बीजिंग: अमेरिका (America) मे चीन के राजदूत कुई टिआंकई ने एक इंटरव्यू में कहा है, ‘अमेरिका को अपने से अलग राजनीतिक व्यवस्था वाले देशों के साथ रहने के लिए तैयार होना होगा’. इंटरव्यू के दौरान कुई ने चीनी-अमेरिकी रिश्ते, कोविड 19 के साथ साथ हॉन्ग कॉन्ग स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन (एचकेएसएआर) में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना के कानून की भी चर्चा की.
उन्होंने कहा, ‘हमें निश्चित ही दुनियां के सभी देशों की तरह ये कानूनी अधिकार है कि अपने देश को एक आधुनिक, मजबूत और समृद्ध देश बनाएं’.
कुई ने कहा, ‘मेरा मानना है कि अमेरिका के लिए आधारभूत सवाल बहुत साधारण हैं. क्या अमेरिका अपने से बहुत अलग संस्कृति, बहुत अलग राजनीति व्यवस्था और बहुत अलग आर्थिक व्यवस्था वाले किसी दूसरे देश के साथ रहने के लिए तैयार है या रहना चाहता है? क्या अमेरिका शांति के साथ रहकर कई सारी और अभी भी बढ़ रही वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग के लिए तैयार है? मेरे हिसाब से यही वास्तविक चुनाव है. यही आधारभूत चुनाव है, जो लोगों को करना होगा’.
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जब ये पूछा गया कि क्या चीन कोविड 19 पर पारदर्शिता बरत रहा है, तो कुई ने जवाब दिया कि, वायरस एक खोज की प्रक्रिया और सीखने से जुड़ा है, और इसमें वैश्विक सहयोग की जरूरत है. उन्होंने कहा कि चीन ने सबसे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सूचना दी, जो 3 जनवरी को यानी काफी पहले दी गई और चीनी सीडीसी और अमेरिकी सीडीसी ने अगले ही दिन यानी 4 जनवरी को इस नए वायरस के बारे में चर्चा की.
हॉन्ग कॉन्ग स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन (एचकेएसएआर) में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कानून से जुड़ी चिंताओं पर कुई ने कहा, कानून ‘एक देश दो व्यवस्था’ के सिद्दांत को सुरक्षा देगा और उस क्षेत्र में बिजनेस करने की प्रकिया में मदद करेगा. कुई ने आगे बताया कि कानून लाने का लक्ष्य स्पष्ट था, वो लोग जो कुछ निश्चित तरह के क्रियाकलापों से दूर रहे, उनको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.
ये बयान तब आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में फिर जोर देकर कहा है कि दुनियां भर में कोरोना महामारी चीन की वजह से फैली है.
हाल ही के महीनों में अमेरिका और चीन के बीच के रिश्तों में गिरावट आई है और ये दशकों में सबसे नीचे के पायदान पर पहुंच चुके हैं और इनके बीच तनाव बढने की कई वजहें हैं, कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी और चीन के भारी ट्रेड सरप्लस से लेकर हांगकांग में चीन द्वारा लोकतंत्र समर्थकों के विरोध को दबाने, दक्षिण चीन महासागर में सैन्य ताकत बढ़ाने, और अल्पसंख्यक मुस्लिमों के प्रति चीनी दुर्व्यवहार तक.


