मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्वाचन क्षेत्र बठेना कांड को अब 6 दिन बीत गए हैं.
दुर्ग जिले के पाटन में हुआ बठेना कांड अभी भी हत्या और आत्महत्या के बीच अभी भी झूल रहा है. गायकवाड़ परिवार के 5 सदस्यों के शव की चिताएं भी ठंडी हो चुकी हैं लेकिन सवाल अब भी सुलग रहे हैं.
पुलिस की कहानी जो हो लेकिन वास्तविकता के धरातल पर इससे बेहद जुदा लग रही है. पुलिस ने मृतक के घर से एक 5 पन्नों का सुसाइड नोट प्राप्त होने की जानकारी दी है. पुलिस ने इस सुसाइड नोट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है. दूसरी ओर पुलिस के अनुसार सुसाइड नोट में घर के मुखिया राम ब्रिज ने आर्थिक तंगी का हवाला दिया है और अपने परिवार को सॉरी कहते हुए किसी को तंग नही करने की बात कही है. सवाल यही उठ रहा है कि जब घर के अन्य सदस्यों को उसी ने मारा है तो फिर वो माफी किससे मांग रहा था. जब घर का कोई सदस्य बचा ही नहीं है तो फिर किसको तंग नही करने की बात कह रहा है.
इसके अलावा, पैरावट वाले स्थान पर जहां घर की 2 बेटियों सहित पत्नी को जलाया गया या पुलिस के अनुसार उनका विधिवत अंतिम संस्कार किया गया तो फिर उनहें कांटो भरे तार से क्यों बांधा गया. जब रामब्रिज ने फांसी लगाकर सुसाइड किया तो फिर समीप रखे डायनिंग टेबल पर खून क्यों लगा है. उसे पुलिस ने क्यों जांच में नहीं लिया? ऐसे और भी कई सवाल है जो अभी तक सुलग रहे है. राजनैतिक आईने से परे यह पूरा मामला संदिग्ध लग रहा है जबकि पुलिस इसे आत्महत्या ही मानकर चल रही है.
पुलिस द्वारा हाल में जारी की गई विज्ञाप्ति में कहा गया है कि 17 लोगों से घर के बेटे संजू गायकवाड़ का लेनदेन था जिनका उसने धान लिया था और पैसे नही दिए थे. इस तरह से पुलिस की जांच और घटना स्थल के साक्ष्य दो अलग-अलग इशारा कर रहे है. लिहाजा यह पूरा मामला हत्या और आत्महत्या के बीच झूल रहा है.वहीं पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था चरमराई हुई है. रमन सिंह ने कहा कि बठेना गांव और खुमुड़ा गांव की घटना इसका सीधा-सीधा उदाहरण है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था लचर हो गई है.