीदी केन्द्र पर किसानों को लाभान्वित करने संबंधी निर्णयों को प्रदर्शित करने वाले बैनर फ्लैक्स लगाने के निर्देश दिये हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रमुख सचिव कृषि श्री अजीत केशरी और संचालक कृषि श्री संजीव सिंह मौजूद थे।


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कोरोना लॉकडाउन 3.0: सीएम योगी ने मीटिंग में दिए निर्देश, शुरू हों उद्योग – Up cm yogi adityanath decision taken in meeting on corona lockdown 3

  • एडवाइजरी के अनुरूप उद्योग धंधों को शुरू कराने के निर्देश जारी
  • हॉटस्पॉट में रहने वाले कर्मियों के कार्यस्थल पर ना आने के निर्देश हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को लॉकडाउन 3.0 में संचालित किए जाने वाले उद्योग-धंधों को लेकर निर्णय लिए. साथ ही उन्होंने निर्देश दिए हैं कि हर स्तर पर बेहतर काम करने की जरूरत है.

मीटिंग में लिए गए निर्णय-

– मुख्यमंत्री ने प्रवासी कामगारों/श्रमिकों के लिए स्थापित क्वारनटीन सेंटर, आश्रय स्थलों और कम्युनिटी किचन की व्यवस्थाओं में जिलाधिकारी को सहयोग करने के लिए 75 जनपदों में आईएएस और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों को भेजने के निर्देश दिए.

– भारत सरकार की एडवाइजरी के अनुरूप सुरक्षा के सभी मानक अपनाते हुए उद्योग धंधों को शुरू कराया जाए.

– कम्युनिटी किचन पहले से ही जियो टैग, इसी क्रम में क्वारनटीन सेंटर को भी जियो टैग किया जाए.

– यह सुनिश्चित किया जाए कि हॉटस्पॉट में रहने वाले कर्मी अपने कार्यस्थल पर ना आएं.

– लोग अनिवार्य रूप से मास्क अथवा फेस कवर आदि पहन कर ही बाहर निकलें.

– बच्चों के टीकाकरण कार्य में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाए.

– यह भी ध्यान रखा जाए कि इस कार्य से जुड़ा पैरामेडिकल स्टाफ मास्क, ग्लव्स और सैनिटाइजर का उपयोग करे.

– सभी वेंटिलेटर फंक्शनल रखे जाएं.

– मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के जरिए से ग्राम प्रधानों और पार्षदों से संवाद स्थापित कर निगरानी समितियों के द्वारा यह सुनिश्चित कराएं कि किसी भी बाहरी व्यक्ति के चोरी-छिपे उनके क्षेत्र में आने पर वे प्रशासन को सूचित करें.

– कोविड-19 से प्रभावित आर्थिक गतिविधियों के दृष्टिगत राजस्व वृद्धि के वैकल्पिक स्रोत चिन्हित करने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए.

– राशन कार्ड की नेशनल पोर्टेबिलिटी योजना से अधिकाधिक लोगों को जागरुक कर उन्हें लाभांवित किया जाए.

– प्रवासी कामगारों और श्रमिकों को एक जनपद-एक उत्पाद योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और दुग्ध समितियों से जोड़ा जाए.

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बता दें कि कोरोना लॉकडाउन को 17 मई तक के लिए बढ़ाया गया है. वहीं उत्तर प्रदेश में सोमवार को कोरोना वायरस के 121 नए मामले सामने आए हैं. इसी के साथ पूरे प्रदेश में कोविड-19 से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 2766 तक पहुंच गया है.

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Government preparing to bring big relief package for small industries, may announce soon – छोटे उद्योगों के लिए बड़ा राहत पैकेज लाने की तैयारी में सरकार, जल्द हो सकती है घोषणा

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

लॉकडाऊन के तीसरे चरण के तहत सरकार ने हर जोन में उद्योग धंधे खोलने की ज्यादा छूट दी है. लेकिन 40 दिन से बंद पड़े उद्योगों-फैक्टरियों को खोलने में छोटे उद्योगों को कई तरह के संकट से जूझना पड़ रहा है. अब सरकार उनके लिए एक विशेष राहत पैकेज तैयार कर रही है जिससे उनका कारोबार सही से खुल सके. कोरोना संकट और लॉकडाऊन के असर से छोटे उद्योगों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. अब उन्हें COVID-19 संकट से उबारने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम मंत्रालय ने एक राहत पैकेज का मसौदा वित्त मंत्रालय को भेजा है. 

मसौदे में मुख्य रूप से चार सुझावों को अमल में लाने की बात है. 1. छोटे-लघु उद्योगों के लिए नकदी की उपलब्धता बढ़ने के लिए विशेष कदम उठाये जाएं. 2. छोटे उद्योगों को आसान शर्तों पर क्रेडिट मुहैया कराने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम की सीमा मौजूदा 2 करोड़ से बढ़ाई जाये. 3. मौजूदा वित्तीय संकट से राहत देने के लिए टैक्स पेमेंट में रिलीफ दिया जाये. 4. सभी सरकारी विभागों और पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेस छोटे उद्योगों जो बकाया पेमेंट है सूद समेत वापस करें.

सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्दी इस राहत पैकेज पर फैसला कर सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले शुक्रवार को ही वित्त मंत्री और वरिष्ठ अधिकारीयों के साथ छोटे और लघु उद्योगों के लिए क्रेडिट फ्लो बढ़ने पर चर्चा की थी.

MSME फेडरेशन के सेक्रेटरी जनरल अनिल भरद्वाज ने एनडीटीवी से कहा, “सबसे बड़ी समस्या है वर्करों को सैलरी की पेमेंट. सभी फेडरेशन ये चाहते हैं कि सरकार इस लायबिलिटी को पूरा करने में मदद करे. साथ ही, लोन पर मोरेटोरियम 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने किया जाये.”

दरअसल छोटे उद्योग संघ अब सरकार से एक स्टिमुलस पैकेज की मांग कर रहे हैं. एसोचेम अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री सतीश महाना के साथ एक वेबिनार के दौरान कहा, “एक स्टिमुलस पैकेज लाना चाहिए. छोटे उद्योगों को खोलने में दिक्कत आ रही है.. छोटे उद्योगों के लिए स्पेशल क्रेडिट फैसिलिटी जरूरी है. 1 लाख करोड़ की क्रेडिट गारंटी स्कीम लाने की तैयारी हो रही है.”

वेबिनार के ज़रिये चर्चा के दौरान एसोचेम के प्रतिनिधियों ने उद्योग मंत्री से कहा, ‘उत्तर प्रदेश में कई छोटी इंडस्ट्रीज बंद हैं, बड़ी संख्या में लोग बेरोज़गार हुए हैं और सरकार को अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए स्टिमुलस पैकेज लाना चाहिए. उत्तर प्रदेश के उद्योग मंत्री सतीश महाना ने कहा, “हम इंडस्ट्री के साथ खड़े हैं. एक स्थिर पैकेज आना चाहिए. हम अपनी वित्तीय हालात का जायज़ा लेकर पैकेज तैयार करेंगे.”


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रेड, ऑरेंज एवं ग्रीन जोन के अंतर्गत सभी बिजली बिल भुगतान केंद्र चालू


रेड, ऑरेंज एवं ग्रीन जोन के अंतर्गत सभी बिजली बिल भुगतान केंद्र चालू


 


भोपाल : सोमवार, मई 4, 2020, 21:58 IST

वैश्विक महामारी कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में लॉक डाउन प्रभावी होने के कारण विद्युत वितरण केंद्रों एवं जोन कार्यालयों में बिल भुगतान केंद्रों पर नगद बिल जमा करने का कार्य स्थगित रखा गया था।

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया है कि 4 मई से लॉक डाउन-3 लागू होने के बाद रेड, ऑरेंज एवं ग्रीन जोन के सभी वितरण केंद्र एवं जोन स्थित बिल भुगतान केंद्रों ने काम करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा सभी ए.टी.पी. मशीन/एम.पी. ऑनलाईन का संचालन भी प्रारंभ कर दिया गया है। कंपनी ने बिजली उपभोक्ताओं से अपील की है कि निर्धारित सुरक्षा मानदंडो का उपयोग (जैसे- दूरी बनाए रखना, मास्क का उपयोग आदि) करते हुये बिल जमा करने की व्यवस्था का लाभ लें। राजस्व संग्रहण के लिये ऑनलाइन व्यवस्था जैसे portal.mpcz.in, UPAY एप, नेट बैकिंग, फोन-पे, अमेजन-पे, पेटीएम, एच.डी.एफ.सी.-पे एवं अन्य भुगतान विकल्प पूर्ववत चालू रहेंगे।


राजेश पाण्डेय

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Iran reopened mosques, so many people died of coronovirus in just 24 hours |ईरान ने फिर से खोलीं मस्जिदें, महज 24 घंटे में कोरोना वायरस से मर गए इतने लोग

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नई दिल्‍ली: मध्‍य-पूर्वी देशों में कोरोनावायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुए देश ईरान में हालात ठीक होते नजर नहीं आ रहे हैं. यहां अब तक कोविड-19 के कारण 6,277 लोगों की मौत हो चुकी है. केवल पिछले 24 घंटों में ही यहां कोरोनोवायरस से 74 लोगों की मौत हो गई है. यहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि इसके पीछे कारण कई शहरों में मस्जिदों का फिर से खुलना है. 

मंत्रालय के प्रवक्ता किनुश जहानपुर ने राज्य टीवी पर एक बयान में कहा कि ईरान में अब मामलों की कुल संख्या बढ़कर 98,647 हो गई है, जो मध्य पूर्वी देशों में सबसे ज्‍यादा है. बता दें कि रविवार को राष्‍ट्रपति हसन रुहानी ने कहा था कि प्रतिबंधों को कम करना एक व्‍यापक योजना का हिस्‍सा था. इसके बाद सोमवार को ईरान के 132 शहरों में मस्जिदें खुली थीं. 

आईएसएनए समाचार एजेंसी ने सोमवार को बताया कि जिन इलाकों में मस्जिदें फिर से खुली हैं, वहां प्रार्थना करने वालों को सामाजिक दूरी बनाए रखनी चाहिए, मास्क और दस्ताने पहनना चाहिए और वहां आधे घंटे से ज्यादा नहीं रुकना चाहिए. गौरतलब है कि ईरान ने पहले ही शहर के बीच यात्राएं करने और मॉल खोलने से प्रतिबंध हटा दिया है.  स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों द्वारा संक्रमण की नई लहर आने की चेतावनी दिए जाने के बाद भी यहां के बड़े शॉपिंग सेंटरों में गतिविधियों को फिर से शुरू कर दिया है.




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किराया विवाद पर जावडेकर का जवाब, कहा- सब कांग्रेस की राजनीति – Prakash javdekar said truth behind railway controversy is politics of congress

  • जावडेकर का कांग्रेस, शिवसेना, लेफ्ट पर हमला
  • रेल किराये को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा

श्रमिक ट्रेनों से मजदूरों की घरवापसी पर राजनीति तेज हो गई है. कई जगहों पर मजदूर अपने घर जाने के लिए बेताब हो रहे हैं. इसमें कहीं मजदूर पत्थरबाजी कर रहे हैं तो कहीं पुलिस की लाठियां उनपर बरस रही हैं. इस बीच लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए चलाई जा रही स्पेशल ट्रेनों पर राजनीति और भी तेज हो गई है. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि सरकार मजदूरों से रेल किराया वसूल रही है तो सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि ऐसा कुछ भी नहीं. मजदूरों को लाने का 15 फीसदी खर्चा राज्य सरकारों को उठाना है जबकि 85 फीसदी केंद्र उठा रहा है.

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने सोमवार रात एक ट्वीट कर सरकार का पक्ष रखा और और कहा कि रेलवे विवाद के पीछे सच्चाई कुछ और है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें मजदूरों का किराया चुका रही हैं. प्रकाश जावडेकर ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल राजस्थान में कांग्रेस सरकार, केरल में वामपंथी सरकार और महाराष्ट्र में शिवसेना गठबंधन किराये का पैसा नहीं चुका रहे. यह सब कांग्रेस की राजनीति है. जावडेकर ने कहा कि इस पर उन्हें (विपक्ष) शर्म आनी चाहिए.

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कांग्रेस का गंभीर आरोप

इससे पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाया कि जिन मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेनें चलीं, उनमें मजदूरों से किराए वसूले गए. इसकी तस्दीक स्पेशल ट्रेन से आए मजदूरों ने भी कर दी. मजदूरों ने कहा कि उन्होंने टिकट का पूरा पैसा चुकाना पड़ा है. इसी मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से एक बयान आया जो सरकार पर तीखे आरोपों से लैस है.

उन्होंने कहा कि श्रमिक व कामगार राष्ट्रनिर्माण के दूत हैं. जब हम विदेशों में फंसे भारतीयों को अपना कर्तव्य समझकर हवाई जहाजों से निःशुल्क वापस लेकर आ सकते हैं, जब हम गुजरात के केवल एक सरकारी कार्यक्रम में सरकारी खजाने से 100 करोड़ रुपये ट्रांसपोर्ट व भोजन इत्यादि पर खर्च कर सकते हैं, जब रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री के कोरोना फंड में 151 करोड़ रुपये दे सकता है तो फिर तरक्की के इन ध्वजवाहकों को आपदा की इस घड़ी में नि:शुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते?

राजनीति की इस कड़ी में सबसे पहले गरीब मजदूरों का सवाल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने उठाया और केंद्र से अनुरोध किया था कि वो मजदूरों से पैसा न लें. बाद में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों ने भी ऐसी ही राय जताई. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी ऐसी बात कही.

सोनिया गांधी के बयान के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का ट्वीट आया कि एक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों से टिकट का किराया वसूल रही है, वहीं दूसरी तरफ रेल मंत्रालय पीएम केयर्स फंड में 151 करोड़ रुपये का चंदा दे रहा है. इसके बाद कांग्रेस ने अपनी जेब से किराये का पैसा भरने की बात कही. यूपी के कांग्रेस अध्यक्ष अजय सिंह लल्लू ने कहा कि यूपी कांग्रेस मजूदरों के टिकट का पैसा चुकाएगी.

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बीजेपी का जवाब

उधर संगीन आरोप लगे तो बीजेपी ने तुरंत जवाब दिया. बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया कि गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में स्पष्ट है कि स्टेशनों पर कोई टिकट नहीं बिकेगा. रेलवे 85 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है तो 15 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी. प्रवासी मजदूरों को कोई पैसा नहीं देना है. सोनिया गांधी क्यों नहीं कांग्रेस शासित प्रदेशों को खर्च उठाने के लिए कहतीं? बता दें, प्रवासी मजदूरों के लिए रेल मंत्रालय राज्य सरकारों से राय बात करके ट्रेन चला रहा है. इसमें राज्य सरकारें तय करती हैं कि कहां से कहां ट्रेन चलनी है, किसको भेजना है और उसके लिए नोडल अधिकारी कौन होगा.

रेल किराये का 85 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार और 15 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार को देना है. रेल मंत्रालय की तरफ से जारी दिशानिर्देश के 11वें भाग के तीसरे प्वाइंट में कहा गया है कि राज्य सरकार की स्थानीय अथॉरिटी यात्रियों को टिकट देकर जो किराया पाएंगी, वो रेलवे में जमा करेंगी. केंद्र के मुताबिक यहां राज्य सरकार से उसकी 15 फीसदी हिस्सेदारी वाली बात की गई है, लेकिन इस बीच यूपी लौटे मजदूरों का कहना है कि उन्होंने टिकट का पूरा पैसा दिया है.

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PM Modis Parliamentary Constituency Varanasi First Day Liquor Sold Amid Lockdown – पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहले दिन बिकी 4 करोड़ 73 लाख रुपये की शराब

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वाराणसी में शराब की दुकानों के बाहर लाइन में खड़े लोग

वाराणसी:

बनारस कोरोना के रेड जोन में है. बीते चालीस दिनों से यहां सम्पूर्ण लॉकडाउन है, लिहाजा कोई भी दूकान नहीं खुल रही थी लेकिन लॉकडाउन के तीसरे दौर का पहला दिन कई छूटों को लेकर आया. इन छूटों में एक शराब की दुकान के खुलने की भी छूट थी. लगता है  इस छूट ने सबसे ज़्यादा लोगों  के चेहरे पर मुस्कान लाई. ये बात यूं नहीं है. ये इसलिए है क्योंकि सुबह होते ही जीवन की जरूरी चीजों की दुकान पर नहीं बल्कि शराब की देशी से लेकर अंग्रेजी तक की दुकान में लंबी-लंबी लाइन लग गई. आलम ये रहा कि  दुकान खोलने के ढाई से तीन घंटे में ही ब्रांडेड माल की शॉर्टेज हो गई. अधिकांश लोग अपनी मनचाहे ब्रांड के लिए इधर-उधर भटकते दिखाई पड़े. कुछ जगहों पर तो दुकान का पूरा माल ही बिक गया. चंद घंटों के अंदर ही शहर की अधिकांश दुकानें आउट ऑफ स्टॉक हो गईं. दोपहर होते-होते दुकानदारों को शटर गिराना पड़ा. 

शाम को जब इसकी बिक्री की आधिकारिक सूचना आई तो 4 करोड़ 73 लाख 84 हज़ार 330 रुपये की शराब बिक गई थी. इसमें देशी शराब 60 लाख 25 हज़ार 500 की, अंग्रेजी शराब 3 करोड़ 89 लाख 85 हज़ार 800 रुपये की और बीयर 23 लाख 73 हज़ार 30 रुपये की बिकी. ये शराब लगभग 88 हज़ार लोगों के जरिये खरीदी गई.  गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं एक जिले में शराब की इस बिक्री से पूरे प्रदेश में शराब बिक्री का अनुमान लगाया जा सकता है कि कितने करोड़ की शराब बिकी. वैसे भी उत्तर प्रदेश के शराब बिक्री के अर्थतंत्र को देखा जाए तो कुछ तथ्य सामने आते हैं.   

उत्तर प्रदेश में राजस्व का एक बड़ा स्त्रोत शराब बिक्री को माना जाता है. राज्य का 20 फीसदी राजस्व शराब बिक्री से ही आता है. जानकारी के अनुसार शराब बिक्री से यूपी सरकार को हर साल करीब 20000 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा होता है. सरकारी आंकड़े देखें तो 2018-19 के अप्रैल और मई महीने में सरकार को 4,558 करोड़ रुपये का राजस्व शराब बिक्री से मिला था. पिछले साल-अप्रैल में 2,372 करोड़ रुपये की शराब बिकी थी. मई में यह घटकर 2,187 करोड़ हो गई. 


 


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मुस्लिम जमात ने दी फुल बाड़ी सेनेटाइज मशीनें

कहानी सच्ची है


मुस्लिम जमात ने दी फुल बाड़ी सेनेटाइज मशीनें


 


भोपाल : गुरूवार, अप्रैल 16, 2020, 20:50 IST

बड़वानी में कोरोना वायरस संक्रमण की चैन तोड़ने के लिये मुस्लिम जमात ने 3 फुल सेनेटाइज फव्वारा चेम्बर मशीन जिला प्रशासन को भेंट की है। ये मशीन नगरपालिका परिसर, अस्पताल परिसर एवं थाना परिसर में लगाई गई हैं। इस मशीन से गुजरने वाले व्यक्ति के ऊपर कीटनाशक दवाईयों का स्वत: ही स्प्रे हो रहा है। इस प्रक्रिया में सम्पूर्ण शरीर एक साथ सेनेटाइज हो रहा है। मुस्लिम जमात के सदर श्री फरीद मंसूरी ने कहा कि हमने देश और समाज हित में सहयोग स्वरूप यह पहल की है।


मुकेश मोदी

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Narendra Modi speech on NAM Summit| कोरोना के बाद की दुनिया में हमें वैश्वीकरण की नई व्यवस्था की आवश्यकता होगी: PM मोदी

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नई दिल्‍ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि कोरोना वायरस संकट ने विश्व को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय प्रणाली की सीमाओं से परिचित करा दिया है और पारदर्शिता, समानता तथा मानवता पर आधारित वैश्वीकरण की एक नई व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित किया है. मोदी गुट निरपेक्ष (नैम) देशों के ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. यह करीब 120 विकासशील देशों का मंच है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि मानवता पिछले कई दशकों के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है और गुट निरपेक्ष आंदोलन (नैम) के सदस्य देश वैश्विक एकजुटता को प्रोत्साहित करने में सहायता कर सकते हैं क्योंकि वे विश्व की सबसे नैतिक आवाज हैं. उन्होंने कहा, ‘इस भूमिका को निभाने के लिए गुट निरपेक्ष देशों को समावेशी रहना होगा.’

किसी देश का नाम लिए बिना मोदी ने कहा, “आज जहां विश्व कोविड-19 से मुकाबला कर रहा है वहीं कुछ लोग दूसरे तरह के घातक विषाणु फैलाने में लगे हुए हैं. जैसे कि आतंकवाद. जैसे कि फर्जी खबरें और समुदायों और देशों को बांटने के लिए छेड़छाड़ कर तैयार किये गए वीडियो.”

मोदी ने कहा कि महामारी से मुकाबला करने के दौरान भारत ने यह दिखाया है कि लोकतंत्र, अनुशासन और निर्णायक क्षमता किस प्रकार एक साथ मिलकर सच्चे जनांदोलन का रूप ले लेते हैं. उन्होंने कहा कि मानवता एक बड़े संकट के दौर से गुजर रही है और इससे मुकाबला करने में गुट निरपेक्ष देश योगदान दे सकते हैं.

मोदी ने कहा, “मानवता कई दशकों के सबसे बड़े संकट से गुजर रही है. इस समय गुट निरपेक्ष देश वैश्विक एकजुटता को प्रोत्साहित करने में सहायक हो सकते हैं. गुट निरपेक्ष देश हमेशा विश्व का नैतिक स्वर रहे हैं और इस भूमिका को निभाने के लिए गुट निरपेक्ष देशों को समावेशी रहना होगा.”

इस वीडियो कान्फ्रेंस में एशिया, अफ्रीका, लातिन अमेरिका , कैरेबिया और यूरोप के सदस्य देशों के 30 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों और शासन प्रमुखों तथा अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया.

विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि मोदी ने नैम कॉन्टैक्ट ग्रुप के सम्मेलन में हिस्सा लिया और भारत के संस्थापक सदस्यों में शामिल होने के नाते इस संगठन के सिद्धांतों और मूल्यों के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोविड-19 के संकट को देखते हुए घरेलू जरूरतों के बावजूद भारत ने करीब 120 देशों को दवा की आपूर्ति की जिनमें 59 गुट निरपेक्ष देश शामिल हैं.

मोदी ने कहा,‘‘भारत की सभ्यता पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप मे देखती है. हम अपने नागरिकों की देखभाल करने के साथ ही अन्य देशों की ओर भी मदद का हाथ बढ़ा रहे है….भारत को दुनिया के औषधालय के तौर पर देखा जाता है, खासतौर पर किफायती दवाइयों के लिए.’’

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से उबरने के बाद दुनिया को वैश्वीकरण की एक नई व्यवस्था की आवश्यकता होगी.

प्रधानमंत्री ने कहा, “कोविड-19 ने हमें वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की सीमाओं से परिचित कराया है. कोविड-19 से उबरने के बाद के विश्व में हमें पारदर्शिता, समानता और मानवता पर आधारित वैश्वीकरण की नई व्यवस्था की आवश्यकता होगी.”

उन्होंने कहा, “हमें ऐसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की आवश्यकता है जो आज के विश्व का बेहतर ढंग से प्रतिनिधित्व कर सकें. हमें केवल आर्थिक उन्नति ही नहीं बल्कि मानव कल्याण को भी प्रोत्साहित करना है. भारत ने लंबे समय तक इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है.” इस सम्मेलन को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष तिज्जानी मोहम्मद बांदे, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस, अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष मूसा फाकी महामत, ईयू के उच्च प्रतिनिधि जोसेफ बोरेल आदि ने संबोधित किया.

सम्मेलन के बाद नेताओं ने एक घोषणा पत्र स्वीकार किया जिसमें कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की जरूरत को रेखांकित किया गया. विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेताओं ने सदस्य देशों की जरूरतों का पता लगाने के लिए ‘कार्य बल’ के गठन की घोषणा की.

(इनपुट: एजेंसी भाषा)

 




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दिल्ली: एपीजे स्कूल की दो ब्रांच सील, बच्चों से ज्यादा फीस वसूलने का आरोप – Two apeejay school branches at sheikh sarai saket were sealed today by govt of delhi

  • आम आदमी पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज ने दी जानकारी
  • ऑडिट में सरप्लस पूंजी के बावजूद फीस बढ़ा कर वसूली

दिल्ली के एपीजे स्‍कूल (APEEJAY school) की ओर से कई नियमों का उल्‍लंघन के करने के बाद दिल्‍ली सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए इसके दो ब्रांच को सील कर दिया. स्कूल पर आरोप है कि ऑडिट के दौरान खातों में करोड़ों रुपये का सरप्लस दिखाने के बावजूद अवैध रूप से बढ़ी हुई फीस बच्‍चों के माता-पिता से वसूला जा रही थी. स्‍कूल के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आम आदमी पार्टी विधायक सौरभ भारद्वाज ने कई ट्वीट करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया की तारीफ की है.

सौरभ भारद्वाज ने एक ट्वीट में कहा, एपीजे स्कूल के शेख सराय और साकेत ब्रांच को दिल्ली सरकार ने सील कर दिया है. यह कार्रवाई साउथ दिल्ली के जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग ने की है. यह वही स्कूल है जिसके खिलाफ दिल्ली विधानसभा की पीटिशन कमेटी ने रिपोर्ट दाखिल की थी.

सौरभ भारद्वाज ने कहा, एपीजे स्कूल शिक्षा प्रणाली के नियमों का उल्लंघन करता रहा है. इसके अकाउंट में करोड़ों रुपये सरप्लस दिखाए गए हैं, इसके बावजूद बच्चों के माता-पिता से फीस बढ़ाकर लिया जा रहा था. इसे देखते हुए दो ब्रांच सील कर दिए गए हैं. दिल्ली विधानसभा की पीटिशन कमेटी की जांच में यह बात सामने आई है कि स्कूल के ऑडिट में 30 करोड़ रुपये सरप्लस दिखाए गए हैं.

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लॉकडाउन में फीस बढ़ाकर उसे वसूलने के मामले में केजरीवाल सरकार ने एपीजे की दो शाखाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है. सरकार ने इसकी शेख सराय और साकेत शाखा को सील कर दिया है. यह कार्रवाई स्कूल के खिलाफ फीस को लेकर दिए गए शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के उल्लंघन करने पर की हुई है.

एपीजे स्‍कूल की दो ब्रांच को सील करने के बाद शिक्षा निदेशालय ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण जब लॉकडाउन है और आपातकाल की स्थिति है, ऐसे में स्कूल फीस वसूलने को लेकर बच्‍चों के माता-पिता पर दबाव बना रहा है, जो कि अमानवीय कृत्य है. स्कूल की ओर से फीस बढ़ाना निदेशालय के निर्देशों का सरासर उल्लंघन बताया गया है.

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