भारतीय राष्ट्रपति की शाही बग्घी जब भी राष्ट्रपति भवन से निकलती है, तो हर नजर उसी पर टिक जाती है। यह बग्घी केवल शान-ओ-शौकत का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और गौरव की अमूल्य धरोहर भी है। बहुत कम लोग जानते हैं कि कभी इस शाही बग्घी पर भारत और पाकिस्तान—दोनों की नजर थी।भारत के विभाजन के समय कई ऐतिहासिक धरोहरों के बंटवारे को लेकर असमंजस की स्थिति बनी थी।
इन्हीं में से एक थी यह शाही बग्घी, जो उस समय वायसराय हाउस (वर्तमान राष्ट्रपति भवन) की शान मानी जाती थी। भारत और पाकिस्तान, दोनों ही इस बग्घी को अपने पास रखना चाहते थे।आखिरकार इस विवाद का फैसला किस्मत पर छोड़ दिया गया। सिक्का उछालकर निर्णय लिया गया, जिसमें पाकिस्तान की ओर से कमांडर-मेजर याकूब खान और भारत की ओर से कमांडर-मेजर गोविंद सिंह शामिल हुए।
सिक्का उछालने की इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में जीत भारत के हिस्से आई और शाही बग्घी भारत को मिल गई।तभी से यह शाही बग्घी भारत की शान और परंपरा का प्रतीक बन गई। आज गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर जब राष्ट्रपति इसी बग्घी में सवार होकर निकलते हैं, तो यह केवल एक रस्म नहीं बल्कि उस ऐतिहासिक फैसले की याद भी होती है, जिसने इस धरोहर को हमेशा-हमेशा के लिए भारत का गौरव बना दिया।