सांदीपनि विद्यालय में प्राचार्य पद पर खींचतान, तीन बार बदला प्रभार; विद्यार्थियों की पढ़ाई पर उठे सवाल

मुरैना। पहाड़गढ़ स्थित सांदीपनि विद्यालय में प्राचार्य के प्रभार को लेकर जारी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व प्राचार्य एम.एल. पवैया के स्थानांतरण के बाद से अब तक तीन बार प्राचार्य का प्रभार बदले जाने की बात सामने आई है। लगातार बदलते प्रभार के बीच विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में स्थिरता के अभाव का असर बच्चों के भविष्य पर पड़ सकता है।प्राचार्य के प्रभार को लेकर क्या है पूरा मामला?प्राप्त जानकारी के अनुसार, एम.एल. पवैया के स्थानांतरण के बाद रवि कुमार शाक्य को प्रभारी प्राचार्य बनाया गया था। इस नियुक्ति को लेकर शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचीं। इसके बाद प्राचार्य के प्रभार को लेकर नए आदेश जारी होने का सिलसिला शुरू हो गया।

बताया गया है कि 3 सितंबर 2026 को रुचि धाकड़ के नाम प्राचार्य का प्रभार सौंपने संबंधी आदेश जारी हुआ और 16 सितंबर 2026 को उन्होंने प्रभार ग्रहण किया। इसके बाद अक्टूबर 2026 में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मुरैना की ओर से केतकी कौरव को प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपने संबंधी एक अन्य आदेश जारी होने की जानकारी सामने आई है।लगातार बदलते आदेशों के चलते विद्यालय में प्राचार्य पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, पूरे मामले में संबंधित आदेशों, नियमों और अधिकारियों के पक्ष की आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है।

बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा प्रभार की चर्चा?ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में प्राचार्य के प्रभार को लेकर लगातार चल रही चर्चाओं से शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि विद्यालय में प्राथमिकता बच्चों की पढ़ाई, शिक्षकों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों और शिक्षा की गुणवत्ता को मिलनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में प्राचार्य पद को लेकर अनिश्चितता चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है।

अभिभावकों और ग्रामीणों की चिंता है कि यदि विद्यालय में प्रशासनिक स्थिरता नहीं रही, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि विद्यालय किसी राजनीतिक खींचतान का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को संवारने का स्थान होना चाहिए।

कलेक्टर से स्थायी प्राचार्य नियुक्त करने की मांगग्रामीण जनता ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी संबंधित आदेशों और नियमों की जांच कर नियमानुसार स्थायी प्राचार्य की व्यवस्था की जाए, ताकि विद्यालय में प्रशासनिक असमंजस समाप्त हो और पढ़ाई का माहौल बेहतर बनाया जा सके।

अब सवाल यह है कि सांदीपनि विद्यालय में प्राचार्य के प्रभार को लेकर जारी असमंजस कब समाप्त होगा? क्या शिक्षा विभाग इस मामले में स्पष्ट निर्णय लेकर विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्राथमिकता देगा?

ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है—प्राचार्य पद की खींचतान समाप्त हो, विद्यालय में स्थिर शैक्षणिक व्यवस्था बने और छात्र-छात्राओं का भविष्य किसी भी प्रशासनिक विवाद से प्रभावित न हो।

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