Pakistani imam used TikTok in France to propagate terror | France में पाकिस्तानी इमाम ने TikTok से फैलाए नफरती वीडियो, पहुंच गया जेल

पेरिस: फ्रांस ने सोशल मीडिया ऐप TikTok पर आतंकी मंसूबे जाहिर करने वाले पाकिस्तानी इमाम को जेल भेज दिया है. लुकमान हैदर (Luqman Haider) को 18 महीने जेल की सजा सुनाई गई है. इसके अलावा, फ्रांस सरकार हैदर को वापस उसके देश भेजने की भी तैयारी कर रही है.

2015 में आया था 
पाकिस्तानी इमाम (Pakistani Imam) हैदर 2015 में फ्रांस (France) आया था और वह पेरिस की एक मस्जिद में इमाम के रूप में काम करता था. उसने TikTok पर कुछ वीडियो पोस्ट किये थे, जिनमें आतंकी घटनाओं का समर्थन करते हुए गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाने की बात कही गई थी. पुलिस ने इन वीडियो के आधार पर हैदर को गिरफ्तार किया था.

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तीन वीडियो किये थे पोस्ट
पहले वीडियो में, लुकमान हैदर ने चार्ली हेब्दो कार्टून के बारे में बात करते हुए कहा था कि मुस्लिम पैगंबर के लिए बलिदान करने के लिए तैयार हैं. दूसरे वीडियो में उसने गैर-मुस्लिमों और इस्लाम में विश्वास न रखने वालों पर हमला करने और उन्हें नरक भेजने जैसी बातें कही थीं. जबकि 25 सितंबर को शेयर किये अपने तीसरे वीडियो में हैदर ने चार्ली हेब्दो के पूर्व कार्यालयों के बाहर हुई आतंकी घटना के लिए आतंकियों की तारीफ की थी.

जारी है कार्रवाई
पेरिस में एक स्कूल टीचर की हत्या के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने आतंकवाद को इस्लामिक आतंकवाद से जोड़ते हुए बयान दिया था. जिसके बाद उनके खिलाफ मुस्लिमों देशों में प्रदर्शन हुए, फ्रेंच उत्पादों के बहिष्कार के लिए अभियान भी चलाया गया. प्रदर्शन करने वालों में पाकिस्तान और तुर्की सबसे आगे रहे. हालांकि, ये बात अलग है कि फ्रांस पर इस विरोध का खास असर नहीं हुआ. फ्रांस अभी भी आतंकवाद का समर्थन करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठा रहा है.

जल्द होंगे कई और फैसले
फ्रांस सरकार ने विदेशी इमामों के देश आने से रोकने के लिए कई कदम उठाये हैं और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस संबंध में कई अन्य फैसले लेने पर भी विचार कर रहे हैं. मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 300 इमाम फ्रांस आते हैं. आतंकी घटनाओं के मद्देनजर फ्रांस उन सभी रास्तों को बंद करना चाहता है, जिसके माध्यम से दूसरे मुल्क के लोग फ्रांस आकार धर्म के नाम पर आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं. राष्ट्रपति ने इस बारे में एक बयान में कहा था कि दिक्कत तब होती है, जब मजहब के नाम पर लोग खुद को अलग समझने लगते हैं और देश के कानून का सम्मान नहीं करते.

 




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