आने वाले दिनों में तापमान बढ़ सकता है. (File Photo)
जानकारों की मानें तो ग्लोबल वार्मिंग की वजह से मौसम में तेजी से बबदलाव हो रहा है. इसे लेकर सरकार और वैज्ञानिक दोनों की चिंता बढ़ गई है.
बीते कुछ सालों में अधिकतम तापमान 46,47 डिग्री के उपर तक चला गया था. कहा जा सकता है कि प्रदेश में ठंड और गर्मी दोनें अच्छी तरह से पड़ती है. साथ ही बारिश भी अच्छी होती है. मगर गर्मी के दिनों में बारिश की मेहरबानी से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है.
कहां कुई कितनी बारिश
मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि पश्चिम विक्षोम और द्रोणिका की वजह से इस बार दो महीने में अलग-अलग जिलों में 50 दिनों तक बारिश हुई. मार्च में औसतन 54.3 मीमी बारिश हुई जिसमें सबसे अधिक 22.3 मीमी वाड्रफनगर में दर्ज किया गया. इसी तरह अप्रैल माह में 28.7 मीमी बारिश हुई जिसमें सबसे अधिक जगदलपुर में 135.8 मीमी बारिश हुई. वहीं मार्च और अप्रैल के कुल 61 दिनों में से 50 दिनों तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश होती रही.किसानों को काफी नुकसान
द्रोणिका और वेस्टन डिस्टर्बेंस पूरी तरह से सक्रीय रहा जिसके कारण मौसम बदला. आकाशीय बिजली से 7 लोगों की गई प्रदेश में हुई. ओला गिरने से फसलों को भी काफी नुकसान हुआ है. रायपुर, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, पेड्रा रोड, गरियाबंद, जगदलपुर सहित 10 से अधिक जिलों में ओले गिरे हैं. तूफान की वजह से भी काफी नुकसान हुआ है.
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First published: June 1, 2020, 11:16 AM IST


