बैतूल। खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए निकले बैतूल जिले के श्रद्धालुओं की राजस्थान में हुई सड़क दुर्घटना ने कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के शव जब रविवार को उनके गांव पहुंचे, तो हर तरफ गम का माहौल था। कहीं पिता और बेटी का एक साथ अंतिम संस्कार हुआ, तो कहीं पति-पत्नी को एक ही चिता पर विदाई दी गई। हादसे में जान गंवाने वाली शिक्षिका को भी ग्रामीणों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।मुलताई क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में रविवार को अंतिम संस्कार के दौरान बेहद भावुक दृश्य देखने को मिले। जिन परिवारों में धार्मिक यात्रा से लौटने वाले अपनों का इंतजार था, वहां एक साथ कई अर्थियां उठीं। हादसे की खबर से पहले ही सदमे में आए परिजनों के लिए अपनों को अंतिम विदाई देना बेहद कठिन पल रहा।मुलताई क्षेत्र के खेड़ी रामोसी गांव में कृष्ण राव घोड़की और उनकी बेटी त्रिशा की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दोनों खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए राजस्थान गए थे, लेकिन सड़क हादसे में उनकी जान चली गई। कृष्ण राव सहकारी बैंक में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे, जबकि त्रिशा पढ़ाई कर रही थी।रविवार को जब पिता और बेटी के पार्थिव शरीर गांव पहुंचे, तो माहौल गमगीन हो गया। पिता के साथ बेटी की अर्थी उठते देख ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। जिस परिवार ने दर्शन से लौटने पर उनका स्वागत करने की उम्मीद की थी, उसी परिवार को दोनों को एक साथ अंतिम विदाई देनी पड़ी। गांव में पिता और बेटी का अंतिम संस्कार किया गया।हादसे ने मुलताई क्षेत्र के सिरखेड़ गांव के एक परिवार को भी गहरे दुख में डाल दिया। यहां के 68 वर्षीय राजकुमार बोड़खे और उनकी 55 वर्षीय पत्नी अनीता बोड़खे की भी दुर्घटना में मौत हो गई।रविवार को दोनों के पार्थिव शरीर गांव पहुंचे तो शोक में डूबे परिजन और ग्रामीण अंतिम विदाई देने के लिए जुटे। एक ही घर से पति-पत्नी की अर्थियां निकलने का दृश्य हर किसी को भावुक कर गया। सबसे कठिन पल उनके इकलौते बेटे के लिए रहा, जिसे एक साथ अपने माता-पिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया।राजस्थान हादसे में घाट बिरोली गांव की शिक्षिका अरुणाताई झरबड़े की भी जान चली गई। उनके निधन की खबर से गांव में शोक छा गया। जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो परिजन, ग्रामीण और उन्हें जानने वाले लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।नम आंखों से लोगों ने शिक्षिका को विदाई दी। वर्धा नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। गांव के लोगों के लिए यह क्षति बेहद दुखद रही।इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले ओम सूर्यवंशी और वैष्णवी गावंडे का भी उनके गांवों में अंतिम संस्कार किया गया। हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों के बीच शोक का माहौल बना हुआ है।खाटू श्याम बाबा के दर्शन की उम्मीद लेकर निकले श्रद्धालुओं का सफर कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दुख बन गया। बैतूल जिले के गांवों में रविवार को हुई अंतिम विदाई ने इस हादसे की पीड़ा को और गहरा कर दिया।


