नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनवाई करेगा। यह याचिका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दाखिल की गई है, जिसमें उन्होंने राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया को मनमाना, अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक बताते हुए इसकी वैधता को चुनौती दी है।
ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया की आड़ में बंगाल में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई जीवित लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
याचिका में कहा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाना चुनावी अधिकारों का हनन है और इससे आगामी चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। ममता बनर्जी का कहना है कि बिना पारदर्शी प्रक्रिया और पर्याप्त सत्यापन के इस तरह की कार्रवाई लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
इस मामले को राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनाव से पहले मतदाता सूची में हेरफेर के लिए किया जा रहा है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से अब तक इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।
अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि SIR प्रक्रिया पर रोक लगेगी या नहीं और इस पूरे मामले में आगे क्या दिशा तय की जाएगी। इस फैसले का असर न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि देश की चुनावी प्रक्रिया पर भी दूरगामी हो सकता है।


