plasma therapy effect on corona patients: Plasma therapy in corona virus treatment is not predictable as effective

Edited By Garima Singh | नवभारत टाइम्स | Updated:

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प्लाज्मा थेरपी को लेकर पिछले दिनों काफी उत्साह का माहौल बना हुआ था। क्योंकि हेल्थ एक्सपर्ट्स को लग रहा था कि इस थेरपी के जरिए कोरोना संक्रमण का इलाज किया जा सकता है, जिससे इस संक्रमण के कारण होनेवाली मृत्युदर में कमी आएगी। लेकिन फिलहाल जिस तरह के परिणाम देखने को मिल रहे हैं, उन्हें देखकर तो इस बात की उम्मीद है कि यह थेरपी लोगों की जान बचाने में कारगर साबित हो रही है…

इस बात में कोई शक नहीं है कि प्लाज्मा थेरपी एक असरकारी तरीका है, जो कई तरह के रोगों से मुक्ति दिलाने में लाभकारी है। यह एक बड़ी वजह है कि इस थेरपी के जरिए कोरोना संक्रमितों को फिर से ठीक करने की और रिकवरी में तेजी लाने की उम्मीद लगातार बनी हुई है। लेकिन एम्स द्वारा किए गए एक परीक्षण में यह बात साबित नहीं होती दिखी है कि प्लाज्मा थेरपी कोरोना संक्रमितों में मृत्युदर रोकने में कारगर है।

हालही एम्स (AIIMS) द्वारा किए गए एक अंतरिम विश्लेषण में इस बात को जानने का प्रयास किया गया कि COVID-19 के रोगियों में मृत्युदर घटाने में प्लाज्मा थेरपी कितनी प्रभावी है। लेकिन इस परीक्षण के दौरान कोरोना संक्रमितों में मृत्यु दर के जोखिम को कम करने में कॉन्सवेसेंट प्लाज्मा थेरेपी का लाभ नहीं दिखा है।

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कोरोना संक्रमण का इलाज

क्या है प्लाज्मा थेरपी?

-प्लाज्मा थेरपी एक ऐसी चिकित्सा है, जिसमें किसी रोगी का उपचार करने के लिए उस व्यक्ति के शरीर से ऐंटिबॉडीज निकाली जाती हैं, जो पहले इस बीमारी से संक्रमित रहा हो और बाद में ठीक हो गया हो। इस स्थिति में ठीक हुए व्यक्ति के शरीर में वायरस को मारनेवाली ऐंटिबॉडीज विकसित हो जाती हैं।

-किसी अन्य रोगी की चिकित्सा के दौरान स्वस्थ हो चुके व्यक्ति के शरीर से इन ऐंटिबॉडीज को निकालकर रोगी के शरीर में ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। ताकि उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को जल्दी से मजबूत बनाया जा सके। यही तरीका कोरोना संक्रमण के रोगियों का इलाज करने में अपनाया जा रहा है।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?


-परीक्षण के दौरान रोगियों पर प्लाज्मा थेरपी का किस प्रकार का असर देखने को मिला, इस बारे में एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि 30 कोरोना संक्रमितों पर (Covid-19 Patients) किए गए परीक्षण के दौरान आक्षेपिक प्लाज्मा थेरेपी (convalescent plasma therapy ) का कोई स्पष्ट मृत्यु दर लाभ नहीं देखा गया। यानी परीक्षण के परिणामों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है कि प्लाज्मा थेरपी कोरोना संक्रमण के कारण मरनेवाले रोगियों की संख्या को कम करने में सहायक है।

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कोरोना संक्रमण और प्लाज्मा थेरपी का असर

-डॉक्टर गुलेरिया कहते हैं कि एम्स में किए गए इस परीक्षण के दौरान कोरोना संक्रमितों के ग्रुप को दो भागों में बांटा गया। पहले ग्रुप के लोगों को कान्वलेसन्ट प्लाज्मा थेरपी के साथ कोरोना का सहायक उपचार (Supportive Treatment) दिया गया। जबकि दूसरे ग्रुप को केवल स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट ही दिया गया।

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-उपचार के दौरान इन दोनों ही समूहों में मरनेवाले रोगियों की संख्या बराबर थी। साथ ही जिन्हें प्लाज्मा थेरपी दी गई थी उन रोगियों में दूसरे ग्रुप के रोगियों की तुलना में कोई चिकित्सकीय लाभ (Clinical Improvement) देखने को नहीं मिला। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉक्टर गुलेरिया कहते हैं कि हालांकि यह एक अंतरिम विश्लेषण था, इस दिशा में हमें काफी बड़े स्तर पर मूल्यांकन करने की आश्यकता है और देखना है कि क्या कोई अन्य सबग्रुप है, जिस पर प्लाज्मा थेरपी के परिणाम उम्मीद के अनुसार देखने को मिले हों। (पीटीआई इनपुट्स के साथ)


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