बीजिंग: लैंसेट (Lancet) में प्रकाशित हुए एक नए अध्ययन के अनुसार वुहान (Wuhan) में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमित 76 प्रतिशत या तीन-चौथाई मरीजों में 6 महीने बाद भी इस घातक वायरस के लक्षण हैं. ये उन मरीजों के आंकड़े हैं, जिन्हें संक्रमण के बाद हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था.
चीनी शहर वुहान के सैकड़ों रोगियों पर किया गया यह अध्ययन Covid-19 संक्रमण के लंबे समय तक रहने वाले लक्षणों का पता लगाने के लिए किया गया है.
एंजाइटी-डिप्रेशन जैसी कई समस्याएं
Lancet के नए अध्ययन के अनुसार, वुहान में कोविड-19 के जबरदस्त संक्रमण फैलने के 6 महीने बाद रोगी थकान, मांसपेशियों की कमजोरी, सोने में आ रहीं मुश्किलें, एंजाइटी या डिप्रेशन से परेशान थे.
नेशनल सेंटर फॉर रेस्पिरेटरी मेडिसिन के प्रमुख लेखक बिन काओ ने कहा, ‘चूंकि कोविड-19 इस तरह की एक नई बीमारी है और हम मरीजों के स्वास्थ्य पर इसके लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों को समझने की बस शुरुआत कर रहे हैं. इसीलिए हमने हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद भी मरीजों की लगातार देखभाल करने की जरूरत जताई थी. वह भी खासकर उन लोगों की, जिनमें गंभीर संक्रमण हुआ था.’
ये भी पढ़ें: चीनी वायरोलॉजिस्ट का दावा- पैसे और पावर के दम पर दुनिया को प्रभावित कर सकता है चीन
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि वायरस कुछ ऐसे लोगों के लिए जोखिम पैदा करता है, जिन पर अभी भी इसका गंभीर असर बना हुआ है. ऐसा युवाओं के मामले में भी है और उन लोगों के लिए भी है जो हॉस्पिटल में एडमिट नहीं हुए थे.
मरीजों में अब भी हैं कोरोना के लक्षण
इस अध्ययन में पिछले साल जनवरी से मई के बीच वुहान के जिनिन्टन हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हुए 1,733 कोविड -19 मरीजों को शामिल किया गया था. इन्हें जांचने के लिए रिसर्चर्स ने उनका शारीरिक परीक्षण भी किया और लैब टेस्ट भी किए.
अध्ययन में पता चला कि फॉलोअप में भाग लेने वाले 76 प्रतिशत मरीजों ने कहा कि उनमें अभी भी इसके लक्षण हैं. 63 फीसदी ने थकान या मांसपेशियों की कमजोरी बताई, जबकि 26 फीसदी लोगों को नींद की समस्या थी. 94 ऐसे मरीजों को भी शामिल किया गया, जिनके खून में एंटीबॉडी का रिकॉर्ड स्तर दर्ज किया गया था. 6 महीने बाद इनमें एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने का स्तर 52.5 प्रतिशत कम था.
फिर से संक्रमित होने का खतरा
लेखकों ने कहा है कि इससे फिर से कोविड-19 संक्रमण होने की संभावना है. हालांकि समय के साथ वायरस में कैसे परिवर्तन होता है, यह स्पष्ट करने के लिए बड़े पैमाने पर नमूने इकट्ठे करने की जरूरत है.
बता दें कि यह अध्ययन तब सामने आया है जब 5 महीने बाद चीन के मेनलैंड में फिर से बड़ी संख्या में COVID-19 मामले दर्ज हो रहे हैं. देश के स्वास्थ्य प्राधिकरण ने सोमवार को कहा है कि बीजिंग के आसपास हेबै प्रांत में संक्रमण के नए मामले बढ़ रहे हैं. इसके चलते यहां के कई इलाकों में नए COVID-19 प्रतिबंध लगाए गए हैं. 49 लाख निवासी तो लॉकडाउन में रहने को मजबूर हैं.
गौरतलब है कि 2019 के अंत में चीन के वुहान में ही यह वायरस पैदा हुआ था और आलोचकों का कहना है कि चीन ने इससे निपटने में देरी की, जिससे यह पूरी दुनिया में फैल गया.

