मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अमानगंज बफर रेंज से महज सात दिन पहले रेस्क्यू किए गए एक दो वर्षीय नर बाघ का शव आज मंगलवार 5 मई को रामपुरा बीट के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मिला है।
चौंकाने वाली बात यह है कि वन्यप्राणी चिकित्सकों ने 26 अप्रैल को ही इस बाघ को ‘पूरी तरह स्वस्थ’ घोषित कर रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा था। विभाग 24 घंटे रेडियो कॉलर मॉनिटरिंग का दावा कर रहा था, फिर भी बाघ की मौत की भनक समय रहते क्यों नहीं लगी? एक हफ्ते पहले फिट घोषित बाघ की अचानक मौत ने मेडिकल जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
बतादें कि हाल ही में गंगऊ में भी एक बाघ का कंकाल मिला था, जिससे सुरक्षा तंत्र की विफलता उजागर होती है। क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव के अनुसार, शव सुरक्षित है और पोस्टमार्टम के बाद ही मौत का सही कारण स्पष्ट होगा। बहरहाल, इस घटना ने स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी रोष पैदा कर दिया है।
बाईट :-1 बृजेन्द्र श्रीवास्तव (क्षेत्र संचालक पीटीआर)