छत्तीसगढ़ी व्यंग्य – लोकतंत्र के सुखी–दुखी गण । Interesting blog Chhattisgarh Sarcasm over how democracy face happiness sadness– News18 Hindi

खबरीलाल अउ लालबुझक्कड़ राजधानी म घुमत रिहिन. लोकतंत्र से भेंट होगे. लोकतंत्र उन दुनो ल चिन्ह डरिस. दुनो संगी मन लोकतंत्र ल जय जोहार करिन. लोकतंत्र पूछ बइठिस-तुमन राजपथ म काबर भटकत हव ? कोरोना के डर तराश नइहे का ? खबरीलाल किहिस-हे! लोकतंत्र हम राजधानी म तोर वैभव ल देखे बर आय हन. आपके ठसका बहुत हे. जहाँ तक कोरोना के डर के बात हे. हमन वैक्सीन लगवा डरे हन. देख लेव मास्क लगाय हन.  सोशल डिस्टेंशिंग के पालन करत हन. सेनेटाइजर घलो धरे हन. राजधानी  चमकत हे. लोकतंत्र हाँसिस अउ किहिस-सब माया हे. लालबुझक्कड़ किहिस-हे, लोकतंत्र जी, आप त हमर देश म सब जगा रमे हो. आपसे कोनो बात, लुकाय-चोराय नइ जा सके. गाँव म लोकतंत्र हे. शहर म लोकतंत्र हे. हमर देश के आत्मा म लोकतंत्र हे. इहाँ के हर मनखे चलत फिरत लोकतंत्र हे. हे! लोकतंत्र तोर किरपा ल पा के कतको जानवर कस मनखे घलो तरगे हें. सत्ता के चाशनी छांनत हें. धन –दोगानी ले घर भरगे. छलकत ले खावत-पियत हें.

दारू प्रादेशिक पेय

खबरीलाल किहिस-हे! लोकतंत्र, आप मिलेव त विधानसभा चुनाव होय कस लगिस. लालबुझक्कड़ किहिस-लोकतंत्रजी हमर प्रदेश म लोकतंत्र-पेय(दारू) बहुत लोकप्रिय हे. लोकतंत्र-पेय(दारू) ल कतको परेमी मंतर मार के सुबह अउ संझा ले के प्रदेश सेवा करथे. ये द्रव्य ज्ञान-चक्षु खोलथें. लोकतंत्र किहिस -चलो थोरकुन बर (बरगद) पेड़ तीर बइठबोन. वुहें गोठियाबोन. अउ तीनों बर पेड़ के छइहाँ म बइठगें. लोकतंत्र ल खबरीलाल किहिस-सरकार ल चाही के दारू ल छत्तीसगढ़ के प्रादेशिक-पेय घोषित कर देय. येखर से दारू ल पूरा सम्मान मिलही. लोगन एखर गुन-गान करहीं. राजकोश तेजी से भरही. जइसे हमर प्रदेश म दारू सहज उपलब्ध हे व्इसने पिटरोल-डीजल के क्षेत्र म छत्तीसगढ़ बहुत तरक्की करे हे. पिए के पानी बर मनखे भले तरस जथे फेर पिटरोल-डीजल बर नइ तरसें. जगा-जगा पिटरोल पंप के सुंदर बेवस्था थे. पिटरोल-डीजल भरवाव कार-मोटर साइकिल कुदाव. छत्तीसगढ़ के अर्थव्यवस्था हुंकार भरत दउड़त हे. पाउच-सभ्यता अपन ऊँचाई म हे. भीषण गरमी हे. कूल वाटर पी-पी के बुद्धि जुड़ होगे हे. बादर बरसों-बरसों करथे अउ टरक देथे.

पावरफूल करेंट

लालबुझक्कड़ लोकतंत्र ल किहिस-इहाँ के दारू के पावर बहुत हे. शौक़ीन मन थोरकुन पीथें. तहाँ ले उनकर तन-बदन म दारू के करेंट दउड़ना शुरू हो जथे. इही करेंट के परताप से घर के डउकी-लइका कंट्रोल म रहिथें. ये नश्वर दुनिया म जो आनंद ये प्रादेशिक-पेय म हे, ओ आनंद कहूं नइ हे. खबरीलाल टोकिस किहिस-छत्तीसगढ़ म लोगन कुछ जादा पावर म आ जथें. अपराध खूब होवत हे. येखर पावरफूल करेंट से हर परकार के अपराध होवत हे. दारू-बंदी चुनावी किस्सा रिहिस. बात अइस अउ गिस. इहाँ ऑटो उद्योग कोरोना के बावजूद हरियाइस. गोधन न्याय योजना म पइसा कमा के कतको झन मन जोरदार फटफटी दउड़ावत हें.

यहू सुराज आय

लोकतंत्र ह दुनो संगी के याददास्त ल दुरूस्त करिस किहिस- छत्तीसगढ़ म तो गाँधी बबा के सुराज चलत हे न? दुनो संगी मुड़ हलइंन. हाँ..हाँ ..नरवा, गरुवा ,घुरूवा, बारी के दिन अलटे-पलटे के खबर हे. सुराजी गाँव म मनखे मजबूत होवत हें. घुरूवा के दिन बहुरगे हे, कई जिला म नरवा बोहाय के लइक पानी नइ बरसे हे, गरुवा मन बर गोधन नियाव योजना खूब चलत हे, गाँव-गंवई म घरों-घर बारी हे. साग-भाजी हे. गोबर खुल्ला धन होगे हे. इहाँ गोबर चोरी के खबर घलो आए-दिन आवत रहिथे. गोबर चेतना के जुग चलत हे. वर्मी कम्पोस्ट चरचा म हे. लोकतंत्र पूछिस-राजगद्दी कइसे चलत हे ? इहाँ मिल बाँट के मुहूँ मीठ करत हें.. खुश रहो, खाव, पियो.

सड़े-गले व्यवस्था

लालबुझक्कड़ किहिस-लोकतंत्र भैया पूरा व्यवस्था सड़े-गले हे. आम मनखे ल देख के ये तंत्र आँखी मूंद लेथे. ये सड़े व्यवस्था म इहाँ ले उहाँ तक भ्रष्टाचार हे.  कतको उंच कुरसी वाले मन के आँखी तोपाय, कान बोजाय रहिथे. उन सत्य देखें न सुनें. सुराजी बेंदरा मन अपन सोच बदल ले हें. विपक्ष बात-बात म कहिथें के लोकतंत्र के हत्या होगे. खबरीलाल किहिस-भाई लोकतंत्र तेंहा त रावण बरोबर अमर हस. विपक्ष के नेता मन ल तोर बड़ा चिंता रहिथे. हर दिन हर राज्य म तोर हत्या होय के खबर आथे. फेर झट दूसर दिन मरे बर तियार हो जथस. लोकतंत्र खिलखिला के हाँसिस फेर किहिस-भारत नेता मन के लीलाधाम आय. अधिक संख्या म नेता लीलाधारी हें. मोर नाव के लेके लीला करथें.

आफिस के अपन ढर्रा

लालबुझक्कड़ किहिस-आम मनखे छोटे-छोटे बुता ल कराय बर हलाकान हो जथें. नियम बनइया मन नियम बना के अपन सुवारथ के खेती करे बर भीड़ जथें. हर आफिस अपन ढर्रा म चलथे. डिजिटल इंडिया के बाद म घलो आम मनखे कार्यालय म नाक रगड़े बर मजबूर कर दे जथे. छोटे-छोटे बुता बर कुकुर कटाएँन होथे. हर सरकारी बुता युद्ध लड़े कस होथे. लोक सेवा गारंटी अधिनियम केवल पोस्टर कस हे. बाबू ह कार्यालय के अनिवार्य मजबूरी होथे. कभू बाबू साहेब ल चलाथे त कभू साहेब जी बाबू ल. दुनों मिलके आँफिस ल पेल ढकेल के चलाथें. हाथी के दांत देखे के अलग अउ खाय के अलग होथे. प्रदेश म सफेद हाथी हर जगा मिल जथे. वो ह अपन चारा के इन्तिजाम खुद कर लेथें. सरकारी हाथी के नरी म घंटी बंधाय रहिथे यानि वो जिहां चाहे जब चाहे, जो चाहे खा पी सकत हे. ओखर बर न रोका होही न कोनो छेंका.

 लोकतंत्र के दुखी आत्मा

लोकतंत्र किहिस मेंहा सब जानत हंव. कोनो मोर छाती उपर, त कोनो कांध उपर, त कोनो मोर मुड़ उप्पर रख के अपन स्वार्थ के अस्त्र-शस्त्र चलाथें. मोरो आत्मा दुखी होथे. मनखे मन ल नियाव नइ मिल पांय. सब अपन-अपन योजना ल के मसीहा बने म लगे हें. कतको झन त जीते जी अमर होय बर भिड़े हें. सब के अपन –अपन किस्सा-कहनी हे.

समाजवादी –पुन्न

खबरीलाल किहिस-लोकतंत्र भैया,हमर देश खूब तरक्की करत हे. महंगाई के हम आरती उतारत हन. सरकार समाजवाद लाय के पुन्न करम म लगे हे.

 गाल बजनिया

लालबुझक्कड़ किहिस-अंगरेजी कूटनीति हर क्षेत्र म बांटो अउ राज करो के महामंत्र से चलत हे .राज करइया मन जनता के धन ल फ्री म लुटावत हें. सरकारी धन लुटाय के राज्यवार प्रतियोगिता चलत हे. वाह रे! गरीबी रेखा-के गेम. उन वोट के फसल!!. सब सुनियोजित ढंग ले चले आत हे. लोकतंत्र किहिस-मेंहाँ सब ल झेलत हंव. कभू-कभू हँफरासी लाग जथे. कुछ अइसे महापुरूष हें जेन सबे राजनीतिक कुरसी ल अपन बपौती समझथें. जुच्छा गाल बजनिया मन के भीड़ बहुत हे. भारतीय राजनीति म नमूना मन के का कमी हे. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here