विष्णुदेव साय ने कभी खुलकर बोला नहीं, मगर वे जानते हैं सत्ता के बाहर और भीतर बीजेपी की खिचड़ी कैसे पक रही हैं. वे समझते हैं कि दर्जनों लोग उनकी कमियां निकालने, उनको हतोत्साहित करने, उनका नकारात्मक फीडबैक तैयार करने की तैयारी कर चुके हैं, बावजूद इसके विष्णुदेव साय उम्मीदों के पहाड़ के सामने राई समान हौसला लिए खड़े हो चुके हैं. उम्मीदों का पहाड़ इसलिए भी क्योंकि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पहाड़ से बड़े बहुमत के साथ पूरे आक्रमक तेवर के साथ धरातल पर डटी हुई है. सत्ता पक्ष के आक्रामक तेवर के सामने विपक्ष अलग-थलग दिखाई देने लगा है.
हिट फार्मूले से एक साल में ही परहेज पर उठे सवाल
2014 लोकसभा का चुनाव याद कर लीजिए कि कैसे देशभर में पीएम मोदी की आंधी चली थी. बीजेपी ने केंद्र की सत्ता में वापसी की थी. छत्तीसगढ़ बीजेपी का स्कोर 11 में से 10 रहा था. छत्तीसगढ़ के 11 संसदीय सीटों में से दुर्ग सीट छोड़कर बाकी 10 सीटों पर बीजेपी ने शानदार तरीके से कब्जा जमाया था. ठीक 5 साल बाद 2019 का लोकसभा चुनाव में बीजेपी आलाकमान ने तय किया कि प्रदेश के किसी भी मौजूदा सांसद को टिकट नहीं दिया जाएगा. इस फैसले के बाद तत्कालीन वरिष्ठ सांसद रमेश बैस, केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय, डॉ. रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह समेत तमाम दिग्गजों के सपनों को हवा में उड़ा दिया था जो फिर से चुनावी दंगल लड़ने कसरत शुरू कर चुके थे. बीजेपी ने नए चेहरे के साथ नए फार्मूले से चुनावी ताल ठोका, क्योंकि 2018 विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की जनता ने बीजेपी के रटे-रटाए दिखे-दिखाएं चेहरे को सिरे से नकार दिया था.डॉ. रमन सिंह ने विष्णुदेव साय को बधाई दी
पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ सदस्य श्री @vishnudsai जी को @BJP4CGState के अध्यक्ष पद का दायित्व प्राप्त होने पर हार्दिक शुभकामनाएँ।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके मार्गदर्शन में समस्त कार्यकर्तागण भाजपा की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने में सफल होंगे। pic.twitter.com/2ixWXbrHTp
— Dr Raman Singh (@drramansingh) June 2, 2020
2019 लोकसभा चुनाव का परिणाम आया, नए और युवा चेहरों के साथ बीजेपी 11 में से 9 सीटें जीतने में कामयाब हुई. बीजेपी का फार्मूला सुपरहिट साबित हुआ. राजनीति के जानकारों से लेकर सियासतदानों तक को लगने लगा यह छत्तीसगढ़ बीजेपी में परिवर्तन की मजबूत शुरुआत हो गई है. मगर उसके बाद ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला कि परिवर्तन के कारवां को आगे बढ़ाया जा सके. चाहे उपचुनावों में जिम्मेदारी देने की बात हो या नगरी निकाय चुनाव में पर्यवेक्षक बनाने की या पंचायत चुनाव में नेतृत्व की या कुछ कागजी आंदोलन में नेतृत्व करने की बात हो उसी पुराने ढर्रे पर बीजेपी उन्हीं चेहरों के साथ लौट आई थी. उसके बाद विष्णुदेव साय को तीसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनाना बताने के लिए काफी है कि ‘बदलाव का एक अध्याय’ था जो समाप्त हो चुका है. अब किताब वही पुरानी पढ़नी होगी. बीजेपी ने अपने सुपर हिट फार्मूले को दरकिनार तो किया मगर पुराने पर भरोसा कैसा रिजल्ट देगा, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा.
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ये ट्वीट किया है
छत्तीसगढ़ के मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चुने जाने पर मैं पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं छत्तीसगढ़ भाजपा के नेता @vishnudsai जी को बधाई देता हूँ।
आशा करता हूँ कि आपके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ भाजपा सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाए।
— Bhupesh Baghel (@bhupeshbaghel) June 2, 2020
अजीत जोगी को हराकर सत्ता तक पहुंची थी बीजेपी
छत्तीसगढ़ के कुनकुरी में जन्मे विष्णुदेव साय जनसंघ के जमाने से ही RSS से जुड़े रहे हैं. मोदी-1.0 में वे केंद्रीय राज्य मंत्री बने. 1999 से 2014 तक वे लगातार सांसद रहे. दो बार पार्टी के पूर्व में अध्यक्ष भी रह चुके हैं. छत्तीसगढ़ में 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सत्तासीन हुई थी. तात्कालिक बीजेपी दिवंगत अजीत जोगी जैसे चेहरे को मात देकर सत्ता तक पहुंची थी. मगर छत्तीसगढ़ बीजेपी की असली परीक्षा 2008 विधानसभा चुनाव में थी. तब विष्णुदेव साय अध्यक्ष थे और बीजेपी सत्ता में वापसी में कामयाब हुई. साय पहली बार 31 अक्टूबर 2006 से 9 मई 2010 तक अध्यक्ष रहे. दूसरी बार 21 जनवरी 2014 से 15 अगस्त 2014 तक अध्यक्ष रहे और बीजेपी प्रदेश की 11 में से 10 संसदीय सीटें जीतने में कामयाब रही थी. अब तीसरी बार अध्यक्ष बनाया कर उन्हें 2023 का टारगेट दिया गया है.
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