Raigad News In Hindi : Raigarh News – chhattisgarh news stay in the house till lockdown sickness will be found outside living hard vegetables milk and medicine problems neighbors stumbling upon leaving home | लॉकडाउन तक घर में रहें, बाहर बीमारी ही मिलेगी, गुजारा कठिन सब्जी, दूध व दवा की दिक्कत, घर से निकलने पर टोक रहे पड़ोसी


विदेश और दूसरे कोरोना प्रभावित राज्यों से लौटे या संक्रमित लोगों के संपर्क में आए जिले के पांच हजार से अधिक लोग क्वारेंटाइन में हंै। इनमें से कई लोग घरों में आइसोलेट (अलग-थलग) हैं तो कुछ लोग प्रशासन द्वारा बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटरों में है‌ं। स्वास्थ्य विभाग ने पहले इन लोगों से 14 दिनों तक क्वारेंटाइन रहने के लिए कहा था, नए आदेश के बाद ये लोग 28 दिन तक अलग रहेंगे। इनके घर से बाहर निकलने पर प्रतिबंध है। जिस परिवार का सदस्य क्वारेंटाइन या आइसोलेट है उन्हें दूध, सब्जी, दवा और दूसरे जरूरी सामानों के लिए परेशान होना पड़ रहा है। दूसरे सदस्य भी घर से बाहर निकलते हैं तो लोग आपत्ति करते हैं। निगम या प्रशासन की तरफ से इन लोगों को कोई सहायता नहीं मिल रही है।

भास्कर ने शुक्रवार को दो ऐसे परिवारों से बात की जिनमें दो या अधिक सदस्य क्वारेंटाइन हैं। दोनों परिवार नहीं चाहते कि हम उनका नाम प्रकाशित ना करें, इसलिए हमने नाम बदल दिए हैं। जिनके संक्रमित होने की आशंका है उन्हें क्वारेंटाइन में रहना बहुत जरूरी है। हम क्वारेंटाइन में रहते लोगों की तकलीफ इसलिए बता रहे हैं ताकि आमलोग भी जान लें कि एडवायजरी की अनदेखी कितनी मुश्किलें पैदा कर सकती है। आप घर में सुरक्षित रहें, बाहर निकलना जरूरी भी हो तो सोशल डिस्टेंसिंग का 100 प्रतिशत पालन करें ताकि क्वारेंटाइन की जरूरत ही ना पड़े।

मिल्क पाउडर घोलकर बच्ची को पिला रहे, प|ी की डिलीवरी की चिंता

अंडमान में लॉकडाउन के बाद वहां पेट्रोल और दवाइयां भी नहीं मिल रही थीं। मैं अपनी गर्भवती प|ी और 13 माह की छोटी बच्ची को लेकर रायगढ़ आया। कोरोना संक्रमण को देखते हुए अपने स्वास्थ्य विभाग के साथियों से सलाह लेकर मैं और प|ी क्वारेंटाइन में चले गए। हम क्वारेंटाइन में हैं। नियम इतने कड़े हैं कि परिवार के दूसरे सदस्यों को भी नहीं निकलने दिया जा रहा है। घर के बाहर पोस्टर लगाया है। दूध वाला नहीं आता, मिल्क पाउडर घोल कर बच्ची को दूध पिलाना पड़ता है। घरेलू नौकरानी ने आना बंद कर दिया। घर में बच्ची और प|ी के साथ बजुर्ग माता-पिता का भी ध्यान रखना पड़ रहा है। 22 मार्च से आज (शुक्रवार) तक मुझे 13 दिन हो जाएंगे। गर्भवती प|ी की डिलीवरी का भी समय हो चुका है, हमेशा डर रहता था कि प|ी का क्या होगा, पुलिस सुबह और शाम आती थी। कई बार ऐसा लगता है कि आधी जिंदगी खत्म हो चुकी है। शनिवार (4 अप्रैल) को क्वारेंटाइन पूरा होगा। रविवार से ही मुझे और परिवार को राहत मिलेगी।

( जैसा डा. सुदेश ने भास्कर को बताया।)

किट नहीं होने के कारण परिवार के सभी लोगों की जांच नहीं हुई

23 मार्च को मां के घुटने के ऑपरेशन के बाद हम लोग अहमदाबाद से लौटे। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस को सूचना मिली तो उन्होंने मेरे माता-पिता का सैंपल लिया, रिपोर्ट निगेटिव आई। मेरी प|ी और बच्चों का टेस्ट करने के लिए कहने पर स्वास्थ्य कर्मचारी बोले, किट नहीं है। हमें क्वारेंटाइन में जाने के लिए कह दिया गया। 14 दिन के लिए घर को एक तरह सील कर दिया गया। क्वारेंटाइन का पोस्टर देखकर घर में काम करने वाली नौकरानी ने आना बंद कर दिया। सब्जी या दवाइयां मंगवाने के लिए भी दोस्तों की मदद लेनी पड़ती है। एक-दो बार दूध लेने घर से बाहर निकले तो पड़ोसियों ने पुलिस और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से हमारी शिकायत कर दी। अब घर के दरवाजे से बाहर नहीं निकलने देते हैं। मुझे अब 28 दिनों तक क्वारेंटाइन में रहने के लिए कहा गया है। बड़ी कठिनाई से समय गुजर रहा है।

( जैसा संदेश ने भास्कर को बताया)

परिवार क्वारेंटाइन इसलिए बुजुर्गों को दिक्कत। क्वारेंटाइन में गए लोगों के घर के बाहर सन्नाटा।

दो मैरिज गार्डन में तैयारी पूरी लेकिन यहां अब तक कोई क्वारेंटाइन नहीं

जिले में कोरोनो संक्रमित या संदिग्धों मरीजों को क्वारेंटाइन करने के लिए प्रशासन ने जलसा, इडेन गार्डन और बंशीवट को अधिग्रहित कर इंतजाम किए। जलसा में स्वास्थ्य विभाग के तीन लैब टेक्निशियन रखे गए हैं ताकि इनके घर जाने से परिजन संक्रमित ना हो जाएं। यहां अब तक किसी को क्वारेंटाइन के लिए यहां भेजा नहीं गया है। इडेन गार्डन में इंतजाम हैं लेकिन को संदिग्ध या स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी नहीं है।

6 संदिग्ध बंशीवट क्वारेंटाइन सेंटर में

प्रशासन द्वारा बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर बंशीवट में अजमेर व दिल्ली से लौटे 6 संदिग्धों को रखा गया है। सभी को अलग-अलग कमरों में रखा गया है, इनकी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। बंशीवट में लोगों के आने-जाने पर सावधानी नहीं बरती जा रही है। छह संदिग्धों के होने के बावजूद बंशीवट में ना तो पुलिस की चौकसी है और ना ही स्वास्थ्य विभाग या निगम का कोई कर्मचारी तैनात है। बाहर कर्मचारियों का मोबाइल नंबर चस्पा कर दिया गया है। कुछ जगहों पर क्वारेंटाइन से भागने के मामले सामने आए हैं इसलिए निगरानी जरूरी है।


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here