Rahul Gandhi Did attend any meeting of standing committee on Defense so far – पड़ताल : रक्षा मामलों की संसदीय समिति की 11 बार हुई बैठक, क्या राहुल गांधी एक भी बार नहीं गए?

राहुल गांधी ने रक्षा मामलों की संसदीय समिति की बैठक में हिस्सा नहीं लिया : जेपी नड्डा

नई दिल्ली :

चीन से तनाव और लद्दाख में गलवान में घुसपैठ को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. लेकिन आज बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगा दिया है कि राहुल गांधी देश को लगातार हतोत्साहित और सेना की वीरता पर सवाल पर उठा रहे हैं लेकिन उन्होंने संसद की रक्षा मामलों की समिति की बैठक में कभी हिस्सा नहीं लिया है. जेपी नड्डा का यह आरोप कांग्रेस को बैकफुट पर लाने के लिए काफी है वह उस समय जब सरकार पर राहुल गांधी चीन के मुद्दे पर लगातार हमलावर हैं. जेपी नड्डा के आरोपों की पड़ताल के लिए जब लोकसभा की वेबसाइट में रक्षा मामलों की समिति और उसकी बैठकों की जानकारी खंगाली गई तो कई अहम जानकारी निकलकर सामने आई हैं. जिसमें रक्षा मामलों इस संसदीय समिति के अध्यक्ष ओडिशा से बीजेपी सांसद जुआल ओरम हैं. इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं. लोकसभा के सदस्यों की सूची में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का भी नाम है.  

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अब तक कितनी बार हो चुकी है बैठक

लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक रक्षा मामलों की इस संसदीय समिति की पहली बैठक 27 सितंबर 2019 को हुई थी और आखिरी बार यह समिति 12 मार्च 2020 को बैठी थी. तब से लेकर अब तक 11 बार इस समिति की बैठक हो चुकी है. 

राहुल गांधी कितनी बार हुए शामिल 
वेबसाइट में दी गई जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी  इन बैठकों में एक बार भी मौजूद नहीं रहे हैं. हालांकि इस समितिस की पहली बैठक में सबसे ज्यादा 20 सदस्य मौजूद थे. उसमें भी राहुल गांधी का नाम नहीं है. हालांकि किसी भी बैठक में कभी ऐसा नहीं हुआ है कि सभी सदस्य मौजूद रहे हो. 

समिति ने किया है अध्ययन टूर

इस समिति ने बीते साल 4 से 9 नवंबर के बीच गंगटोक, नाथुला दर्रा, गुवाहाटी, तवंगा, शिलांग आदि जगहों का दौरा किया है. इसमें भी राहुल गांधी का नाम नहीं है. 

क्या होती हैं संसदीय समितियां 

संसदीय समितियां एक तरह से मिनी संसद होती हैं. जिसमें लगभग सभी दलों के सदस्य जो चुनकर आते हैं,  शामिल होते हैं. इन संसदीय समितियों का काम संसद की विभिन्न मुद्दों में मदद करना होता है. जिस काम के लिए उनका गठन होता है उनके बारे में अपनी रिपोर्ट और सुझाव संसद को देती हैं.


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