Women can Gospel but priesthood still a distant dream says Roman Catholic Church head Pope Francis | चर्च के नियमों में बदलाव, Gospel पढ़ सकती हैं महिलाएं पर पादरी अब भी नहीं बन सकतीं

रोमः रोमन कैथोलिक चर्च (Roman Catholic Church) के मुखिया पोप फ्रांसिस (Pope Francis) ने सोमवार को कहा है कि महिलाएं Mass यानी रोमन कैथलिक एक प्रार्थना को पढ़ सकती हैं. लेकिन पादरी (priests) नहीं बन सकती हैं. बता दें कि हाल ही में गिरजाघर के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं. 

इंजील पढ़ सकती हैं महिलाएं

चर्च के नए नियमों के मुताबिक, महिलाओं को विशेष तौर पर प्रार्थना के दौरान और कार्य करने की अनुमति होगी. लेकिन वे पादरी नहीं बन सकती हैं. फ्रांसिस ने कानून में संशोधन कर दुनिया के अधिकतर हिस्सों में चल रही प्रथा को औपचारिक रूप दिया कि महिलाएं इंजील (Gospel) पढ़ सकती हैं और वेदी पर युकरिस्ट मंत्री (Eucharistic ministers) के तौर पर सेवा दे सकती हैं. मालूम हो कि इससे पहले ये भूमिकाएं औपचारिक रूप से पुरुषों तक ही सीमित थीं, हालांकि इसके कुछ अपवाद भी थे. नए नियमों के तहत अब दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं इन भूमिकाओं को निभाती हैं. 

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पादरी बनना महिलाओं के लिए आज भी सपना

पोप फ्रांसिस ने कहा कि गिरजाघरों में महिलाओं के अमूल्य योगदान को मान्यता देने के तौर पर ही चर्च के निमयों में ये बदलाव किए गए हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी बैपटिस्ट कैथोलिकों (Baptised) को गिरजाघर के मिशन में भूमिका निभानी होगी. पोप के अनुसार चर्च के नियम में कुछ बदलाव महिलाओं को सम्मान देने के मकसद से भी किए जा रहे हैं. हालांकि, चर्च का पादरी बनने अब भी महिलाओं के लिए एक दूर के सपने जैसा ही है. नियमों में बदलाव के बाद भी उन्हें इस अधिकार से वंचित रखा गया है. 

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नए नियमों में समझना होगा ये अंतर

पोप ने कहा, दो तरह के मंत्रालयों के बीच का अंतर बहुत गहरा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसा करने में पादरी बनने जैसी चर्च की नियुक्तियों और योग्य जन-साधारण के लिए उपलब्ध भूमिकाओं में अंतर समझना होगा. वेटिकन (Vatican) पादरी सिर्फ पुरुष ही बन सकते हैं न कि महिलाएं. चर्च के नियमों में ऐसे समय पर संसोधन हुआ है जब पोप पर दबाव बढ़ रहा है कि वो महिलाओं को कम से कम डेकन या छोटा पादरी बनने की अनुमति दें. चर्चा में महिलाओं की अहम भूमिकाओं को लेकर पोप का यह पहला प्रयास है जिसके लिए एक समिति का गठन किया है. नए नियम को लेकर आलोचकों का कहना है कि ऐसा करने से चर्च के प्रशासन में महिलाओं को ज्यादा अवसर मिलेंगे और इसके साथ दुनिया के कई कोनों में पादरियों की कमी को भी पूरा किया जा सकेगा.

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