मझगांय बाँध क्षेत्र में बढ़ते जलस्तर के साथ ग्रामीणों के मकान जलमग्न हो रहे हैं और कई बस्तियाँ टापू में तब्दील हो चुकी हैं। विस्थापन और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने ‘जय किसान संगठन’ के बैनर तले वनहरीकला टपरिया में आज शनिवार 12 सितंबर को “चिता आंदोलन” को पुनः शुरू कर दिया है। इस प्रदर्शन में केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांय बाँध, रुंझ बाँध और ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन से प्रभावित किसान व आदिवासी परिवार एकजुट हुए हैं।
प्रशासनिक असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपआंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता व ‘जय किसान संगठन’ के नेता अमित भटनागर ने पन्ना जिला प्रशासन पर घोर असंवेदनशीलता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “सिर्फ गाँव और घर ही नहीं डूब रहे, बल्कि देश का संविधान और मानवता भी डूब रही है।” अमित भटनागर ने बताया कि निष्पक्ष मुआवजे की मांग करने वालों को परेशान किया जा रहा है और रिश्वतखोरी का बोलबाला है। लोकायुक्त द्वारा पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बावजूद पन्ना प्रशासन की कार्यशैली में सुधार नहीं आया है। उन्होंने छतरपुर प्रशासन द्वारा प्रभावितों की समस्याओं पर ध्यान देने की सराहना करते हुए पन्ना प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए।
“न्याय नहीं तो बाँध नहीं” — संसद तक पहुँचेगी आवाजअमित भटनागर ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने भी प्रभावितों को आश्वासन दिया है कि लोकसभा और राज्यसभा में विस्थापितों के हक की आवाज उठाई जाएगी। दिव्या अहिरवार और हिसाब राजपूत के साथ उन्होंने कहा कि जब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।कांग्रेस का मिला समर्थन, भारी संख्या में पहुंचे विस्थापित
आंदोलन स्थल पर जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष राकेश गर्क, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी शिवजीत सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश यादव, बाल करण यादव, कामता अहिरवार, चंद्रपाल सिंह, कमलेश गुप्ता और मैकू अहिरवार सहित कई नेताओं ने पहुंचकर समर्थन दिया। प्रदर्शन में मझगांय से मंगल यादव, दीपक द्विवेदी, गया प्रसाद कोंदर, कलावती आदिवासी, रुंझ बाँध से रामौतार कोंदर, श्याम कोंदर, रामस्वरूप पाल तथा रेल लाइन प्रभावित प्रमोद यादव व पूरन यादव समेत सैकड़ों विस्थापित शामिल हुए।


