जब प्रधानपाठक से इस संबंध में बात करनी चाही तो वे गोल मोल जवाब देते नजर आए. जिसके बाद फोन पर उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने बाहर होने हवाला देते हुए अपना पलडा झाड़ दिया. अब ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि देश का भविष्य माने जाने वाले इन बच्चों से ऐसे कृत्य कराने वाले प्रधानपाठक पर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्यवाही देखने को मिलती है या फिर जांच के नाम पर महज खानापूर्ति ही होती नजर आएगा.
तो कैसा होगा भविष्य
अभिवावक परसराम साहू का कहना है कि बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है और अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल में शिक्षा की तालीम लेने भेजते हैं, लेकिन झाड़ू ,फावड़ा और साफ सफाई करने का सामान हो और बच्चे स्कूल परिसर में स्टाफ सफाई करते हैं तो ऐसी स्थिति में देश के भविष्य का क्या होगा. जब सरपंच किशन कंवर से इस मामले की बात की गई तो सरपंच ने कहा कि इस मामले की जानकारी मुझे नहीं है और देखेंगे और कार्रवाई की जाएगी.

