छत्तीसगढ़ी म पढ़व- संझा के पानी बिहनिया के झगरा


तुलसी चंवरा बिना घर ह घर कस नइ लागे. काबर कि देवी-देवता के संगे संग तुलसी के पूजा बिना चोला ह भरे कस नइ लागे. सबो घर कस मोरो घर म हे तुलसी के बिरवा. फेर ओहू माटी के चँवरा ल बरसात के पानी ह ओला खलखल ले ओदार देथे . साल के साल देवारी माटी संग चंवरा ल घलो चिकनाए ल परथे.


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