बुंदेलखंड की सबसे महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना, जिसका शिलान्यास प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा किया गया था और जिसकी लागत करीब 44 हजार करोड़ रुपये है, इन दिनों गंभीर विवादों में घिर गई है। परियोजना से प्रभावित दो दर्जन से अधिक गांवों के आदिवासी पिछले 6 दिनों से ‘चिता आंदोलन’ कर विरोध जता रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग केन नदी के बीच चिताएं बनाकर लेट गए हैं, जिससे हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
आंदोलन की जड़ में मुआवजा वितरण में कथित विसंगतियां हैं। प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने न तो उन्हें सही जानकारी दी और न ही सर्वे प्रक्रिया पारदर्शी रही। कई पात्र लोगों के नाम सूची से बाहर रह गए हैं, जबकि जिन्हें मुआवजा मिला भी है, वह पर्याप्त नहीं है।
इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यह अब सिर्फ मुआवजे की लड़ाई नहीं, बल्कि “जन संघर्ष” बन चुका है। उन्होंने साफ कहा कि यदि आंदोलन को दबाने या दमन करने की कोशिश की गई, तो स्थिति और उग्र हो सकती है। जब तक विस्थापितों को पूरा न्याय नहीं मिलता, यह आंदोलन जारी रहेगा।आदिवासियों का कहना है कि प्रशासन उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है और उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। उनका यह भी आरोप है कि उन्हें परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी से दूर रखा गया और सर्वे में भारी अनियमितताएं हुई हैं।
इस विरोध के चलते पिछले 6 दिनों से केन-बेतवा लिंक परियोजना का काम पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है, जिससे सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना पर भी असर पड़ रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच यह टकराव कब और कैसे सुलझता है।