वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) की कार्यवाही शुरू हो चुकी है. ट्रंप के वकील उनके पक्ष में दलील पेश कर रहे हैं, लेकिन इन दलीलों से खुद ट्रंप ही नाराज हो गए हैं. CNN की एक रिपोर्ट में यहां तक दावा किया गया है कि अपने वकील की दलीलों से नाराज डोनाल्ड ट्रंप सदन में चिल्ला रहे थे. ट्रंप के खिलाफ यह दूसरा महाभियोग प्रस्ताव है. इस प्रस्ताव को प्रतिनिधि सभा पहले ही पारित कर चुकी है.
पक्ष में पड़े 56 Vote
रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के खिलाफ महाभियोग की सुनवाई को संवैधानिक घोषित करने के लिए सीनेट में मंगलवार को मतदान हुआ, जिसमें इसके पक्ष में 56 और विपक्ष में 44 मत डाले गए. छह रिपब्लिकन सांसदों ने भी मतदान में डेमोक्रेटिक पार्टी का साथ दिया. इस दौरान, बचाव पक्ष के वकील ब्रूस कैंटर की ओर से कुछ दलीलें पेश की गईं. कैंटर की शुरुआती दलील ट्रंप को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने लगभग चिल्लाना शुरू कर दिया. बता दें कि बिल कैसिडी, जॉन कॉर्निन और टेड क्रूज जैसे रिपब्लिकन सांसद पहले ही ट्रंप की कानूनी टीम की इस बात के लिए आलोचना कर चुके हैं कि वह इस पर ठोस दलील नहीं दे पाई कि एक पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की सुनवाई संवैधानिक है या नहीं.
‘Trump ने नहीं भड़काई हिंसा’
वहीं, सीनेट ने कहा है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का ट्रायल पूरी तरह से संवैधानिक है. इससे पहले, ट्रंप के वकीलों की दलील दी कि ट्रंप ने समर्थकों की रैली को संबोधित करने के दौरान लोगों को दंगे के लिए नहीं भड़काया. उन्होंने आरोप लगाया है कि ट्रंप के घंटे भर लंबे भाषण में से केवल उन्हीं हिस्सों को आधार बनाकर यह कार्यवाही की जा रही है, जो डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए मददगार हैं. वकीलों ने कहा कि ट्रंप ने बार-बार अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की.
महाभियोग को असंवैधानिक बताया
वकीलों ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणी कि यदि आप जी-जान से नहीं लड़ते हैं, तो आप यह देश खोने जा रहे हैं, चुनाव सुरक्षा के सामान्य संदर्भ में की गई थी, न कि हिंसा भड़काने के लिए. वकीलों ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तकों ने पहले ही छह जनवरी को हिंसा होने का अंदेशा व्यक्त किया किया था, ऐसे में ट्रंप खुद हिंसा के लिए नहीं उकसा सकते थे. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप पर महाभियोग चलाना असंवैधानिक है, क्योंकि वह अब पद पर नहीं है.

