Passive smoking side effects – सेकेंड हैंड स्मोक से बच्चों को सबसे ज्यादा होता है इस बीमारी का खतरा

Edited By Somendra Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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वर्ल्ड टोबैको डे (World Tobacco Day) नजदीक आ रहा है। इसे देखते हुए लोगों को इसके बारे में जागरूक करना शुरू कर दिया गया है। इसी कड़ी में आगे बढ़ते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा कि सेकेंड हैंड स्मोक से बच्चों को बचाए रखने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास किए जाने चाहिए ताकि उन्हें कई प्रकार की भयंकर बीमारियों से बचाया जा सके। एक रिसर्च के अनुसार सेकेंड हैंड स्मोक बच्चों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होती है।

सेकेंड हैंड स्मोकिंग को पैसिव स्मोकिंग के नाम से भी जाना जाता है। आइए अब जानते हैं कि सेकेंड हैंड स्मोक बच्चों में किस प्रकार की बीमारी का सबसे ज्यादा खतरा बढ़ा देता है।

रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का खतरा


स्मोकिंग करने वाले लोगों को आपने अक्सर देखा होगा कि वह बच्चों के सामने ही स्मोकिंग करते रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय और कई प्रकार के सरकारी विज्ञापन में ऐसा न करने की सलाह दी जाती है। लोग ऐसी बातों पर खास ध्यान नहीं देते हैं और उनके बच्चों को भी अपने माता-पिता की खराब आदत का अंजाम भुगतना पड़ता है।

एक अध्ययन में आश्चर्य कर देने वाले खुलासे किए गए हैं कि स्मोकिंग करने के कारण बच्चों में 50 से 100% तक रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ी बीमारियां अगर बचपन में ही बच्चों को जकड़ लेंगी तो बढ़ती उम्र के साथ उन्हें श्वसन से जुड़ी हुई कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

क्या होती है रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ी बीमारी

रेस्पिरेट्री सिस्टम हमारे श्वसन तंत्र का एक पूरा तंत्र होता है जिससे हमारे शरीर में श्वसन प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययन इस बात का भी दावा करते हैं कि जो लोग सिगरेट नहीं पीते हैं, पैसिव स्मोकिंग के कारण उन्हें इसका और भी नुकसान उठाना पड़ता है।

यह सबसे ज्यादा गहरा प्रभाव बच्चों पर छोड़ता है और इसके कारण उन्हें रेस्पिरेट्री सिस्टम से जुड़ी कई प्रकार की बीमारियां जैसे दमा, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, एम्फीसीमा, फेफड़ों का कैंसर, सिस्टिक फाइब्रोसिस / ब्रोन्किइक्टेसिस, न्यूमोनिया, प्ल्युरल इफ्युजन का खतरा बच्चों में बढ़ जाता है।

इसलिए जो लोग स्मोकिंग करते हैं फिलहाल स्मोकिंग करने से बचें। खासकर अपनी खराब आदत की वजह से किसी बच्चे को इन बीमारियों का शिकार ना बनाएं। जब भी आप देखें कि आस-पास कोई बच्चा मौजूद है तो उस दौरान स्मोकिंग ना करें।


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