कांग्रेस नेता मनीष तिवारी बोले- पीएम मोदी बताएं कि चीन ने कितने इलाके में घुसपैठ की – India vs china congress manish tiwari asked prime minister narendra modi government border land encroached

  • कांग्रेस नेता बोले- चीन से इलाके को खाली कराने के लिए क्या कर रही सरकार
  • मनीष तिवारी ने पूछा- क्या यह सामरिक विफलता थी या फिर एक खुफिया चूक

भारत-चीन गतिरोध को लेकर कांग्रेस लगातार मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है और सवाल दाग रही है. बुधवार को कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमको बताएं कि चीन 5 मई से कितने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर चुका है. हमको यह भी बताया जाए कि आखिर वार्ता के बाद चीन ने कितने इलाके को खाली किया. पीएम मोदी को त्सांगोंग झील और गलवान के मौजूदा हालात पर स्पष्टीकरण देना चाहिए.’

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सवाल किया, ‘क्या यह सामरिक विफलता है या फिर खुफिया चूक है? क्या सरकार इसकी पॉलिटिकल जिम्मेदारी लेने को तैयार है? भारतीय इलाके को चीन से खाली कराने के लिए सरकार क्या कर रही है?’

वहीं, बुधवार को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर भारत-चीन गतिरोध पर चुप्पी साधने को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा. पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मौजूदा हालात को लेकर राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘चीनी लोग लद्दाख में हमारे इलाके में चले आए हैं और प्रधानमंत्री मोदी बिल्कुल चुप हैं और इस पूरे सीन से गायब हैं.’

राहुल गांधी ने सवाल किया कि एक बार जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पंजे के निशान पर टिप्पणी करते हैं, तो क्या वह इस सवाल का जवाब दे सकते हैं कि क्या लद्दाख में चीन ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है?’ राहुल गांधी ने यह ट्वीट रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के उस जबाव की प्रतिक्रिया के रूप में किया, जिसमें राजनाथ सिंह ने कहा था, ‘हाथ में दर्द हो तो दवा कीजिए, हाथ ही जब दर्द का कारण हो तो क्या कीजिए.’

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इससे भी पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए सवाल किया था, ‘क्या भारत सरकार इस बात की पुष्टि कर सकती है कि कोई चीनी सैनिक भारत में नहीं आया है?’ वहीं, सूत्रों का कहना है कि भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में तीन गतिरोध चौकियों से सैनिकों, बंदूक और लड़ाकू वाहनों की वापसी के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बढ़ते कदम को पीछे करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह प्रक्रिया 6 जून को भारत और चीन की शीर्ष सैन्य-स्तरीय वार्ता के बाद शुरू हुई.

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