एग्ज़ाम रद्द होने के बाद अब सब्जेक्ट सिलेक्शन की टेंशन

एवरेज स्टूडेंट्स सब्जेक्ट सिलेक्शन से पहले इस बात को तवज्जो देते हैं कि सब्जेक्ट उनके इंट्रेस्ट का हो.

एवरेज स्टूडेंट्स सब्जेक्ट सिलेक्शन से पहले इस बात को तवज्जो देते हैं कि सब्जेक्ट उनके इंट्रेस्ट का हो.

CBSE द्वारा 10वीं बोर्ड की परीक्षा रद्द किये जाने के ऐलान के साथ ही अब अगली कक्षा में प्रमोट होने वाले छात्रों को इस बात की चिंता सता रही है कि उन्हें पसंद का सब्जेक्ट मिलेगा या नहीं.

रायपुर. CBSE ने 10वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं और सभी छात्रों को जनरल प्रमोशन दिया जाएगा. अब छात्रों के मन में इस बात को लेकर सवाल है कि आखिर 11वीं में किस आधार पर सब्जेक्ट का सिलेक्शन किया जाए. छात्र अब सब्जेक्ट सिलेक्शन को लेकर टेंशन में हैं.

CBSE द्वारा 10वीं बोर्ड की परीक्षा रद्द किये जाने के ऐलान के साथ ही अब अगली कक्षा में प्रमोट होने वाले छात्रों को इस बात की चिंता सता रही है कि उन्हें पसंद का सब्जेक्ट मिलेगा या नहीं.

दरअसल, पहले छात्र अपनी रुचि के साथ 10वीं के नतीजों और विषयों में मिले अंकों के आधार पर 11वीं में सब्जेक्ट का सिलेक्शन करते थे लेकिन इस बार परीक्षा ही नहीं होगी और मार्क्स किस क्राइटेरिया में दिये जाएंगे इसे लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है.

रायपुर के केन्द्रीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा प्रसिद्धी नागलकर का कहना है सब्जेक्ट सिलेक्शन लाइफ का इम्पॉर्टेंट फैसला होता है लेकिन ज्यादातर एवरेज स्टूडेंट्स सब्जेक्ट सिलेक्शन से पहले इस बात को तवज्जो देते हैं कि सब्जेक्ट उनके इंट्रेस्ट का हो. साथ ही उस सब्जेक्ट में मार्क्स भी अच्छे आये हों लेकिन इस बार ऐसा नहीं है जिससे छात्रों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.इसी तरह छात्र प्रशांत शर्मा का कहना है कि कोरोना संक्रमण की वजह से परीक्षा रद्द की गयी, ये अच्छी बात है क्योंकि परीक्षा देने में खतरा हो सकता था लेकिन अब नई टेंशन सब्जेक्ट सिलेक्ट करना है.

रायपुर में रहने वाली वंदना अग्रवाल ने बताया कि 10वीं की परीक्षा भले ही रद्द कर दी गयी हो लेकिन पेरेंट्स की परीक्षा अभी चल रही है और असली परीक्षा तो तब देनी होगी जब बारी सब्जेक्ट सिलेक्शन की आयेगी. वंदना अग्रवाल का कहना है कि उनकी बेटी अभी 10वीं में है लेकिन 11वीं कक्षा में उसकी रुचि के मुतबिक जो सब्जेक्ट चाहिए वो स्कूल वाले देंगे या नहीं इस पर संशय बरकरार है.

पेरेंट्स संघ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा का कहना है कि फीस और अन्य मामलों में निजी स्कूलों की मनमानी देखी जाती है लेकिन अब अगर एक साथ बड़ी तादाद में छात्र किसी एक सब्जेक्ट में रुची दिखाएंगे तब इस मसले पर भी निजी स्कूलों की मनमानी का खामियाज़ा छात्रों को भुगतना पड़ सकता है.

क्या कहते हैं करियर काउंसलर
इस मसले को लेकर करियर काउंसलर अजीत वरवंडकर का कहना है कि छात्र कभी भी अंकों को पैमाना बनाकर सब्जेक्ट का सिलेक्शन ना करें, बल्कि अपने व्यक्तित्व,अभिरुचि और ऑक्यूपेशनल थीम के आधार पर ही सब्जेक्ट चुनें. क्योंकि ये भविष्य के लिए बेहद जरूरी होता है.

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कोरोना जैसी महामारी से छात्रों और उनके परिजनों को सुरक्षित रखने के लिए सीबीएसई ने ये फैसला लिया है लेकिन करियर को लेकर चिंतित होना भी स्वाभाविक है. ऐसे में तनाव लेने से बेहतर ये तय करना जरूरी है कि आने वाले समय में आप क्या करना चाहते हैं और उसी के मुताबिक अपने भविष्य की नींव रखने की कोशिश करें.




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