-आयुर्वेद एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। इसमें शकरकंद को मधुमेह के रोगियों के लिए लाभकारी बताया गया है। वहीं, एनसीबीआई यूएस स्थित के मेडिसिन लैबोरेट्री है। इसे नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नॉलजी इंफॉर्मेशन (NCBI)के नाम से जाना जाता है।
फ्लेवोनॉइड्स करते हैं ग्लूकोज को नियंत्रित
-एनसीबीआई ने अपने एक रिसर्च पेपर में कहा है कि शकरकंद में पाए जानेवाले फ्लेवोनॉइड्स रक्त में ग्लूकोज के स्तर को नहीं बढ़ने देते हैं। शकरकंद जमीन के अंदर पैदा होता है, इस कारण इसमें पृथ्वी से प्राप्त होनेवाले धातु तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये गुण ही इसे कई तरह को रोगों को दूर करने की दवा भी बनाते हैं।
-आयुर्वेद के अनुसार रोगियों का इलाज करनेवाले चिकित्सकों का मानना है कि शकरकंद का सेवन शरीर में इंसुलिन के स्तर को सही बनाए रखता है। इससे रक्त में ग्लूकोज की मात्रा हानिकारक स्तर पर नहीं पहुंच पाती है। इसीलिए शकरकंद शुगर के पेशंट्स भी आराम से खा सकते हैं। 17 से 23 नवंबर, इन 7 दिनों में पिए ये 7 अलग-अलग जूस, कारण भी जानें
शकरकंद खाने के फायदे
इन लोगों को नहीं खानी चाहिए
-जिन लोगों को किडनी स्टोन की समस्या हो या जिनकी पित्त की थैली में कोई परेशानी हो, उन्हें शकरकंद का उपयोग नहीं करना चाहिए। यदि आप शकरकंद खाना चाहें तो पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से अपनी स्थिति के बारे में बात करें।
-जिन लोगों का पेट अक्सर खराब रहता है और लिवर की समस्या से ग्रसित हों, उन्हें शकरकंद नहीं खाना चाहिए। आप अपनी बीमारी ठीक होने के बाद इसका उपयोग शुरू करेंगे तो यह आपको लाभ देगी अन्यथा बीमारी के दौरान खाने पर यह आपकी समस्या बढ़ा देगी। आपको पेट दर्द और लूज मोशन की शिकायत हो सकती है।
-शकरकंद में प्राकृतिक शुगर होती है, जिसे मैनिटोल कहा जाता है। कुछ लोग मैनिटोल के प्रति बहुत अधिक संवेदनशील होते हैं। यानी उन्हें इससे एलर्जी होती है। यदि आपको मैनिटोल से एलर्जी की समस्या है शकरकंद खाने से आपकी दिक्कत बढ़ सकती है। शरीर पर नहीं होगा प्रदूषण का बुरा असर, डॉक्टर ने बताए इस समस्या से निपटने के तरीके
शकरकंद से नहीं बढ़ता मोटापा, जानें कारण
मोटापा नहीं बढ़ाती
-शकरकंद में प्राकृतिक मिठास होती है। इस कारण आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि क्या शकरकंद खाने वजन बढ़ता है? तो आपको बता दें कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। क्योंकि शकरकंद का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 44 है।
– लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि यदि आप शकरकंद को बहुत अधिक पकाते हैं तो इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपने आप बढ़ जाता है। इस स्थिति में 94 तक पहुंच जाता है। इसलिए शकरकंद को 20 मिनट तक पकाने के बाद आप उपयोग कर सकते हैं।
30 मिनट से ज्यादा बिल्कुल ना पकाएं
-शकरकंद में नैचरली पानी की अधिकता होती है रेशे बहुत अधिक होते हैं इस कारण यह 10 से 15 मिनट में आराम से उबल जाती है। यदि आप और भी अधिक उबालना चाहें तो 20 मिनट काफी होते हैं। इस तरह आपको कोई जरूरत नहीं है कि आप शकरकंद को बहुत अधिक पकाएं। ध्यान रखें किसी भी स्थिति में आपको 30 मिनट से ज्यादा इसे गर्म नहीं करना है अन्यथा इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बढ़ सकता है। खुद एक्सपर्ट बता रहे हैं, गंभीर से गंभीर रोग को दूर रखने के आयुर्वेदिक नियम
डायबिटीज नहीं बढ़ाती शकरकंद
ऐंटिऑक्सीडेंट्स से भरपूर
-जैसा कि आप जानते हैं कि शकरकंद जमी के अंदर उगता है, इस कारण इसमें मैग्निशियम और पोटैशियम की अच्छी मात्रा उपलब्ध होती है। इनके अतिरिक्त विटमिन-सी भी शकरकंद का एक प्राकृतिक गुण है। ये सभी खूबियां मिलकर शकरकंद को स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा भोज्य पदार्थ बनाती हैं।
-ये सभी तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करते हैं। इससे मौसम बदलने के कारण होनेवाली बीमारियां और संक्रमण शरीर को बहुत नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। इसलिए यदि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है तो आपको सर्दियों के मौसम में शकरकंद का उपयोग अवश्य करना चाहिए। एक्स्ट्रा फैट पिघलाने के लिए हर दिन अपनाएं ये घरेलू तरीके
पेट की गड़बड़ियों को दूर करे
-स्वीट पोटैटो यानी शकरकंद में विटमिन-बी कॉम्प्लेक्स, बीटा कैरोटीन, मैग्निशियम और जिंक जैसे तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व आपके पाचनतंत्र को सही बनाए रखने का कार्य करते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि जब पाचन पहले से खराब हो तब आपको इसका सेवन नहीं करना है। लड़के और लड़कियों की ये चाहत पूरी करती है चिरौंजी, रेडिऐंट ग्लो पाने का बेस्ट तरीका
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