केन नदी में ‘चिता आंदोलन’: हजारों आदिवासियों का जल-सत्याग्रह, बोले—“न्याय दो या मौत दो”

छतरपुर: Ken River में Ken-Betwa Link Project के विरोध में आंदोलन अब उग्र और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रशासनिक सख्ती और धारा 163 लागू होने के बावजूद हजारों की संख्या में आदिवासी, किसान और महिलाएं छोटे बच्चों के साथ नदी के बीचों-बीच उतर आए हैं।प्रदर्शनकारियों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए पानी के बीच प्रतीकात्मक “चिताएं” बनाकर उन पर लेटकर जल-सत्याग्रह शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों का स्पष्ट संदेश है—“न्याय दो या मौत दो।”आंदोलन का नेतृत्व कर रहे Amit Bhatnagar ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा राशन-पानी रोकने, सीमाएं सील करने और आंदोलन को दबाने की कोशिश की जा रही है।

उनके अनुसार, पन्ना और छतरपुर जिलों के ग्रामीण एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और यह संघर्ष अब केवल मुआवजे तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि जल, जंगल और जमीन बचाने की निर्णायक लड़ाई बन चुका है।बताया जा रहा है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजे में गड़बड़ी को लेकर करीब 5 हजार किसान अपनी शिकायत लेकर दिल्ली जा रहे थे। इसी दौरान छतरपुर प्रशासन ने रास्ते में उन्हें रोक दिया।

किसानों का आरोप है कि उनके वाहनों को जब्त कर चालान किया गया, जिससे वे नाराज हो गए।गुस्साए किसान इसके बाद निर्माणाधीन डैम स्थल पर पहुंच गए और काम को ठप कर दिया। पिछले तीन दिनों से परियोजना का निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है, जिससे निर्माण कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान होने की बात सामने आ रही है।वहीं, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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बाइट (अमित भटनागर, जन किसान नेता)“प्रशासन दमन कर रहा है, हमारी आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। हम अपने हक के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे, चाहे जान ही क्यों न चली जाए।”

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