नई दिल्ली: वर्ल्ड इकॉनॉमिक फोरम की एक संस्था द्वारा कराए गए सर्वे में पता चला है कि दुनिया की बड़ी आबादी में कोरोना की दहशत बरकरार है. और ऐसे में अगर कोरोना के लिए कोई वैक्सीन (टीका)बनती है, तो कम से कम तीन चौथाई लोग इसके टीकाकरण के लिए तैयार हैं.
इप्सॉस मोरी नाम की संस्था ने कोरोना पर एक वैश्विक सर्वे किया है. इस सर्वे में 27 देशों के लगभग 20 हजार लोग शामिल हुए. सर्वे में शामिल 74 फीसदी लोगों ने कहा कि अगर कोरोना का टीका बनता है, तो वे इसका इस्तेमाल जरूर करेंगे. ताकि वो कोरोना के कहर से बच सकें. हालांकि सर्वे में शामिल 59 फीसदी लोगों को शक है कि कोरोना का टीका बन भी पाएगा या नहीं.
ज्यादा उम्मीद नहीं रख रहे लोग: सर्वे
सर्वे में शामिल अधिकतर लोग कोरोना के टीके को लेकर ज्यादा परवाह नहीं कर रहे हैं. क्योंकि उम्मीदें पूरा न होने पर दुख ज्यादा होता है. वहीं 56 फीसदी लोग टीके से होने वाले दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित दिखे, जबकि 29 फीसदी लोगों को लगता है कि कोरोना की रोकथाम में टीका शायद ही प्रभावी हो.
भारत, चीन, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया के लोग टीके को लेकर ज्यादा आशावादी
इस सर्वे में टीके पर भरोसा करने वाले लोगों की संख्या ज्यादा रही. चीन के 97 फीसदी लोगों पर टीके को लेकर पूरा भरोसा है. वहीं ब्राजील(88%), ऑस्ट्रेलिया (88%) और भारत में 87 फीसदी लोगों ने टीके पर भरोसा जताया है. जबकि रूस के 54 फीसदी, पोलैंड के 56 फीसदी, हंगरी के 56% और फ्रांस के 59 फीसदी लोगों का कहना है कि वो कोरोना का टीकाकरण नहीं कराएंगे, भले ही कोई टीका बनकर तैयार हो जाए.
भारत के 74% लोगों को है टीका आने का भरोसा
चीनी लोग कोरोना के टीके को लेकर सर्वाधिक आशावान हैं. चीन के 87% लोगों को लगता है कि इस साल के आखिर तक कोरोना का टीका बन जाएगा. भारत में ऐसा सोचने वालों की संख्या 74% है, तो सऊदी अरब में 85% लोग मानते हैं कि इस साल कोरोना का टीका आ जाएगा.
24 जुलाई से 7 अगस्त के बीच हुआ सर्वे
इप्सॉस ने जानकारी देते हुए बताया कि ये सर्वे जुलाई के आखिरी सप्ताह और अगस्त के पहले सप्ताह में किए गए. जिसमें कुल 19,519 लोग शामिल हुए.

