का भईस ते मुंह कान फूले फूले दिखत हे. अइसे बहु बेटी परिवार मा सियान ला अपन आप जना जथे. हंसत खेलत घरेलु काम निपटय तेन बेरा कुबेरा घलो नइ सकलाए राहय. अइसे के दिन ले चलही चलव सुनगुन झन राहय कोनो ला तो अगुवाके परन ला टोरे ला परही.
दीया बत्ती के बेरा मा कतका अंजोर हे
लड़इया कइसे लड़थे अउ जीतथे. कतको अंधियारी रात राहय दीया के बाती लकलक करतेच मिलही. ओरी – ओरी लमाले अउ मजा ले ले. परिवार घलो ओसरी पारी अपन बुता ला सकेलत रहिथें. कोनो केहे के सेती अपने अपन सबो चलत रइथे. देला मे करत हांवव दोला तें कर डार. खवइया आवत होही रांध गढ़ के मढ़ा डार. अइसे चलत रइथे अउ घर मा सुख शांति रइथे. सुख शांति रेहे ले कोनो काम अकारत नइ जावय. आंसो अउ पऊर के साल मा कतका परेशानी घरों घर समागे. कतका घर ले झगरा झांसी के आरो मिलिस फेर सबो परिवार मिलके ओला दुरिहाए के कोसिस मा लगे रिहिन तेन आज ले चले आवत हे.
कोनो चुलका दिन तेकरे बात मा आगे
चार जगा आबे जाबे त चार झन के मन विचार ला संघारे बर परथे ए बने बात आवय. शिक्षा दीक्षा के बाद मन मा बिचार कुनकुनावत रइथे समय पाके ओला आगू लाना चाही. मन नइ मानिस ते अपन ते अपन पारा मा खेलइया कुदइया लइका मन संग हो जा फेर देख शरीर के आनंद ला. आनंद अपने तीरतार मा रइथे ओला थोकन खोजे ला परथे. अपन जौंजर के संगवारी कहूं मिलगे ते सुख दुख ला घलो गोठिया डारथन फेर एमा सावधानी होना जरूरी हे कई झुन चुलकाए के कोसिस करथें. चुलकइया मन के बात मा कतको झन के घरबार मा बिगाड़ देखे ला मिलथे. बात बिगड़िस तहां मुंहे मुंह मा कतका बड़का बात समाए रइथे तेन परगट होए ला धर लेथे. इकरे सेती कोकरो झड़वाए बात मानइ आना चाही.
कई पईत नहीं जानबे तेनो जुझाथे
जुझइया के कमी नइये. अपन घर मा हम कइसनहो राहन कोनो ला का करना हे. जर ले दुर्हियाबे ते तिंही दुख पाबे. अपन हा अपनेच आवय. समय परे मा कोन ठाढ़ होही ओही परिवार जेला ते तियागे रेहे. एकरे सेती लिखरी लिखरी बात मानइ रिसाना चाही.
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