Palestine to hold national election after 14 years| Palestine में 14 साल बाद होने जा रहे हैं राष्ट्रीय चुनाव, राष्ट्रपति Mahmoud Abbas ने दिए प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

रामल्ला: फिलिस्तीन (Palestine) 14 साल के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव कराने जा रहा है. इस साल होने वाले चुनावों में संसदीय, राष्ट्रपति और राष्ट्रीय परिषद के चुनाव शामिल हैं. फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास (Mahmoud Abbas) ने इस संबंध में एक डिक्री पर हस्ताक्षर किए हैं. जिसके अनुसार, संसदीय चुनाव 22 मई को आयोजित किए जाएंगे. जबकि राष्ट्रपति चुनाव के लिए 31 जुलाई और राष्ट्रीय परिषद चुनाव के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की गई है.

टूट गई थी शांति वार्ता  

नादोलु एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति महमूद अब्बास (Mahmoud Abbas) ने चुनाव समिति और राज्यों को निर्देश दिया कि वे सभी शहरों में एक लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया शुरू करें. बता दें कि इजरायल के वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार की वजह से 2014 में इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच शांति वार्ता प्रभावित हुई थी. 1967 के मध्य पूर्व युद्ध में इजरायल ने वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम को जब्त कर लिया था और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बावजूद उन्हें नियंत्रित करे रखा. जबकि फिलिस्तीनी इन जमीनों पर एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहते हैं.

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हमास को आतंकी मानता है Israel

चरमपंथी सुन्नी गुट हमास फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए सशस्त्र संघर्ष कर रहा है. इस गुट का गाजा पट्टी पर नियंत्रण है. इजरायल ने अभी तक फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य का दर्जा नहीं दिया है. इजरायल हमास को आतंकी संगठन मानता है और गाजा पट्टी से इजरायल पर होने वाले किसी भी हमले के लिए हमास को जिम्मेदार मानता है. पिछले साल दिसंबर में भी गाजा की तरफ से इजरायल पर रॉकेट से हमला किया गया था, जिसका इजरायल एयरफोर्स ने करारा जवाब दिया था. जवाबी कार्रवाई में रॉकेट बनाने की साइट, कई भूमिगत निर्माण और एक सैन्य पोस्ट ध्वस्त हो गई थी.

Mosque बंद करने को लेकर विवाद

वहीं, फिलिस्तीनी अधिकारियों ने दक्षिणी वेस्ट बैंक के हेब्रोन में स्थित प्राचीन इब्राहिमी मस्जिद को 10 दिनों के लिए बंद करने के इजरायल के फैसले की निंदा की है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक मामलों और इस्लामी संबंधों पर फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास के सलाहकार महमूद अल-हबाश ने कहा कि इजरायल द्वारा मस्जिद को बंद करना एक युद्ध अपराध है. अल-हबाश ने कहा कि मुस्लिम उपासकों को मस्जिद में नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाने से दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएं भड़क सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह अल-वक्फ विभाग में हस्तक्षेप है. वहीं, इजरायल का कहना है कि हेब्रोन में फैले कोरोना से निपटने के लिए एहतियाती उपायों के तहत मस्जिद को बंद किया गया है.

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