छत्तीसगढ़ की राजधानी समेत कई जिलों को अनलॉक कर दिया गया है. (file photo)
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में कोरोना (Corona) के बढ़ते संक्रमण के तहत 17 जिलों में लॉकडाउन (Lockdown) का ऐलान किया गया था.
कुछ जिलों में लॉकडाउन सोमवार को पूरी हो गई मगर संक्रमण का दर जस का तस रह गया, मगर कई जिलों में अनलॉक का आदेश जारी कर दिया गया, जिसे लेकर राजनीतिक बवाल शुरू हो चुका है. प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री रविन्द्र चौबे कहते हैं कि लॉकडाउन संक्रमण को रोकने कोई स्थाई समाधान नहीं है. बेहतर विकल्प के रूप में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग ही उपयुक्त है. इसको लेकर बीजेपी ने गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा कि अपने आंदोलन को सफल बनाने के लिए कांग्रेस लोगों को मौत के मुंह में ढकेल रही है.
इसलिए सियासत शुरू
अब अनलॉक की प्रक्रिया पर सियासत इसलिए शुरू हो गई है. क्योंकि किसान संशोधन बिल को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अगुवाई में पूरी कांग्रेस पार्टी कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन से राजभवन मार्च कर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेगी, जिस पर बीजेपी ने सीधा आरोप लगाया है. नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का कहना है कि कांग्रेस सरकार राजनीतिक लाभ लेने के लिए और अपने आंदोलन को सफल बनाने के लिए आम लोगों को मौत के मुंह में धकेल रही है.विधायकों को आना अनिवार्य
संकट में सियासत, मौत पर सियासत और ना जाने किन-किन बातों पर सियासत की दास्तान तो आपने कई बार सुना और देखा होगा, मगर महामारी के इस काल में लोगों को काल के मुहाने तक पहुंचा कर सियासत की एक बानगी यह भी देख लीजिए कि एक ओर सरकार लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने अपील करती है, तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी अपने तमाम मंत्री, विधायक, सांसद और कार्यकर्ताओं को राजभवन मार्च में उपस्थिति के लिए अनिवार्य आदेश जारी करती है. अब ऐसे में अनलॉक की मंशा चाहे जो भी हो मगर इतना तो तय है कि किसी सियासी सितम के आगे अगर कोरोना भी नतमस्तक हो जाए तो सियासतदानों का सियासी सफर सफल माना जाएगा.


