Scientists discovered skeletons of this giant animal roaming 10,000 years ago| वैज्ञानिकों ने खोज निकाला 10,000 साल पहले घूमने वाले इस विशालकाय जानवर के कंकाल

सर्बियाः रूसी वैज्ञानिकों (Russian scientists) ने करीब 10 हजार साल पहले धरती पर भ्रमण करने वाले woolly mammoth (हाथी की तरह दिखने वाला विशायलकाय जानवर) की 80 फीसदी हड्डियों को संरक्षित करने में सफलता हासिल की है. सेंटर ऑफ आर्कटिक रिसर्च दिमित्री फ्रोलोव ( Dmitry Frolov) के निदेशक  ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को सोमवार (3 अगस्त) को बताया कि रूस के वैज्ञानिकों ने 10,000 साल पहले पृथ्वी पर घूमने वाले वुली मैमथ की हड्डियों संरक्षित किया है. यह कोई साधारण कार्य नहीं था लिहाजा यह रूसी वैज्ञानिकों की एक बड़ी उपलब्धि है. 

वैज्ञानिकों ने वुली मैमथ (Mammuthus primigenius) की खोपड़ी का हिस्सा, कई पसलियों (ribs) और फोरलेग (foreleg bones) की ऐसी हड्डियों को संरक्षित किया है जो मैमथ के कुछ नरम ऊतक से अभी भी जुड़ी हुई हैं. इन हड्डियों  जुलाई में रूस के रिमोट एरिया यमल प्रायद्वीप (Yamal peninsula) के ऊपर आर्कटिक सर्कल ( Arctic circle) से  स्थानीय निवासियों द्वारा प्राप्त किया गया था. सेंटर ऑफ आर्कटिक रिसर्च दिमित्री फ्रोलोव ने बताया कि अब तक शोधकर्ता इस विशालकाय जानवर के दांतों (Tusk) को नहीं खोज पाए, हो सकता है यह लंबे समय के लिए खो गए हों.  

वैज्ञानिक केंद्र आर्कटिक अध्ययन के निदेशक दिमित्री फ्रोलोव ( Dmitry Frolov) ने कहा कि, मैमथ के अवशेष कम से कम 10,000 वर्ष पुराना है, हालांकि शोधकर्ताओं को अभी तक यह नहीं पता है कि यह पृथ्वी पर कब चला था या इसकी मृत्यु कितनी पुरानी थी. बता दें कि हाल ही में रूस के साइबेरिया में यमल प्रायद्वीप पर नव-खोजा गया कंकाल मिला था. वेस्ट साइबेरियाई झील के पास एक विशालकाय जानवर का ढांचा मिलने के बाद रूस की सरकार ने एक प्रेस नोट जारी कर बताया था कि, येल्लो-नेनेट्स क्षेत्र के सेयाख गांव से लगभग 16 मील दूर पेचेवालेवेटो झील के उथले पानी में हड्डियों के टुकड़े पाए गए थे. 

इट पर आने वाले रूसी वैज्ञानिकों को बाद में एक दर्जन से अधिक पसलियों, फाल्गन्स और एक पैल्विक हड्डी मिली थीं. इस कंकाल के हड्डी के बड़े टुकड़ों को गाद से बाहर निकला गया था. माना जाता है कि यह एक वयस्क ऊनी मैमथ था, जिसकी किस्म लगभग 4,000 साल पहले पृथ्वी से विलुप्त हो चुकी थी. इस विशालकाय ढांचे के मिलने के बाद सरकार ने खुदाई के आदेश दे दिये हैं. तब से यहां वैज्ञानिक किसी न किसी के अवशेष संरक्षित कर रहे हैं. 




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