भारत और नेपाल के बीच हाल के दिनों में रिश्तों में आई गर्मजोशी अब तनाव में बदलती नजर आ रही है। नेपाल में फरवरी में हुए चुनाव और मार्च में बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे को सकारात्मक संदेश दिए थे। माना जा रहा था कि नई सरकार के साथ द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे, लेकिन कुछ ही समय में कई मुद्दों पर मतभेद उभरकर सामने आ गए।
दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद लिपुलेख सीमा मुद्दे को लेकर है। इसके अलावा व्यापारिक मामलों और राजनयिक गतिविधियों को लेकर भी तनातनी बढ़ गई है। भारत ने अपने कुछ अधिकारियों की नेपाल यात्रा टाल दी है, वहीं नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की संभावित भारत यात्रा भी फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
नेपाल के मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भारत की ओर से विदेश सचिव की यात्रा टाले जाने से काठमांडू में नाराजगी देखी जा रही है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने भी इस फैसले पर असंतोष जताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई दोनों देशों के रिश्तों के लिए अच्छा संदेश नहीं देती।
इसी बीच 14 और 15 मई को भारत में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के शामिल होने की चर्चा थी, लेकिन उनका दौरा नहीं हो सका। इन घटनाक्रमों को दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।


