गुना। सड़क निर्माण के नाम पर आखिर ग्रामीणों को प्रदूषण की सजा क्यों भुगतनी पड़ रही है विकास के लिए बनाई जा रही सड़कें यदि गांवों में रहने वाले लोगों की सेहत के लिए खतरा बनने लगें, तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होना भी जरूरी है। गुना जिले के गुना-फतेहगढ़ स्टेट हाईवे मार्ग पर संचालित एक डामर प्लांट से निकलने वाले धुएं और फैल रहे प्रदूषण को लेकर ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है। बरसाती गांव और आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया है। हालात इतने चिंताजनक बताए जा रहे हैं कि अब गांव के मासूम बच्चों को भी अपनी परेशानी लेकर जनप्रतिनिधि के दरवाजे तक पहुंचना पड़ा है।सबसे भावुक कर देने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब बरसाती गांव के छोटे-छोटे बच्चों ने बमोरी विधायक को वीडियो कॉल कर अपनी पीड़ा बताई। बच्चों ने भावुक होकर विधायक से गुहार लगाई कि गांव में संचालित डामर प्लांट को तत्काल दूसरी जगह शिफ्ट कराया जाए, ताकि उन्हें प्रदूषित हवा में सांस लेने की मजबूरी से छुटकारा मिल सके। बच्चों की इस गुहार ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर गांव के लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए जिम्मेदार विभाग कब जागेंगे?ग्रामीणों का कहना है कि डामर प्लांट से निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रहा है। लोगों को आशंका है कि लगातार प्रदूषण के संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। सबसे ज्यादा चिंता बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर है, क्योंकि प्रदूषित वातावरण का असर उनके स्वास्थ्य पर गंभीर पड़ सकता है। हालांकि, प्रदूषण के वास्तविक स्तर और उससे होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।लेकिन गांव की स्थिति को लेकर ग्रामीण जो तस्वीर पेश कर रहे हैं, वह चिंता बढ़ाने वाली है। उनका आरोप है कि डामर प्लांट से निकलने वाले कण और काली परत घरों तक पहुंच रही है। घरों की दीवारों से लेकर छतों पर रखी पानी की टंकियों तक डामर जैसी काली परत जमने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों के मुताबिक, जब घरों के भीतर और पानी की टंकियों के आसपास तक प्रदूषण का असर दिखाई देने लगे, तो सामान्य जनजीवन प्रभावित होना स्वाभाविक है।ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली। यही वजह है कि लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ रही है। जब शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं निकलता, तो लोगों का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था से कमजोर होने लगता है। बरसाती गांव में बच्चों की वीडियो कॉल के जरिए लगाई गई गुहार इसी परेशानी और बेबसी को उजागर करती है।इस पूरे मामले में ठेकेदार की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार, इससे पहले कुड़का गांव के ग्रामीण भी इसी ठेकेदार पर अवैध उत्खनन के गंभीर आरोप लगा चुके है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जानी चाहिए। वहीं, बरसाती गांव में डामर प्लांट से फैल रहे प्रदूषण की शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाना जरूरी है।फिलहाल बरसाती गांव के ग्रामीणों को राहत का इंतजार है। एक तरफ सड़क निर्माण का काम चल रहा है, तो दूसरी तरफ गांव के लोग स्वच्छ हवा और सुरक्षित वातावरण की मांग कर रहे हैं। बच्चों की गुहार ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। अब देखना होगा कि बमोरी विधायक और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।


