US Vs Venezuela tension: दुनिया को जंग से बचाने की मुहिम छेड़ने वाले डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के खिलाफ जंग छेड़ने के लिए आमादा है. जिसका सबूत कैरेबियाई सी सामने आया, जहां ट्रंप ने अपने परमाणु बमवर्षकों के साथ समुद्री जंगबाजों तक की तैनाती कर दी है. ट्रंप के जंगी तेवर इस बात का साफ और सीधा संकेत हैं कि इस बार ट्रंप वेनेजुएला को नहीं बख्शने वाले. तभी ट्रंप ने इतनी भारी तादाद में कैरेबियाई सी में अपनी जंगी बेड़ों की डिप्लॉयमेंट की ताकि आसानी से वेनेजुएला का वजूद मिटा सके.
घिर गए ट्रंप?
प्रेसिडेंट ट्रंप की सनक, प्रतिशोध और जंगी तेवर हर किसी को सन्न कर रहा है. लेकिन ट्रंप अपने मकसद में कामयाब हो पाते. वेनेजुएला पर पहला विध्वंसक अटैक कर पाते उससे पहले ही US-वेनेजुएला क्राइसिस में पुतिन-जिनपिंग की एंट्री ने व्हाइट हाउस से पेंटागन तक सनसनी मचा दी है. जिस वेनेजुएला को तबाह करने के लिए उसका नामोनिशान मिटाने के लिए अमेरिका ने अपने विध्वंसक हथियारों को कैरेबियाई सी में तैनात किया. उसी वेनेजुएला को बचाने का प्रण पुतिन और जिनपिंग ले चुके हैं. हालांकि चीन ने तो अब तक अमेरिकी दखलअंदाजी का विरोध किया है. जबकि रूस ने वेनेजुएला की रक्षा के लिए अपने डिफेंस सिस्टम तक को तैनात कर दिया है.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो –
रूस ने वेनेजुएला को पतंशीर-S1 मिसाइल डिफेंस सिस्टम दिया है.
इसके अलावा वेनेजुएला में BuK-M2E डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं.
रूसी डिफेंस ने वेनेजुएला को ओरेशनिक ICMB की भी सप्लाई की है.
आशंका जतायी जा रही है कि जल्द ही पुतिन वेनेजुएला को डिफेंस के साथ-साथ अटैक करने वाले हथियारों की खेप भेंजेगे. जिसमें मिसाइल-गोला-बारूद और टैंक-तोपें भी हो सकती है. ऐसे में अब अमेरिका के पास सिर्फ एक ही रास्ता है या तो वो वेनेजुएला के मसले पर पीछे हट जाए या फिर वेनेजुएला के साथ खड़ी दो महाशक्तियों से भीड़ जाए और ये तभी संभव है जब ट्रंप वेनेजुएला के खिलाफ कैरेबियाई सी में पहले से ज्यादा विध्वंसकों को तैनात करें.
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