छतरपुर/पन्ना: बारिश में भीगते हुए भी जारी ‘चिता आंदोलन’ के साथ मिट्टी सत्याग्रह भी शुरू,अमित भटनागर का आमरण अनशन का दूसरा दिन :केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी जैसी विभिन्न विकास परियोजनाओं से विस्थापित हुए ग्रामीणों का ‘चिता आंदोलन’अपने पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है। ‘न्याय दो या मार दो’ के नारों के साथ जय किसान संगठन के बैनर तले जारी इस आंदोलन ने अब उग्र रूप ले लिया है। लगातार हो रही भारी बारिश के बावजूद आदिवासी महिलाओं और पुरुषों का जज्बा कम नहीं हुआ है और वे आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं।• आमरण अनशन और मिट्टी सत्याग्रह की शुरुआतआंदोलन को नई धार देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता *अमित भटनागर* ने प्रभावितों को न्याय दिलाने और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर आमरण अनशन का आज दूसरा दिन है। इसके साथ ही, आज से आंदोलनकारियों ने ‘मिट्टी सत्याग्रह’ का भी आगाज कर दिया है।अमित भटनागर ने प्रशासन के रवैये पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:> “प्रभावितों को न्याय देने के बजाय प्रशासन उन्हें डराने और धमकाने का काम कर रहा है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है। जब तक वास्तविक प्रभावितों को उनका हक नहीं मिलता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।”प्रशासन के साथ तीखी बहस:आज जब प्रशासन के अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने प्रभावितों को डराने की कोशिश की, जिसके बाद अधिकारियों और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी कार्यालयों में हर कार्य के लिए रिश्वत की मांग की जाती है और उनकी आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है। प्रमुख मांगेंआंदोलनकारियों ने सरकार और जिला प्रशासन के समक्ष अपनी निम्नलिखित मांगें मजबूती से रखी हैं- • न्यायपूर्ण मुआवजा और पुनर्वास: सभी विस्थापित परिवारों को उनकी भूमि और घर का उचित मुआवजा दिया जाए। •निष्पक्ष जांच: विभिन्न परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच हो।• दोषियों पर कार्रवाई भ्रष्टाचार- के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा जाए।• उत्पीड़न बंद हो – विस्थापितों को डराने-धमकाने का सिलसिला तुरंत रोका जाए।आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए अंतिम सांस तक लड़ने को तैयार हैं। प्रशासन और सरकार के स्तर पर अभी तक कोई ठोस समाधान न निकल पाने के कारण स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।


