बागेश्वर धाम में आयोजित सप्तम कन्या विवाह महा महोत्सव के अंतर्गत चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के द्वितीय दिवस भक्तिभाव और आध्यात्मिक संदेशों से सराबोर रहा। कथा व्यास बागेश्वर धाम पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान वस्तुओं के अर्पण से नहीं, बल्कि स्वयं के समर्पण से प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन नारियल की तरह होना चाहिए—ऊपर से भले ही कठोर दिखे, लेकिन भीतर से कोमल और करुणामय हो।
द्वितीय दिवस की कथा में मलूक पीठ से गंगादास जी महाराज, इंदौर से रामगोपाल दास जी महाराज एवं अयोध्या धाम से नवल किशोर दास महाराज विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी संतों ने अपने आशीर्वचनों से कथा प्रेमियों को भाव-विभोर किया।
पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि 6 फरवरी से 12 फरवरी तक चल रहे दस दिवसीय कन्या विवाह महोत्सव के दौरान श्रीमद् भागवत कथा की रसधारा निरंतर बह रही है। कथा के दूसरे दिन उन्होंने भगवान को पाने के सरल उपाय बताते हुए कहा कि जो भक्त सच्चे भाव और श्रद्धा के साथ कथा श्रवण करता है, उस पर भगवान की कृपा अवश्य होती है। श्रद्धा यदि प्रबल हो, तो भगवान को प्रकट होना ही पड़ता है—जैसे भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति से खंभे में भगवान नृसिंह प्रकट हुए।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि भगवान से भौतिक वस्तुएं मांगने के बजाय, श्रद्धा के साथ देने वाले स्वयं भगवान को ही मांग लें, तो जीवन की सारी मनोकामनाएं स्वतः पूर्ण हो जाती हैं। कथा श्रवण से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और जीते-जी जीवन स्वर्ग समान बन जाता है।भगवान नारायण का प्रसाद है श्रीमद् भागवत महापुराण: चिन्मयानंद बापूप्रख्यात कथा व्यास चिन्मयानंद बापू ने बागेश्वर धाम पहुंचकर बालाजी के दर्शन किए और श्रीमद् भागवत महापुराण यज्ञ में सहभागिता की। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत महापुराण स्वयं भगवान नारायण का प्रसाद है, जैसे रामकथा भगवान शिव का प्रसाद मानी जाती है।
बापू ने बागेश्वर महाराज द्वारा किए जा रहे अन्नपूर्णा यज्ञ, कन्या विवाह यज्ञ और श्रीमद् भागवत महापुराण यज्ञ जैसे लोककल्याणकारी कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भगवान उन्हें इसी तरह समर्थ और प्रेरित बनाए रखें।धार्मिक स्थलों से बसें गरीब बेटियों के घर: पं. धीरेंद्र शास्त्रीशनिवार को बागेश्वर धाम में यूट्यूबर्स एवं सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स के साथ पं. धीरेंद्र शास्त्री का संवाद भी हुआ। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए यह संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचना चाहिए कि धार्मिक स्थलों के माध्यम से गरीब बेटियों का घर बसाया जाए। यदि कोई साधु दान स्वीकार करता है, तो वह केवल दान नहीं, बल्कि गरीब बेटियों को नया जीवन देने का कार्य भी कर रहा होता है।
उन्होंने संतों पर गलत टिप्पणी करने वालों को सशक्त और तथ्यपूर्ण जवाब देने की बात कही। साथ ही भावुक शब्दों में कहा कि जिस बेटी को बालाजी ने चुन लिया, वह न तो अनाथ रहती है और न ही गरीब—बालाजी का आशीर्वाद मिलते ही वह आत्मसम्मान, सुरक्षा और समृद्धि से भर जाती है।


