which pulses are rich in protein: करीना की डायटीशियन ने बताए दाल खाने के ये 3 नियम, बिगड़ा रहता है हाजमा तो जरूर मानें बात – kareena kapoor nutritionist rujuta diwekar shares 3 rules of eating dal pulses

दाल के बिना मानों हमारा लंच और डिनर अधूरा है। दाल प्रोटीन का एक बड़ा सोर्स है, इसलिए जिम जाने वालों के लिए यह अमृत समान मानी जाती है। दाल कई प्रकार की आती हैं, मगर हम में से ऐसे कुछ ही लोग हैं जो मात्र एक या दो प्रकार की ही दालों का सेवन करते हैं।

दाल खाने के कई तरीके हैं और इसके कुछ नियम भी हैं। इस बात की जानकारी होना बेहद जरूरी है कि इसे खाएं कैसे, जिससे हमारे शरीर को पूरा पोषण मिले। सेलेब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट और बॉलीवुड एक्‍ट्रेस करीना कपूर की डायटीशियन के तौर पर जानी जाने वाली रुजुता दिवेकर ने अपने इंस्‍टाग्राम पर एक पोस्‍ट शेयर करते हुए दालों के सेवन के 3 नियम बताए हैं, जिसे हम सभी अगर फॉलो करें तो हमें खूब पोषण मिलेगा। आइए जानते हैं उन्‍होंने क्‍या जानकारी दी है…

नियम 1. दाल खाने से पहले जरूर भिगोएं

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दालें प्रोटीन, विटामिन और खनिजों का समृद्ध स्रोत हैं, लेकिन उनमें से अमीनो एसिड को निकाल पाना काफी मुश्‍किल काम होता है। इनमें ऐसे एंटी-पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो पोषक तत्वों के रास्‍ते में आते हैं। यही कारण है कि दाल खाने से कई लोगों को पेट में गैस, सूजन और अपच आदि की शिकायत होने लगती है। पाचनशक्ति को बढ़ाने के लिए दाल को भिगोकर या फिर अंकुरित कर के पकाएं।

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करीना की डायटीशियन ने बताए दाल खाने के ये 3 नियम

​नियम 2. चावल और रोटी के साथ होना चाहिए सही अनुपात

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दाल को सही अनुपात में खाना बेहद जरूरी है। कई लोग प्रोटीन के चक्‍कर में दाल का हद से ज्‍यादा सेवन करने लगते हैं और अनाज से दूरी बना लेते हैं। यह सेहत के हिसाब से बिल्‍कुल भी ठीक नहीं है। जब आप दाल को चावल के साथ खाएं तो, इसका अनुपात 1: 3 होना चाहिए। वहीं, जब इसे रोटी के साथ सर्व किया जाता है तो इसका अनुपात 1: 2 रखना चाहिए।

इसके पीछे तर्क यह है कि दालों और फलियों में मेथियोनीन नामक एमिनो एसिड की कमी होती है और अनाज में लाइसिन की कमी होती है। लाइसिन दालों में बहुतायत से पाया जाता है, लेकिन मेथिओनिन जैसे अन्य अमीनो एसिड के बिना यह पूरी तरह से अपने कार्यों को पूरा नहीं कर सकता है। यह इसमें एक भूमिका निभाता है –

​नियम 3. करें कई प्रकार की दालों का सेवन

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भारत में दालों और फलियों की 65000 से अधिक किस्में हैं। हेल्‍दी बने रहने के लिए हमें सप्‍ताह में कम से कम 5 अलग-अलग प्रकार की दालों का सेवन करना चाहिए। इन्‍हें अलग-अलग तरीकों से पकाया और खाया जाना चाहिए (जैसे कि दाल, पापड़, अचार, इडली, डोसा, लड्डू, हलवा, आदि)। जब इन्‍हें अलग-अलग तरीकों से खाई जाती है, तो हमारे आंत के हेल्‍दी बैक्टीरिया स्‍वस्‍थ रहते हैं।

दाल हमारे जीवन का एक अहम हिस्‍सा हैं, इन्‍हें सिर्फ प्रोटीन पाने के लिहाज से न खाएं बल्‍कि इनसे मिलने वाले अन्‍य पोषक तत्‍वों पर भी गौर करें।




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