18 महीने से जेल में बंद आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, पुणे पोर्श कार केस में नियमित जमानत मंजूर

पुणे के बहुचर्चित पोर्श कार हादसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी आदित्य अविनाश सूद समेत अन्य आरोपियों को नियमित जमानत दे दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आरोपी पिछले करीब 18 महीनों से जेल में बंद हैं और ट्रायल में अभी समय लग सकता है, ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना उचितUIJ है।

यह मामला पुणे में हुए एक सनसनीखेज सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें तेज रफ्तार पोर्श कार की टक्कर से लोगों की मौत हो गई थी। इस केस में कुल 10 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिनमें आदित्य अविनाश सूद को मुख्य आरोपी माना गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि लंबे समय तक विचाराधीन कैद न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी करीब डेढ़ साल से अधिक समय से जेल में हैं और अभी तक मुकदमे का निपटारा नहीं हो पाया है। इसी आधार पर अदालत ने आदित्य सूद के साथ-साथ आशीष मित्तल और अमर गायकवाड़ को भी जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी लगाई हैं, ताकि जांच और ट्रायल की प्रक्रिया प्रभावित न हो। अदालत ने कहा कि आरोपी न तो सबूतों से छेड़छाड़ करेंगे और न ही गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे।इस फैसले के बाद मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जहां एक ओर आरोपियों के परिजन और समर्थक इसे न्यायिक राहत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पीड़ित पक्ष ने फैसले पर नाराजगी जाहिर की है।

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