इस्लामाबाद: अभी दुनिया जहां कोरोना वायरस के संकट से जूझ रही है वहीं कई देशों के बच्चों की सेहत पर एक नया खतरा मंडराने लगा है. खासतौर पर ये खतरा दक्षिण एशियाई देशों के बच्चों को है. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ ने कहा कि दक्षिण एशिया में लॉकडाउन के कारण सैकड़ों हजारों लोग खतरे में थे, ऐसे में माता-पिता ने अपने बच्चों को डॉक्टरों के पास ले जाने से परहेज किया. नतीजतन बच्चों के नियमित टीकाकरण में रुकावट आई. यूएन ने इसे बच्चों के लिए गंभीर खतरा कहा है.
बच्चों के लिए गंभीर खतरा
यूनिसेफ के दक्षिण एशिया कार्यालय के निदेशक जीन गफ ने कहा, “हालांकि कोविड -19 वायरस कई बच्चों को गंभीर रूप से बीमार नहीं करता है, लेकिन नियमित टीकाकरण सेवाओं में व्यवधान आने से सैकड़ों बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है.” उन्होंने कहा, “यह एक बहुत गंभीर खतरा है. इसमें प्रारंभिक कार्रवाई महत्वपूर्ण है. ”
बांग्लादेश और नेपाल ने अपने खसरा और रूबेला अभियानों को रोक दिया है जबकि पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने कोविड -19 महामारी के बाद से अपने पोलियो ड्राइव को रद्द कर दिया है.
यूनिसेफ ने नोट किया कि खसरे और डिप्थीरिया जैसी टीके के जरिए रोकी जा सकने वाली बीमारियों का “छिटपुट” प्रकोप बांग्लादेश, पाकिस्तान और नेपाल में सामने आने लगा है. दक्षिण एशियाई क्षेत्र के कुछ देशों में वैक्सीन का स्टॉक भी कम होने से इनकी सप्लाई में बाधा आई.
महामारी के नियंत्रित होते ही इस पर करें काम
एजेंसी ने एक बयान में कहा, “यूनिसेफ ने दृढ़ता से सिफारिश की है कि जहां टीकाकरण अभियान बंद हैै वहां की सरकारें कोविड-19 महामारी के नियंत्रण में आते ही तेजी से टीकाकरण करने के लिए योजनाएं बनाएं.” इसमें कहा गया है कि जब तक स्वास्थ्य कर्मचारी स्वच्छता संबंधी सावधानी बरतते हैं, तब तक टीकाकरण को रोकने का कोई कारण नहीं था.
एजेंसी ने अनुमान लगाया कि दक्षिण एशिया के 4.5 मिलियन यानि कि करीब 45 लाख बच्चों का नियमित टीकाकरण कोरोना वायरस महामारी होने से पहले ही बाकी रह गया था.

