छत्तीसगढ़ी में पढ़ें: चिंतन-पहाड़ असन जिनगी परे हे, कइसे होही किथों


होनी ला काय होगे, अइसे कहिके दुरिहाय के नोहय. कतको परछो लेवइया इहां आके अपने आप मा मगन होवत होंही, काबर के तें बइठे ठाल्हे कतका दिन ले चालबे.


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