सुकमा. सुकमा जिले का मारोकि गांव 9 लोगों की मौत के बाद सुर्खियों में आया है. वहां एक पातालतोड़ हेंडपम्प है जो बिना मशीन और पंप लगाए ही पिछले 19 साल से दिन- रात पानी दे रहा है. बस गर्मी के दिन में पानी की धार कम हो जाती है. इससे गांव के करीब दो सौ घरों की प्यास बुझती है. चाहें जितनी गर्मी हो और पूरे प्रदेश में जल संकट हो लेकिन इस गांव में कभी जलसंकट नहीं होता.
सुकमा जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर स्थित नक्सल प्रभावित गांव मारोकी है. इस गांव का एक हैंडपंप अजूबा बना हुआ है. यहां का हेंडपम्प पिछले 19 साल से लगातार बिना किसी उपकरण के पानी दे रहा है. मारोकी गांव घोर नक्सल प्रभावित है और दंतेवाड़ा की सीमा से लगा हुआ है. इस पंचायत में 7 अलग- अलग आश्रित गांव में करीब 900 जनसंख्या है. साथ ही गांव में वैसे मूलभूत सुविधाओं की कमी है लेकिन पानी की सुविधाएं ठीक है.
पानी का स्त्रोत मिला
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 19 साल पहले पीएचई विभाग के कर्मचारी गांव आए थे. उन्होंने यहां पर नलकूप खनन किया लेकिन ऐसे ही बिना हैंडल लगाए छोड़कर चले गए. उसके बाद पानी आने का सिलसिला शरू हुआ जो अब तक दिन-रात 24 घण्टे चालू है. इसमें से हमेशा ऐसे ही पानी आता रहता है.
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दबाव के कारण बनती है ऐसी स्थिति
हैंडपंप में लगातार आ रहे पानी को लेकर ये तर्क दिया जा रहा है कि वहां गांव में जल स्तर काफी ज्यादा है. साथ ही वहां पर वातावरण से ज्यादा हवा का दबाव है. यही कारण है कि वहां से पानी बिना किसी दबाव के आ रहा है. हैंडपम्प में हैंडल या मशीन इसलिए लगाई जाती है ताकि दबाव बना सकें लेकिन वहां सिर्फ हवा के दबाव से पानी आ रहा है.
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Tags: Chhattisgarh news, Sukma news, Water Level
FIRST PUBLISHED : October 10, 2022, 18:06 IST
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